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मोदी सरकार के फैसले के खिलाफ हजारों एकजुट

Sat, 17 Aug 2013 04:01 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
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स्वतंत्रता दिवस पर एक तरफ गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी अपने भाषण में प्रधानमंत्री को चुनौती दे रहे थे तो दूसरी तरफ राज्य के दालोद गांव में 'मारुति वापस जाओ' के नारे गूंज रहे थे।
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हंसलपुर के पास दालोद गांव में जानीमानी कार निर्माता कंपनी मारुति के 4000 करोड़ के प्लांट के विरोध में करीब 5000 किसान और उनके परिवार के लोग इकट्ठा हुए और मारुति वापस जाओ की मांग की।

यह विरोध प्रदर्शन 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर किया गया। विरोध करने वाले गांवों की जमीन मारुति कंपनी को ओद्यौगिक इकाई शुरू करने के लिए आवंटित की गई है। इन गांवों की जमीनें विशेष निवेश क्षेत्र(एसआईआर) के अंतर्गत आती हैं।
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हांलाकि विरोध से एक दिन पहले ही मोदी सरकार ने लोगों के विरोध के आगे झुकते हुए 44 गांवों में से 36 को मंडल-बछारजी विशेष निवेश क्षेत्र से बाहर कर दिया था।

सामाजिक कार्यकर्ता से नेता बने कनुभाई कलसारिया का कहना है कि बचे हुए आठ गांव भी एसआईआर के तहत नहीं आना चाहते।

उन्होंने कहा कि किसान यह भी चाहते हैं कि मारुति यहां से चली जाए। एसआईआर में आने वाले आठ में से पांच गांव पूरी तरह से मारुति प्लांट के विरोध में हैं।

'गांवों में कराया जाए जनमत संग्रह'
आंदोलन के नेता लालजी देसाई के अनुसार सरकार ने गौचर और निजी जमीन को राजस्व के लिहाज से बेकार बताकर मारुति को दी थी। लेकिन किसान कंपनी को जमीन दिए जाने तक वहां पर खेती कर रहे थे।

कलसारिया की मांग है कि हाइकोर्ट के न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति बनाई जाए जो इन आठ गावों में जनमत संग्रह करे कि वे एसआईआर के तहत आना चाहते हैं या नहीं।

बछारजी-हंसलपुर के लिए मारुति को चुने जाने के बाद वहां पर यह सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन है। प्रदर्शनकारियों ने अपने गुस्से का इजहार करने के लिए मारुति कार का पुतला भी जलाया और जमकर नारेबाजी की।
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कंपनी का कहना है कि 2.5 लाख इकाइयों के निर्माण के लिए संयंत्र साल 2015 तक शुरू हो जाएगा।

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