तुषार कपूर ने फिल्मों की यात्रा रोमांस से शुरू करते हुए, कुछ ऐक्शन और क्राइम से जुड़ी भूमिकाएं की। फिर कॉमेडी ने उन्हें खास पहचान दी। इसमें भी कॉमिक एडल्ट फिल्मों में वह दर्शकों को ज्यादा रास आए। नए साल में उनकी दो एडल्ट कॉमेडी रिलीज को तैयार हैं। तुषार ढाई साल बाद टिकट खिड़की पर लौट रहे हैं और थोड़ा-सा नर्वस हैं। तुषार कपूर से बातचीत की रवि बुले ने... अपनी नई फिल्म को लेकर तुषार ने की कुछ खास बातचीत।
अंततः एक ऐक्टर के रूप में आपकी अलग पहचान बन गई है। कॉमिक टाइमिंग को लेकर। जबकि आपने शुरुआत रोमांटिक इमेज से की थी!- हम अपने जीवन में कुछ भी प्लान नहीं कर सकते। मुझे कुछ कहना है (2001) से लेकर गायब (2004) तक रोमांटिक रोल ही चल रहे थे। फिर खाकी (2004) से थोड़ी इमेज बदली। परंतु मुझे लगता है कि यह कॉमिक पहचान गोलमाल (2006) से मिली। असल में हम अलग-अलग रोल करने की ही कोशिश करते हैं और ऐक्टिंग का प्रोफेशन यही है कि आप मेहनत करें और बाकी दर्शकों पर छोड़ दें। आप कंट्रोल नहीं कर सकते कि मैं ऐसे ही रोल करूंगा, वैसी ही पहचान बनाऊंगा। हमें सब करना होता है। लोग किस रोल में पसंद करेंगे इसका फैसला आप नहीं कर सकते।
गोलमाल टर्निंग पॉइंस साबित हुई। इसे कैसे देखते हैं? कभी सोचा तो नहीं होगा कि कॉमिक टाइमिंग वाले ऐक्टर के रूप में खुद को जमाऊंगा...- गोलमाल का रोल उस समय रिस्क जैसा था। थोड़ा डर था क्योंकि कोई डायलॉग नहीं था। लेकिन वह लोगों को पसंद आ गया और फिर गोलमाल-2 और 3 भी बनीं। इससे आत्मविश्वास बढ़ा और कुछ और कॉमिक फिल्में की। ढोल, वन टू थ्री, के कंपनी। मैंने अपना बेस्ट देने की कोशिश की। जो हुआ, अपने आप हुआ। हां, अच्छा लगता है कि लोग कहते हैं कि कॉमिक ब्रांड के तौर पर आप पर भरोसा किया जा सकता है। फिर वक्त से पहले और नसीब से ज्यादा किसको मिलता है।
एडल्ट कॉमेडी फिल्मों आपने खासी चर्चा बटोरी
एडल्ट कॉमेडी फिल्मों आपने खासी चर्चा बटोरी। अब जो कर रहे हैं उसके प्रमोशन में पोर्न शब्द तक इस्तेमाल हो रहा है!
- यह मार्केटिंग का मसला है क्योंकि फिल्म में जो दो लड़के हैं वे बैंकॉक जाते हैं और पोर्न इंडस्ट्री में मिसफिट होते हुए भी वहां पापुलर हो जाते हैं। वे सिर्फ रोजी-रोटी की तलाश में वहां जाते हैं, मगर उनकी जिंदगी बदल जाती है। निश्चित रूप से यह एडल्ट कॉमेडी है। बच्चों के लिए बिल्कुल नहीं है। पुरानी बोलत में भले ही आप नई शराब भरें... मार्केट में बेचने के लिए नॉवेल्टी लानी पड़ती है।
नए साल की शुरुआत में ही आप दो एडल्ट कॉमेडी फिल्मों में दिखेंगे...
