भारतीय संसद हंगामे की वजह से भले ही सुर्ख़ियों में रहे लेकिन वहां गंभीर बहस होती है, तो कभी-कभी ठहाके भी गूंजते हैं। ऐसे ही 6 गुदगुदाने वाले किस्से आप भी जानिए।
मशहूर संविधान विशेषज्ञ और लोकसभा के पूर्व महासचिव सुभाष कश्यप ऐसे ही कुछ क़िस्से याद करते हैं। जिनको सुन आप भी हंसे बिना नहीं रह पाएंगे।
आपको औरतों के बारे में क्या मालूम
एक बार डॉक्टर राम मनोहर लोहिया संसद में स्टालिन की बेटी स्वेतलाना को भारत में शरण दिए जाने की मांग कर रहे थे। कांग्रेस सांसद तारकेश्वरी सिन्हा ने कहा, "लोहिया जी आप तो बैचलर हैं, आपने शादी नहीं की, आपको औरतों के बारे में क्या मालूम।"
लोहिया जी तपाक से बोले, "तारकेश्वरी तुमने मौका ही कब दिया।"
मेरा सिर भी काट कर दे देंगे?
भारत-चीन युद्ध के बाद नेहरू जी ने अक्साई चिन को लेकर संसद में कहा, "नॉट ए ब्लेड ऑफ़ ए ग्रास ग्रोज़ देयर (वहां तो घास की एक पत्ती भी नहीं उगती)।"
महावीर त्यागी, जो गंजे थे उन्होंने कहा, "मेरे सिर पर एक भी बाल नहीं है तो इसका मतलब क्या ये कि आप मेरा सिर काटकर चीनियों को दे देंगे।"
मैं तो गोल हूं
स्वतंत्र पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक पिल्लू मोदी काफ़ी मोटे थे। जब एक बार वो संसद में स्पीकर की ओर पीठ कर के बोल रहे थे तो एक सदस्य ने कहा कि सदस्य को स्पीकर की ओर देखकर बोलना चाहिए।
पिल्लू मोदी ने इसका जवाब देते हुए कहा, "मेरा न तो कोई सामना है और न पिछड़ा है, मैं तो गोल हूं।" इस बात से वहां ठहाके गूंज उठे।
जो दूसरों की पत्नी को भगा कर ले जाते हैं
आचार्य कृपलानी संसद में कांग्रेस की आलोचना कर रहे थे। उनकी पत्नी कांग्रेस की नेता थीं। एक सदस्य ने खड़े होकर कहा कि आप ऐसी पार्टी की आलोचना कर रहे हैं जो आपकी पत्नी को प्रिय है।
कृपलानी जी तपाक से बोले, "अभी तक मैं समझता था कि कांग्रेस के लोग बेवकूफ़ हैं लेकिन अब मुझे पता चला कि वो बेवकूफ़ ही नहीं गुंडे भी हैं जो दूसरों की पत्नी को भगा कर ले जाते हैं।"
"मैं केरल से आ रहा हूं"
सच्चर कमेटी की सिफ़ारिशों को लेकर 29 अप्रैल, 2010 को लोकसभा में चर्चा के वक़्त सांसद पीके बीजू समय का ध्यान न रखते हुए बोलते जा रहे थे।
लोकसभा स्पीकर ने उन्हें चेताते हुए कहा, “अपना पूरक प्रश्न पूछिए।" पीके बाजू ने कहा "मैडम मैं केरल से आ रहा हूं"
तो स्पीकर ने उनसे तपाक से कहा, "जल्दी आइए!”
कहीं हमें तांडव नृत्य करना पड़ जाए!
21 नवंबर 2007 को नंदीग्राम में एसईज़ेड के मुद्दे पर चर्चा हो रही थी। लालकृष्ण आडवाणी ने कहा, "मैं इतना कहूंगा कि यह सदन सत्य तक पहुंचना चाहता है और हमारे यहां सत्य को शिव कहते हैं और शिव तक पहुंचने के लिए नंदी को पार करना पड़ता है, सोमनाथ जी यहां बैठे हुए हैं।"
इस पर स्पीकर सोमनाथ चटर्जी ने चुटकी लेते हुए कहा, "पर आप लोग ऐसा मत कीजिए कि हमें तांडव नृत्य करना पड़ जाए।"