आम परंपरा यह है कि महिला अपने मायके में पहले बच्चे को जन्म देती है, जबकि दूसरा बच्चा ससुराल में पैदा होता है। लेकिन देश में एक गांव ऐसा भी है, जहां आज तक कोई बच्चा पैदा नहीं हुआ।
मदुरै में सीरूमलाई पहाड़ियों में बसे गांव मीनाक्षीपुरम ने यह परंपरा कई साल पहले तोड़ दी थी। बीते कई साल से यहां किसी बच्चे का जन्म नहीं हुआ।
गर्भवती महिलाएं सातवें महीने में गोदभराई की रस्म के बाद पहाड़ छोड़कर मैदानी इलाकों में चली जाती हैं और बच्चे का जन्म होने के बाद ही लौटती हैं।
यह कोई बगावत नहीं है। दरअसल, आसपास कोई क्लीनिक नहीं है और आपातकालीन स्थिति में अस्पताल तक जाने की सुविधा नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों के पास अपने घर छोड़कर दूसरी जगह जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
45 वर्षीय लक्ष्मी का कहना है कि उन्हें याद नहीं कि आखिरी बार उनके गांव में बच्चा कब जन्मा था। उन्होंने कहा, "आम तौर पर पहला बच्चा मायका और दूसरा ससुराल में होता है, लेकिन मीनाक्षीपुरम में महिलाओं के डिलीवरी के लिए मैदानी इलाकों में जाना पड़ता है।"
एक अन्य महिला ने बताया, "हम या तो अपने रिश्तों के घर पर रहते हैं या मकान किराए पर लेते हैं। हम डिलीवरी के एक महीने बाद गांव लौटते हैं।"