- यह मेरे हाथ में नहीं था। प्रोड्यूसर तय करते हैं। 22 जनवरी और 29 जनवरी की डेट्स अभी तय हुई हैं। वैसे मुझे लगता है कि कॉमेडी फिल्में देखना लोग पसंद करते हैं। उनका इस बात से कोई खास मतलब नहीं होता कि वे कब रिलीज होंगी।
पिछले कुछ महीनों में कपिल शर्मा की फिल्म और प्यार का पंचनामा-2 लोगों ने देखी हैं।
जब आपने क्या कूल हैं हम सीरीज की पहली फिल्म की थी, वह सेक्स कॉमेडी की शुरुआत थी। तब और आज में व्यक्तिगत स्तर पर क्या फर्क आ गया है?
- तब मैं बहुत डरा हुआ था और खुद एडिटिंग पर बैठता था। हम अमेरिकन पाई का भारतीय संस्करण ला रहे थे। एक-एक चुटकुले पर नजर थी मेरी। कई जोक्स को मैंने टोन डाउन कराया था। हालांकि दो घंटे 40 मिनट की फिल्म थी वह। आज कोई इतनी लंबी फिल्म नहीं बनाएगा। वैसे यह था कि हम कोई पहली बार ऐसा नहीं कर रहे थे क्योंकि दादा कोंडके की पहचान ऐसी कॉमेडी के लिए पहले से थी। मुझे लगता है कि हम बहुत तरक्कीपसंद नस्ल हैं। बस, आपको पॉलिटिकली करेक्ट होना होता है। मुझे लगता है कि धीरे-धीरे सब खुल रहा है। आपके पास कहानी अच्छी होनी चाहिए। अगर कहानी अच्छी नहीं होगी तो कुछ काम नहीं करेगा।
क्या आपको लगता है कि सेक्स कॉमडी बनना और उनका चलना हमारे बदलते सिनेमा का एक और लक्षण है?
- हम उस देश में रहते हैं जहां कामसूत्र की रचना हुई। शायद हम इस बात को बाहर से स्वीकार नहीं करते परंतु मन ही मन यह खूब अच्छे से जानते हैं। हमारी फिल्में देखने के लिए युवा आते हैं तो महिलाएं भी ग्रुप में आती हैं। लेकिन यह सच है कि हमारे अपने संस्कार हैं, विशेष मूल्य हैं। हम इन्हें ध्यान में रखते हुए अपनी फिल्में बनाते हैं। हमारे दर्शक ऐसी फिल्मों के लिए तैयार हैं।
एडल्ट कॉमेडी के अलावा ये करेंगे तुषार
एडल्ट कॉमेडी के अलावा क्या कर रहे हैं?
- एक माफिया थ्रिलर है, निर्देशक कबीर कौशिक की शिकागो जंक्शन। फिल्म यूपी में बेस्ड है। 1970 के दशक का रीयलिस्टिक पीरियड ड्रामा है यह। मेरा इसमें काफी डार्क कैरेक्टर है। फिल्म में पंकज कपूर के बेटे का अपहरण कर लिया गया है। वह उसे ढूंढ रहे हैं। इसमें अरशद वारसी और नसीरूद्दीन शाह जैसे शानदार ऐक्टर भी हैं।
लव स्टोरी जैसी फिल्मों से शुरुआत करके आप उनसे दूर निकल आए हैं। इस बीच काफी नए चेहरे आ गए हैं। क्या आप अपने लिए लव स्टोरी जैसी फिल्मों को मिस करते हैं?
- बिल्कुल। पहली फिल्म का असर तो ऐक्टर पर भी रहता है और दर्शकों पर भी। मैं वैसी कहानियों को मिस करता हूं जिसमें मेरे लिए इमोशनल लव वाला कोई कैरेक्टर हो। अब मेरे लिए ऐसा रोल पर्सनल ड्रीम है कि जिसे मैं निभाऊं और बड़ी संख्या में दर्शकों को वह पसंद आए। हालांकि ऐसा होता है कि नए लोग आ जाते हैं और फिर ऐसी कहानियां उनके लिए लिखी जाती हैं। परंतु मुझे लगता है कि अगर वह सब मुझसे दूर हो गया है तो मेरे लिए कुछ और लिखा गया है। दस-पंद्रह साल बाद लगेगा कि शायद वह एक बढ़िया दौर था जब मैं एडल्ट कॉमेडी कर रहा था! तब कुछ और तरह का काम मिल रहा होगा। जब तक तक दर्शक आपको
पसंद कर रहे हैं आप बने रहते हैं।