संसद में जदयू नेता शरद यादव के दक्षिण भारतीय महिलाओं के रंग और शरीर की बनावट के बारे में टिप्पणी पर विवाद शुरू हो गया। लेकिन ये पहला मामला नहीं है जब किसी राजनेता ने ऐसा बयान दिया हो जिसे महिला विरोधी माना गया।
कुछ दूसरे नेताओं के विवादित बयानों पर एक नज़र डालें। भारत में बलात्कार बढ़ने को लेकर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था, "बलात्कार पाश्चात्य सभ्यता का दुष्प्रभाव है और इसीलिए शहरी इलाकों में ज़्यादा होता है। हमारे गांव जहां राष्ट्रीय भावना प्रबल होती है वहां बलात्कार नहीं होते हैं।"
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक रैली को संबोधित करते हुए सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने बलात्कार विरोधी क़ानून को गलत बताया था। यादव ने कहा था, "जब लड़के और लड़कियों में कोई विवाद होता है तो लड़की बयान देती है कि लड़के ने मेरा बलात्कार किया। इसके बाद बेचारे लड़के को फांसी की सज़ा सुना दी जाती है। बलात्कार के लिए फांसी की सज़ा अनुचित है। लड़कों से गलती हो जाती है।"