उच्चतम न्यायालय ने अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि अगर किसी संदिग्ध स्थिति में पत्नी की मौत हो जाती है तो पति उसकी संपत्तियों और स्त्रीधन पर अपना हक नहीं जता सकता।
मुख्य न्यायाधीश टीएस ठाकुर, न्यायाधीश एके सिकरी और न्यायाधीश आर भानुमति की पीठ ने यह स्पष्ट किया कि अगर शादी के सात सालों के भीतर किसी महिला की संदिग्ध परिस्तिथियों में मौत हो जाती है तो उसकी संपत्ति उसके बच्चों या उनके न होने पर उसके मायके के लोगों को दे दी जाएगी।
हालांकि, न्यायालय ने ये भी कहा कि अगर सामान्य परिस्थितियों में महिला की मौत होती है तो उसके ससुराल पक्ष के लोग उसकी संपत्ति पर अपना दावा कर सकते हैं।