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महाराष्ट्र में पांच महीने में मरे 1088 किसान

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भाजपा शासित राज्य महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। पर इनके मन की बात कहीं नहीं हो रही है। इस साल के शुरूआती पांच महीनों में 1088 किसानों ने महाराष्ट्र में आत्महत्या कर ली है। इससे पहले राज्य सरकार के आंकड़ो के मुताबिक जनवरी से मार्च के बीच में 601 लोगों ने आत्महत्या कर ली थी।
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टीओआई की खबर के मुताबिक पिछले साल से मौसम बिगड़ने के चलते अचानक देश भर में किसानों ने आत्महत्या करना शुरू कर दी थी। देश में अनियमित बरसात होने से बड़ी संख्या में किसानों ने आत्महत्या कर ली थी।

अभी तक कुल 1,088 आत्महत्याओं में से सिर्फ 545 आत्महत्या के मामलों को सरकार ने सही माना है। इस आत्महत्या के मामलों में सरकार मुआवजे का भुगतान भी करेगी।
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मराठावाड़ा में 376 लोगों ने आत्महत्या की

गौरतलब है कि सरकार उन्हीं आत्महत्या के मामलों में मुआवजा देती है जिसमें मृतक व्यक्ति के नाम उसके कर्ज में होने का कोई सुबूत उपलब्‍ध होता है। महाराष्ट्र सरकार की इस नीति पर आलोचक कहते हैं कि सरकार यह सिर्फ ऐसा इसलिए कर रही है क्योंकि आत्महत्या के आंकड़ो को कम किया जा सके।

राज्य सरकार के दावे पर आलोचकों का कहना है कि सरकार ऐसे आंकड़े पेश करके नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ो को गलत साबित करना चाहती है।

विदर्भ जहां पर कॉटन की सबसे ज्यादा खेती होती है। वहां पर मार्च से अभी तक आत्महत्या के मामलों में 76 फीसदी की बढ़ोतरी हो चुकी है। इसके बाद मराठावाड़ा में 376 लोगों ने आत्महत्या की है वहां पर आत्महत्या करने वाले लोगों की संख्या 76 फीसदी बढ़ चुकी है।

नासिक क्षेत्र में अनियमित बरसात के चलते फसल खराब होने से 130 किसानों ने आत्महत्या कर ली है। वहीं कोंकण डिवीजन में अभी तक सिर्फ 1 लोगों की आत्महत्या का मामला दर्ज हुआ है। पुणे डिवीजन में इससे संबंधित 26 मामले दर्ज किए गए हैं।
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'सिर्फ एक रात भर में हल नहीं किया जा सकता'

महाराष्ट्र सरकार के राजस्व मंत्री एकनाथ खडसे ने कहा कि सरकार अपनी तरफ से बेहतरीन प्रयास कर रही है। यह मामला कई सालों से चलता आ रहा है, इसे सिर्फ एक रात भर में हल नहीं किया जा सकता है।

राज्य सरकार ने 90 लाख किसानों के लिए 4,000 करोड़ रुपए जारी किए है। वहीं फसल बीमा मिलने के चलते 1600 करोड़ रुपए का भुगतान 35 लाख किसानों को किया जाएगा। वहीं रबी के सीजन में फसल चौपट होने से निपटने के लिए सरकार 564 करोड़ रुपए मुआवजा भी किसानों के लिए जारी किया है।

वहीं किसानों के नेता विजय जवानधिया का कहना है कि सरकार कीमतों पर नियंत्रण नहीं कर पा रही है। इसके चलते किसानों को काफी नुकसान हो रहा है। उनका कहना है कि कॉटन का एमएसपी 4,050 रुपए प्रति क्विंटल है पर इतना कॉटन उगाने में 5,500 से 6000 रुपए का खर्च आ जाता है। किसानों को फायदा नहीं होता है।
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