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भारत-जर्मनी के बीच हुए ये 18 अहम समझौते

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बीते डेढ़ दशक से सामरिक साझेदार भारत और जर्मनी ने व्यापार, सुरक्षा, पर्यावरण सहित अन्य क्षेत्रों में पहले से चली आ रही ठोस जुगलबंदी को और मजबूत बनाने का
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फैसला किया है। इसके लिए दोनों देशों ने व्यापार और निवेश को बढ़ावा के साथ कृषि, इंजीनियरिंग, आंतरिक सुरक्षा और पर्यावरण सहित 18 अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

दोनों देशों ने एक फास्ट ट्रैक समूह के गठन की भी घोषणा की है। यह समूह हर महीने बैठक कर जर्मन कंपनियों की समस्याएं व उनसे जुड़ी अन्य चीजों की निगरानी करेगा। समूह के अगले साल मार्च तक काम शुरू कर देने की उम्मीद है।
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मर्केल ने कहा बिना रुके आगे बढ़ेंगे दोनों देश

यूरोपीय संघ में व्यापार के मामले में भारत के सबसे बड़े साझीदार जर्मनी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती की बढ़ती चिंताओं के बीच भारत में निवेश बढ़ाने, स्वच्छ ऊर्जा योजना के लिए एक अरब यूरो की मदद देने औैर कृषि के साथ-साथ पर्यावरण क्षेत्र में मिलकर काम करने की घोषणा की।

तीन दिवसीय भारत यात्रा आईं जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में सोमवार को हैदराबाद हाउस में तीन घंटे तक चली तीसरे भारत-जर्मनी अंतर-सरकारी विचार विमर्श के दौरान इन मुद्दों पर सहमति बनी।

इस दौरान दोनों देशों ने अपने यहां एक दूसरे की आधिकारिक भाषा को प्रोत्साहित करने पर भी सहमति जताई। बाद में साझा बयान जारी करने के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि जर्मनी के इंजीनियर और भारत का आईटी क्षेत्र मिलकर दुनिया के व्यापार को नई दिशा देने की ताकत रखते हैं, जबकि मर्केल ने सॉफ्टवेयर क्षेत्र में भारत के अनुभव को जर्मनी के लिए बेशकीमती करार दिया।

मर्केल ने सोमवार को हुए 18 समझौतों को ऐतिहासिक करार दिया और खासतौर पर पर्यावरण के क्षेत्र में हुए समझौते पर खुशी जताई। उल्लेखनीय है कि दोनों शीर्ष नेताओं की मंगलवार को एक और मुलाकात होगी।

मोदी ने मर्केल को दी बधाई

मोदी ने जर्मनी के एकीकरण की 25वीं वर्षगांठ की मर्केल को बधाई दी। उन्होंने मर्केल के नेतृत्व को प्रेरणादायी बताते हुए ऊर्जा और पर्यावरण के क्षेत्र में जर्मनी के सहयोग की सराहना की।

इस दौरान अफगानिस्तान में शांति और विकास के समर्थन के लिए जर्मनी को धन्यवाद भी दिया। मर्केल ने भारत जर्मनी के संबंधों को श्रेष्ठ महत्व वाला करार दिया।

उन्होंने कहा कि हमारे बीच आर्थिक संबंध दोनों देशों के गतिशील संबंधों के गवाह हैं। उन्होंने जर्मन कंपनियों के लिए फास्ट ट्रैक एग्रीमेंट पर खुशी जताई और कहा कि इससे कंपनियों को व्यवसाय के लिए मिलने वाले लाइसेंस में कम समय लगेगा।

उन्होंने भारत के डिजिटलीकरण में यहां के सॉफ्टवेयर की मदद मिलने और पर्यावरण क्षेत्र में हुए समझौतों को बेहद अहम करार दिया। उन्होंने कहा कि खुशी की बात यह भी है कि दोनों देश टकराव टालने के लिए सेना की जगह कूटनीतिक और शांतिपूर्ण समाधान निकालने के पक्षधर हैं।
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व्यापार में कमी दूर करने पर मंथन

वर्ष 2013 के मुकाबले वर्ष 2014 में दोनों देशों के बीच कारोबार में आई कमी पर गंभीर मंथन हुआ। दोनों शीर्ष नेताओं ने इस वित्तीय वर्ष में कारोबार को नई ऊंचाइयां देने पर सहमति जताई। भारत ने खासतौर पर जर्मनी में भारतीय वस्तुओं की आयात घटने पर चिंता जाहिर की।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2013 के मुकाबले दोनों देशों के बीच कारोबार में वर्ष 2014 में 1.14 अरब यूरो की कम आई। इस दौरान जहां भारत का निर्यात 7.03 अरब यूरो था, वहीं जर्मनी का आयात 9.19 से घटकर 8.92 अरब यूरो रह गया।
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