20 साल पहले देश की आर्थिक राजधानी मुंबई को दहलाने वाले बम धमाकों में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुनाया। 12 मार्च, 1993 के बम धमाकों को एक लंबा समय बीत चुका है, लेकिन उसके जख्म आज भी हरे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म अभिनेता संजय दत्त को पांच साल की सजा सुनाई। वहीं, याकूब मेमन को भगोड़े दोषियों के बाद सबसे बड़ा अपराधी मानते हुए उसकी फांसी की सजा को बरकरार रखा।
कोर्ट ने फांसी की सजा पा चुके 10 दोषियों की सजा को कोर्ट ने उम्रकैद में बदल दिया। टाडा अदालत में उम्रकैद की सजा पाए 20 दोषियों में से 17 की सजा को बरकरार रखा गया, जबकि एक दोषी की उम्रकैद की सजा को 10 साल की कैद में बदल दिया। हालांकि धमाकों का मास्टर माइंड माना जाने वाला अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम आज भी फरार है।
लगातार हुए 12 बम धमाकों ने इस शहर की रफ्तार रोक दी थी। इन धमाकों में 257 लोग मारे गए थे और 713 लोग जख्मी हुए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में एक बार फिर पाकिस्तान की भूमिका पर भी सवाल उठाया। कोर्ट ने माना कि 1993 के बम धमाकों के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई का भी हाथ था।
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि दोषियों को बम बनाने और अत्याधुनिक हथियारों का प्रशिक्षण पाकिस्तान में ही मिला था। आईएसआई और दाऊद इब्राहिम ने आतंकियों को मुंबई में हथियार और गोला-बारूद उपलब्ध कराए थे।
कैसे मिला था सुराग
मुंबई पुलिस के लिए इन धमाकों की जांच एक बहुत बड़ी चुनौती थी, लेकिन जांच एजेंसियों के साथ मिलकर पुलिस ने इस मामले की जांच को आगे बढ़ाया।
शुरुआत में पुलिस को मुंबई में इतनी बड़ी मात्रा में गोला बारूद पहुंचने का कोई सुराग नहीं मिला, लेकिन विस्फोटकों से भरे एक स्कूटर ने पुलिस को मामले की तह तक पहुंचाया।
पुलिस को जब इस स्कूटर की जानकारी मिली, तो सबसे पहले उसने विस्फोटकों को निष्क्रिय कराया। इसके बाद पुलिस को टाइगर मेमन के घर से एक चाभी मिली, जो इसी स्कूटर की थी और पुलिस के हाथ एक बड़ा सुराग लगा। यहां से जांच आगे बढ़ती चली गई।
मामले में जुड़ा संजय दत्त का नाम
पुलिस के हाथ सुराग लगते ही बड़ी संख्या में आरोपियों की धरपकड़ शुरू हो गई। इस दौरान एक चौंकाने वाला नाम सामने आया। पुलिस को जांच में बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त के घर से एक एके-47 बंदूक मिली। पुलिस ने संजय दत्त को टाडा के तहत गिरफ्तार कर लिया।
टाडा कोर्ट में 14 साल चला मुकदमा
इस मामले में 4 नवंबर 1993 को शुरू हुआ मुकदमा करीब 14 साल तक चला। मुकदमे में 100 आरोपियों को सजा हुई, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। इन बम धमाकों में करीब 257 लोग मारे गए थे, जबकि 713 लोग जख्मी हुए थे।
पिछले 20 सालों में मुंबई में बहुत कुछ बदल गया है, लेकिन मुंबईवासी आज भी उन बम धमाकों को याद कर दहल जाते हैं। शायद इसलिए, क्योंकि इन धमाकों का मुख्य सरगना अभी तक पुलिस की गिरफ्त से दूर है।