अदालत ने पूर्व दूरसंचार सचिव श्यामल घोष सहित तीन कंपनियों के खिलाफ 2जी घोटाले की सुनवाई 30 जनवरी तक स्थगित कर दी। राजग सरकार के समय में हुई अनियमितताओं के मुद्दे पर एक याचिका दायर की गई है। सीबीआई के अनुसार आवंटन में अनियमितताओं के कारण सरकार को 846 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।
पटियाला हाउस स्थित सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ओ.पी. सैनी को आरोप पत्र पर सोमवार को संज्ञान लेना था। सीबीआई के वकील ने अदालत को बताया कि इस मामले में आरोपपत्र से जुड़े कुछ दस्तावेज अभी दाखिल करने हैं। उन्होंने इसके लिए दो सप्ताह का समय मांगा है। अदालत ने उनका आग्रह स्वीकार करते हुए सुनवाई 30 जनवरी तक स्थगित कर दी।
आरोपपत्र में सीबीआई ने भारती एयरटेल, वोडाफोन इंडिया लिमिटेड, हचिसन मैक्स एवं स्टर्लिंग सेल्युलर व अवकाश प्राप्त एवं तत्कालीन दूरसंचार सचिव श्यामल घोष को आरोपी बनाया है। सीबीआई ने कहा कि जिस समय आवंटन में अनियमितताएं बरती गईं उस समय स्व. प्रमोद महाजन संचार मंत्री थे, मगर उनकी मृत्यु हो चुकी है अत: उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती।
सीबीआई द्वारा दर्ज प्राथमिकी में बीएसएनएल के पूर्व निदेशक जे.आर. गुप्ता को अभियुक्त बनाया गया था, मगर दायर आरोपपत्र में सीबीआई ने उनका नाम गवाहों की सूची में पेश किया है। सीबीआई ने आरोपपत्र में कहा कि एयरटेल व वोडाफोन के प्रमोटरों के खिलाफ कोई भी साक्ष्य नहीं मिले हैं।
सीबीआई ने कहा कि प्रमोद महाजन के कार्यकाल में डीओटी-दूरसंचार विभाग ने दूरसंचार कंपनियों के लिए लाइसेंस के साथ दिया जाने वाला न्यूनतम 4.4 मेगाहर्ट्ज को बढ़ाकर 6.2 मेगाहर्ट्ज कर दिया। सीबीआई ने अदालत से सभी अभियुक्तों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र व भ्रष्टाचार की विभिन्न धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह किया है।