भक्ति का घर अगर देखना हो तो चलिए मेरे साथ गुजराती टोला। बरसाना वासी जहां अपने-अपने कामों में उलझे हैं, वहीं इस टोले ने भजन को ही अपना कर्म बना लिया है।
करीब तीस चालीस परिवार अपनी भौतिक दुनिया छोड़ श्री जी के धाम में बस गए हैं। सबने अपने मकान बना लिए हैं। यहां आकर इनका नया नामकरण हुआ। अपने जन्म के नाम छोड़ राधा कृष्ण और उनसे जुड़ी लीलाओं को ही अपनी पहचान बना लिया।
इन्हें न तो प्रचार की चाह है और न ही सुख सुविधाओं की। सोमवार की सुबह हम भी चुपचाप यहां आ पहुंचे। हर घर में राधे राधे की गूंज थी। अधिकांश लोगों ने इंटरव्यू के लिए मना कर दिया। बोले, भक्ति का प्रचार नहीं किया जाता। उसके बाद मान मंदिर में सेवा करते 20 वर्षीय नीलमणि के घर पहुंचे। उसकी मां रासमणि ने कहा, नीचे भजन चल रहा है, वही चले जाओ।
नीचे नीलमणि के पिता कृष्ण मणि और उनके साथी युगल सरकार के समक्ष संकीर्तन में डूबे थे। गुजरात से होली देखने आए बच्चे शाश्वत, प्राची और श्याम भी ढोलक लिए साथ दे रहे थे।
कृष्णमणि ने बताया कि करीब पांच साल पहले जाम नगर से हम और कई परिवार यहां आकर बस गए। वहां श्री कृष्ण की पूजा करते थे लेकिन श्री जी ने कृपा कर अपने पास बुला लिया। हमने सोचा, जब भक्ति करनी है तो भगवान के धाम में जाकर करें।
हमनें अपना व्यवसाय छोड़ दिया। कुछ खेत हैं जिन्हें दूसरों के भरोसे छोड़ आए हैं। राधा रानी की कृपा से भोजन मिल जाता है। कुछ पैसा खेती से आ जाता है। सुबह 4 बजे से संकीर्तन प्रारंभ होता है जो रात तक चलता है। यह प्रेम की दुनिया है जहां अलौकिक आनंद मिलता है।
इकलौता बेटा नीलमणि भी पढ़ाई छोड़ श्री जी की सेवा को समर्पित हो गया है। बरसाने की होली का उत्सव अद्भुत है। हम लोग हर साल देखने जाते हैं। सबसे पहले अपने ठाकुर जी से होली खेलते हैं। रसिक प्रिया और उनके परिवार को भी धाम की महिमा यहां खींच लाई।
सुबह 10:30 बजे वे सब युगल उपासना में लीन थे। पूछने पर सिर्फ इतना ही कहा कि यहां आकर मन को असीम शांति मिली है। लोगों को लगता है, हमने कुछ छोड़ा है पर हमसे पूछो, यहां आकर हमने कितना कुछ पाया है। श्री जी के प्रेम से हमारा हृदय भर गया है।