देश में स्वाइन फ्लू का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले तीन दिनों में इस बीमारी से 100 से अधिक लोगों की मौत हुई है। देर से जागी केंद्र सरकार को अब इसके खतरे का अंदाजा हो गया है और उसने इसके इलाज में इस्तेमाल दवा और डायग्नोसिस किट का अतिरिक्त स्टॉक जमा करने का आदेश दिया है। केंद्र सरकार ने टेस्ट में निजी लैबों की मनमानी पर लगाम लगाने की तैयारी की है।
अब तक स्वाइन फ्लू की जद में 8423 लोग
सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक 13 से 15 फरवरी के बीच देश में इस बीमारी के लिए जिम्मेदार एच1एन1 वायरस से पीड़ित 100 लोगों की मौत हो गई। इस साल 12 फरवरी तक स्वाइन फ्लू से मरने वालों की संख्या 485 थी, जो बढ़कर 585 हो गई है। इस साल कुल 8423 लोग इस बीमारी की चपेट में आए हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र स्वाइन फ्लू से सबसे बुरी तरह प्रभावित हैं। राजस्थान में सबसे अधिक 165 लोगों की मौत हुई है। केवल रविवार को राज्य में 12 लोगों की मौत हुई।
वैसे दिल्ली और तमिलनाडु में स्वाइन फ्लू के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं लेकिन बेहतर इलाज और जागरूकता के कारण इन दोनों राज्यों में कम लोगों की मौत हुई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सबसे बुरी तरह से प्रभावित राजस्थान और गुजरात में टीमें भेजी है।
तीन दिन से अधिक बुखार हो सकता है जानलेवा
तीन दिन से अधिक समय तक बुखार, सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत, निम्न रक्त चाप (रक्तचाप 80 से नीचे जाना), डायरिया, निमोनिया, दमा की शिकायत बढ़ने पर मरीज को अस्पताल तत्काल ले जाएं। ऐसी स्थिति में शरीर के दूसरे अंग भी काम करना बंद कर सकते हैं।
घबराने की जरूरत नहीं
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के महासचिव डॉ के अग्रवाल का कहना है कि कई जगहों पर संदिग्ध सभी मरीजों को डॉक्टर एंटीवायरल ड्रग्स लेने की सलाह दे रहे हैं, लेकिन, हकीकत में इसकी जरूरत सभी मरीजों को नहीं है। डॉक्टरों और आम जनता को यह जरूर जानना चाहिए कि किस श्रेणी के मरीज को इन दवाओं और अस्पतालों में भर्ती कराने की जरूरत है। गर्भवती महिलाओं, दो साल से अधिक उम्र के बच्चों और नर्सिंग होम में काम करने वालों में इसका सबसे ज्यादा खतरा है।
''निजी लैबों में स्वाइन फ्लू किट की अधिक कीमत वसूलने की शिकायतें आई हैं। इसे लेकर दिल्ली के स्वास्थ्य सचिव और अन्य राज्यों के सचिवों से कदम उठाने को कहा गया है। स्वाइन फ्लू किट की कीमत एक हजार रुपये के करीब है। यह विदेश से आयातित है तो इसकी कीमत थोड़ा अधिक हो सकती है।''
-डा. अरुण प्रकाश पांडा, अतिरिक्त सचिव, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
उत्तरभारत में भी कहर बरपा रहा स्वाइन फ्लू
अब तक दर्जनों लोगों की जान ले चुके स्वाइन फ्लू का कहर दिनों-दिन बढ़ता ही जा रहा है। हर रोज अलग-अलग प्रदेशों के अलग-अलग जिलों से इस घातक बीमारी के नए मरीजों के मिलने की खबरें आ रही हैं। रविवार को उत्तराखंड के विकासनगर और हिमाचल प्रदेश के सोलन के एक-एक मरीज की इस बीमारी से मौत हो गई।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्वाइन फ्लू पर नियंत्रण के लिए केंद्र ने हिमाचल को अलर्ट किया है। उधर, उत्तर प्रदेश में भी इस बीमारी के मरीजों की संख्या में रोज इजाफा हो रहा है। एएमयू में तो इस बीमारी के भय से शिक्षण कार्य बंद पड़ गया है। कानपुर के एचबीटीआई में सोमवार को छात्र स्वाइन फ्लू का खतरा टलने तक संस्थान बंद करने की मांग पर सड़कों पर उतर आए।
उत्तराखंड भी आया स्वाइन फ्लू की जद में
स्वाइन फ्लू ने उत्तराखंड के विकासनगर की निशा को भी अपना शिकार बना लिया है। मंडी चौक बाबूगढ़ निवासी इस महिला ने रविवार को दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में दम तोड़ा। उधर, हिमाचल में सोलन के एक 37 वर्षीय व्यक्ति की शिमला के अस्पताल में मौत हो गई।
प्रदेश में स्वाइन फ्लू से मौत का यह पहला मामला है। प्रदेश में छह अन्य लोगों के इस बीमारी से पीड़ित होने की पुष्टि हुई है। इस बीच, एएमयू में एक और छात्रा को स्वाइन फ्लू ने अपनी चपेट में ले लिया है। मुशर्रफ फातिमा नाम की यह छात्रा अलीगढ़ की रहने वाली है और बीए अंतिम वर्ष में पढ़ रही है।
विवि की छह अन्य छात्राओं में भी इस बीमारी के लक्षण पाए गए हैं। इस बीमारी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए विवि प्रशासन ने 25 फरवरी तक शिक्षण कार्य स्थगित कर दिया है। अन्य कार्यक्रम भी अगले आदेश तक स्थगित कर दिए गए हैं। विवि परिसर में 12 हजार मास्क बांटने की तैयारी है, जबकि बीमारी के भय से हॉस्टलों से छात्र-छात्राओं का पलायन जारी है।