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पठानकोट की आंखों देखी, 'सेना ना होती तो हम जिंदा ना बचते'

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आतंकवादियों का निशाना बने पठानकोट एयरबेस में फंसे बड़ोदरा के एक परिवार ने सैनिकों के प्रति आभार जताया है। इस परिवार का कहना है कि वह उन बहादुर सैनिकों का कर्जदार है, जिन्होंने उनकी जान बजाने के लिए अपनी जान दे दी।
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बड़ोदरा के रहने वाले मयूर चवड़ा शुक्रवार को कश्मीर से लौटते हुए अपने परिवार के छह सदस्यों के साथ एक रिश्तेदार के यहां ठहरे। यह रिश्तेदार पठानकोट एयरबेस में कार्यरत हैं।
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बड़ोदरा के एक परिवार ने सुनाया आंखों देखा हाल

चवड़ा ने बताया कि शनिवार की रात को छह आतंकवादी पठानकोट एयरबेस में घुस आए। वे वहां सुरक्षाकर्मियों से 72 घंटे तक लड़ते रहे। चवड़ा ने फोन पर बताया कि वे लोग सेना के हर निर्देश का पालन कर रहे थे।

लोगों को अंदर रहने के लिए रहने के लिए कहा गया था। किसी भी बाहरी व्यक्ति को अंदर नहीं घुसने देने को कहा गया था। हम लोग पूरी तरह दुनिया से कट गए थे।

हालात की जानकारी सिर्फ टीवी से मिल रही थी। हम लोग एक क्वार्टर में बंद थे। हमारे बच्चे काफी डर गए थे और वे बिस्तरों के नीचे छिप गए थे।

हमने राशन जमा कर लिया था लेकिन दूध नहीं था। हम 300 मीटर की दूरी पर गोलियां चलने की आवाज सुन रहे थे। लेकिन हमें विश्वास था कि हमारे सैनिक हमारी रक्षा करने में सफल हैं।
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