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मोदी कैबिनेट में यूपी का जलवा, 12 से 15 बनेंगे मंत्री

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इन्फ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा, सड़क यातायात जैसे अहम सेक्टरों के लिए छह महीने का एक्शन प्लान तैयार करने और ‘लेस गवर्नमेंट, मोर गवर्नेंस’ का वादा करने वाले नरेंद्र मोदी छोटे मंत्रिमंडल के साथ शपथ लेंगे।
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इसके बाद एनडीए में राज्यों और पार्टियों के प्रतिनिधित्व के हिसाब से इसका विस्तार किया जाएगा। संघ के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक मोदी इस मामले में आरएसएस नेतृत्व से मशविरा कर चुके हैं।

12 से 15 मंत्री बनेंगे यूपी से

लिहाजा शुरू में 12 से 15 मंत्रियों को ही शपथ दिलाई जाएगी। इसके  बाद एनडीए के सहयोगी दलों से बातचीत कर मंत्रिमंडल का विस्तार किया जाएगा।

गठबंधन को मिले जबरदस्त बहुमत को देखते हुए अलग-अलग राज्यों और वर्गों को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व देने के लिए अलग से योजना बन रही है। विस्तार का काम संसद के बजट सत्र से पहले पूरा हो जाने की उम्मीद है। नई सरकार का बजट पेश होने तक टीम मोदी तैयार हो जाएगी।

70 से ज्यादा सीटों पर लहराया परचम

मंत्रिमंडल में सबसे ज्यादा यूपी के सांसदों के होने की उम्मीद है क्योंकि भाजपा की जीती हुई सीटों में से एक चौथाई यहीं की हैं। कैबिनेट में यूपी के 12 से 15 मंत्री शामिल किए जा सकते हैं।

इस चुनाव में जिस तरह जाति और समुदाय के नए समीकरण पैदा हुए हैं, उसका भी ख्याल मंत्रिमंडल के गठन के दौरान रखना होगा। यूपी में पार्टी के विस्तार के लिए यह जरूरी है।

विशेषज्ञों को म‌िलेगी जगह

वैसे माना यह जा रहा है कि मोदी और उनकी कोर टीम ने अगले छह के लिए एक्शन प्लान तैयार कर लिया है। उनके  एजेंडे में इन्फ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा, सड़क यातायात, कृषि और मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर को रफ्तार देेन का एजेंडा सबसे ऊपर है।

मंत्रिमंडल या सरकार में पर्दे के पीछे काम करने के लिए चौंकाने वाले नाम भी लाए जा सकते हैं। मोदी ने इस बात का संकेत दिया है कि उनकी कैबिनेट में विशेषज्ञों या टेक्नोक्रेट्स को जगह मिल सकती है।

ई. श्रीधरन और अरविंद पनगढ़िया को म‌िलेगी जगह!

लिहाजा मेट्रो मैन ई. श्रीधरन को रेल राज्य मंत्री बनाए जाने की चर्चा है। एशियन डेवलमेंट बैंक के पूर्व प्रमुख अर्थशास्त्री अरविंद पनगढ़िया को भी मोदी के नजदीकी सहयोगी के तौर पर शामिल किया जा सकता है। मोदी के पूरे अभियान के दौरान वह उन्हें सलाह देते रहे हैं।

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक जहां तक राजनीतिक मोर्चे का सवाल है तो आरएसएस चाहता है कि राजनाथ सिंह पार्टी अध्यक्ष बने रहें। लेकिन राजनाथ कैबिनेट में शामिल होने को उत्सुक हैं। अगर राजनाथ मंत्री बनते हैं तो संघ चाहेगा कि पार्टी अध्यक्ष का पद नीतिन गडकरी को मिले।

सुषमा स्वराज को चाह‌िए शीर्ष पद

पार्टी के अंदर यह भावना है कि अध्यक्ष बनने के कुछ ही घंटों बाद उन्हें पद से हटा कर न्याय नहीं किया गया। उन्हें जिन आरोपों के तहत हटाया गया, वे टिक नहीं पाए। अगर राजनाथ मंत्री बनते हैं तो आरएसएस से अच्छे संबंध वाले गडकरी पार्टी अध्यक्ष बन सकते हैं।

अब यह भी लगभग साफ हो चुका है कि अरूण जेटली नए वित्त मंत्री होंगे। राजनाथ सिंह गृह मंत्रालय के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं जबकि सुषमा स्वराज कैबिनेट के शीर्ष पांच मंत्रियों में जगह मांग रही हैं। ताकतवर मंत्रालय के लिए रविशंकर प्रसाद भी एक मजबूत दावेदार हैं।

यशवंत और जोशी दोनों पर दुव‌िधा

पार्टी यशवंत सिन्हा को मंत्री बनाने के सवाल पर दुविधा में हैं। वह विदेश मंत्री बनना चाहते हैं। लेकिन वह मोदी की प्राथमिकता सूची में नहीं हैं। मुरली मनोहर जोशी को कौन सा मंत्रालय या भूमिका दी जाए इस पर भी काफी चर्चा हुई है।

पार्टी 65 साल से ज्यादा के उम्र के नेताओं को कैबिनट में शामिल करने के पक्ष में नहीं है। कर्नाटक के पूर्व मंत्री बी.एस. येदुरप्पा और वरिष्ठ नेता अनंत कुमार की जगह कैबिनेट में पक्की मानी जा रही है।
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अनुराग ठाकुर बनेंगे मंत्री

मोदी के पसंदीदा और पार्टी के खंजाची पीयूष गोयल को स्वतंत्र प्रभार का राज्य मंत्री बनाया जा सकता है। मंत्री बनने की होड़ में राहुल को कड़ी टक्कर देने वाली स्मृति ईरानी और भाजपा युवा मोर्चा के अध्यक्ष और तीन बार से चुनाव जीतते आ रहे अनुराग ठाकुर भी शामिल हैं।

इन्हें राज्य मंत्री बनाया जा सकता है। पश्चिम बंगाल से जीत कर आए बाबुल सुप्रियो को भी राज्य मंत्री बनाया जा सकता है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के तौर पर पूर्व विदेश सचिव श्याम सरन और पूर्व राजनयिक हरदीप पुरी का नाम चल रहा है।
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