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दिल्ली में स्वाइन फ्लू के 33 नए मामले

Wed, 13 Feb 2013 09:34 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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स्वाइन फ्लू तेजी से दिल्ली और एनसीआर में अपने पैर जमाता जा रहा है। मंगलवार को दिल्ली में 33 नए मामले सामने आए। सरकार के मुताबिक स्वाइन फ्लू से दिल्ली में अब तक चार मौतें हो चुकी हैं। जबकि दिल्ली के अस्पतालों में अभी तक कुल 11 मौत दर्ज की जा चुकी है।
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दिल्ली सरकार के स्वाइन फ्लू के नोडल अधिकारी डॉ. चरण सिंह ने बताया कि मंगलवार को दिल्ली में स्वाइन फ्लू के कुल 33 नए मामले आए। उन्होंने बताया कि सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती एक युवती की मौत स्वाइन फ्लू से हो गई है।

सर गंगा राम, बीएल कपूर, मदन मोहन मालवीय अस्पताल में तीन-तीन मरीजों को भर्ती कराया गया है। जबकि सेंट स्टीफंस, होली फैमिली, राम मनोहर लोहिया, एलएनजेपी व एक निजी अस्पताल में एक-एक मरीज को भर्ती कराया गया है।
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आरएमएल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एच.के. कार के मुताबिक पिछले चौबीस घंटे में अस्पताल में आठ नए मरीजों को भर्ती कराया गया है। जबकि दिल्ली सरकार के मुताबिक आरएमएल अस्पताल में एक ही मरीज को भर्ती कराया गया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में अस्पताल के आईसीयू में चार मरीज और स्वाइन फ्लू के लिए बने आइसोलेटेड वार्ड में 23 मरीजों का इलाज चल रहा है।

स्वाइन फ्लू के खतरे से सरकार के माथे पर बल
स्वाइन फ्लू के तेजी से बढ़ते मामले की वजह से दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार को दिल्ली सचिवालय में वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों और चिकित्सकों की बैठक बुलाई। बैठक में कहा गया कि सभी एन्फ्लूएंजा में एच1एन1 जांच कराने की जरूरत नहीं है। लेकिन यदि 65 वर्ष की उम्र वालों में यह लक्षण दिखे तो उन्हें तुरंत भर्ती किया जाना चाहिए।

भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के निदेशक डॉ. पी. रविंद्रन ने कहा कि मौजूदा हालात में एच1एन1 वैक्सीन जरूरी नहीं है। डॉ. रविंद्रन ने कहा कि रोगी को खांसी, गले में खराबी, शरीर में दर्द के साथ बुखार हो तब भी मरीज को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत नहीं है। क्योंकि ऐसे लक्षण साधारण फ्लू में भी होते हैं। उन्होंने कहा कि यदि रोगी को उच्च रक्तचाप हो, गला बहुत ज्यादा खराब हो, सांस लेने में दिक्कत हो, फेफड़े में ज्यादा संक्रमण हो तो तुरंत इलाज करवाना चाहिए।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. ए के वालिया ने कहा कि ऐसे मरीजों को भर्ती करने की आवश्यकता होती है, जिन्हें आघात की स्थिति हो। थूक व शौच में खून आता हो। उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार द्वारा चिह्नित 22 अस्पतालों में से किसी भी अस्पताल में मरीज को फौरन भर्ती कराना चाहिए। डॉ. वालिया ने कहा कि यदि मरीज को 48 घंटे में अस्पताल पहुंचा दिया जाए तो उपचार संभव है।
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