बार कॉउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा पहली बार वकील सम्मेलन में आए थे और इस दौरान उन्होंने एक चौंकाने वाला रहस्योद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि भारत में 30 प्रतिशत वकील ऐसे हैं जो फर्जी हैं।
उनके पास या तो वकालत की डिग्री फर्जी है या फिर वो वकालत नहीं करते। चेन्नई में आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए मिश्रा ने कहा कि काउंसिल ऐसे वकीलों के खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है।
काउंसिल के आकलन के अनुसार 20 प्रतिशत वकील फर्जी डिग्रियों के आधार पर कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली के पूर्व न्याय मंत्री के पास भी फेक डिग्री थी।
फर्जी डिग्रियां की जा रही हैं जारी
मिश्रा ने कहा कि जो वकील लॉ से ग्रेजूएट होते हुए भी वकालत नहीं कर रहे
हैं वो पेशे की गुणवत्ता को अपमानजनक तरीके से गिरा रहे हैं।
उन्होंने कहा
कि हम ऐसे वकीलों को छाटेंगे जो प्रैक्टिस नहीं कर रहे हैं और उन्हें
दस्तावेजों से भी बाहर का रास्ता दिखाएंगे। मिश्रा ने यह भी कहा कि ऐसे ही
वकील छोटे और तुच्छ मुद्दों पर हड़तालों और बहिष्कार में शामिल होते हैं।
मनन
लगातार दो बार से बार काउंसिल के अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि हजारों की
संख्या में कानून की फर्जी डिग्रियां जारी की जा रही हैं।
सबका वेरीफिकेशन भारी काम
इतनी ही संख्या
में वकील बिना उचित डिग्री के विभिन्न कोर्ट और अधिकरणों (ट्रिब्यूनल) में
प्रैक्टिस कर रहे हैं।मिश्रा के मुताबिक काउंसिल सत्यापन के नियम पूरे
देश में कर्नाटक और केरल को छोड़कर पूरे देश में लागू हैं।
बीसीआई
अध्यक्ष मिश्रा की बातों का जवाब देते हुए मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व जज के.चंद्रु ने कहा कि सभी वकीलों का वेरीफिकेशन बहुत भारी काम है।
उन्होंने
कहा कि प्रोफेशनल कॉलेजों की बाढ़ में जो हर प्रोफेशनल कोर्स के लिए
वेरीफिकेशन पा लेते हैं वो चाहे डॉक्टर का कोर्स हो या फिर वकालत का।
बना लें एक कमेटी
ये
बेहतर होगा कि काउंसिल कुछ पूर्व जजों की एक कमेटी बनाकर जिसका अध्यक्ष
किसी पूर्व जज को बना दिया जाए जिसके लिए वकीलों के रिकार्ड्स की जांच करना
बड़ी बात नहीं है खास तौर उन लोगों की जांच करना जो वकालत में सक्रिय हैं।
मिश्रा ने अपने भाषण में कहा था कि काउंसिल का अगला निशाना राष्ट्रीय विधि
विश्वविद्यालय होंगे, जो गुणवत्ता का दावा करते हैं। उन्होंने कहा कि साल
के अंत तक हम इस व्यवस्था को पूरे देश में लागू करेंगे।