अपने पुराने फैसले को पलटते हुए भाजपा बृहस्पतिवार को टूजी मामले की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की बैठक में शामिल हुई। हालांकि भाजपा इस बैठक में भी प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री को गवाही के लिए बुलाने का राग अलापती रही।
समिति के चेयरमैन पीसी चाको आखिरकार भाजपा और लेफ्ट की मांग पर बैठक में चर्चा के लिए राजी हो गये हैं। लेफ्ट सिर्फ वित्तमंत्री को गवाही के लिए बुलाने की मांग कर रहा है। भाजपा ने तय किया है कि वह समिति की अगली बैठक में भी शामिल होगी।
पार्टी प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री को गवाही के लिए बुलाने की मांग पर इससे पहले की तीन बैठकों का बहिष्कार कर चुकी है, लेकिन पिछली बैठक में पूर्व कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर के बयान के बाद भाजपा ने बैठक में शामिल होने का फैसला किया।
भाजपा की दलील है कि चंद्रशेखर चूंकि कह चुके हैं कि वे टूजी मामले में प्रधानमंत्री को पूरी जानकारी दे चुके थे, ऐसे में अब प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री को गवाही के लिए बुलाने की मांग का औचित्य और बढ़ गया है। बृहस्पतिवार को भी भाजपा सदस्यों ने यही मांग दोहराई।
सूत्रों के अनुसार भाजपा के इस रुख पर आपत्ति जताते हुए कांग्रेस के एक सदस्य ने गंभीर तौर पर बीमार चल रहे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को भी गवाही के लिए बुलाने की मांग कर दी। डीएमके सदस्य का कहना था कि ए. राजा को भी अपनी बात कहने का मौका दिया जाना चाहिए।
इसके अलावा भाजपा सदस्यों ने चाको के उस रुख पर भी एतराज जताया, जिसमें समिति के फैसलों की आलोचना करने पर नोटिस देने की बात कही गई थी। यह सुझाव सामने आया कि प्रधानमंत्री को प्रश्नावली भेज दी जाए। हालांकि भाजपा सदस्यों ने कहा कि वे इस तरह के सुझाव पर राजी नहीं हैं। भाजपा ने तय किया है कि अब वे समिति की बैठक में शामिल होकर अपनी मांग पर जोर देते रहेंगे।