27 सितंबर 2012 की शाम थी, यशराज स्टूडियो में बड़ी चहल-पहल थी। यशजी के निर्देशन में बनी नई फिल्म ‘जब तक है जान’ का फर्स्ट लुक दिखाया जाना था। शाहरुख, कैटरीना और अनुष्का शर्मा अभिनीत इस फिल्म के बारे में यशजी बहुत सारी बातें शेयर करने जा रहे थे।
इस मौके पर किंग खान, यश चोपड़ा उनके निर्देशन कैरियर पर एक लंबी बातचीत भी करने वाले थे। तय समय पर जब यश चोपड़ा और शाहरुख स्टेज पर आए, तो घंटे भर तक वे दोनों इंटरव्यू की शक्ल में बातें करते रहे। यशजी एकदम स्वस्थ और खुश नजर आ रहे थे।
बातचीत में उन्होंने न केवल अपने फिल्मी कैरियर के बारे में विस्तार से बताया, बल्कि कई नई जानकारियां भी दी। इतना ही नहीं किंग खान के सवालों पर कई बार चुटकी भी ली। ‘जब तक है जान’ को लेकर यशजी काफी उत्साहित थे। उन्होंने कहा था कि ‘जब तक है जान’ की स्क्रिप्ट ज्यादा प्रभावी तरीके से परदे पर उतरी है।
जब शाहरुख ने उनसे सवाल किया कि अब तो यह फिल्म पूरी हो चुकी है, वे अगली फिल्म की शुरुआत कब करने जा रहे हैं! तो उन्होंने यह घोषणा कर चौंका दिया था कि यह उनके निर्देशन में बनी आखिरी फिल्म होगी। वे अपना सारा समय नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में लगाएंगे।
शाहरुख इस घोषणा से अवाक रह गए थे और उनकी आंखें भर आईं थीं। यशजी ने जब शाहरुख को भावुक होते देखा तो कहा कि उन्होंने बहुत काम कर लिया है। उन्हें इस बात का मलाल है कि वे परिवार के साथ ज्यादा वक्त नहीं बिता पाए हैं। अपने परिवार के साथ वक्त बिताएंगे और नए निर्देशकों और एक्टरों को आगे बढ़ाएंगे। काश, यश चोपड़ा ऐसा कर पाते, नियति ने उन्हें यह मौका नहीं दिया।
पंजाबी में फिल्म बनाने की तैयारी में थे यश चोपड़ा
यश चोपड़ा की कई प्रमुख फिल्मों के छायाकार रहे मनमोहन सिंह उनके प्रोडक्शन हाउस के लिए फिल्म बनाने जा रहे थे। पंजाब से यश चोपड़ा का लगाव जग-जाहिर था। अब वे पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री के लिए भी फिल्में बनाना चाहते थे। आइए सुनें खुद मनमोहन सिंह की जुबानी यह कहानी।
1984 की बात है। तब मोबाइल तो होते नहीं थे। मुंबई में मेरे लैंडलाइन नंबर पर फोन आया... मैं यश चोपड़ा बोल रहा हूं। तुम्हारी 'बेताब' और 'सौतन' फिल्म देखी है। क्या कल मुझसे मिलने आ सकते हो। मुझे यकीन ही नहीं हुआ कि मुझे यश चोपड़ा जैसी शख्सीयत ने खुद फोन करके बुलाया। रात भर मैं सोया नहीं।
अगली सुबह मैं उनके दफ्तर गया। वहां मुलाकात हुई। तब से लेकर आज तक यश चोपड़ा का मुझ पर आशीर्वाद बना रहा। अभी सिरसा में हूं। आज अचानक उनके निधन की खबर सुन मेरा गला भर आया। मुझे यकीन ही नहीं हो रहा है कि फिल्म इंडस्ट्री का सबसे चमकता सितारा डूब चुका है।
फिल्म इंडस्ट्री को इतनी जल्दी छोड़कर यश जी कैसे जा सकते हैं। दो सप्ताह पहले मैं उनसे मिलने गया था। तब उन्होंने मुझसे कहा....मनमोहन... अब तुम मेरे लिए एक पंजाबी फिल्म बनाओ। मुझे अपने पंजाब, पंजाबी और पंजाबियत से बहुत लगाव है।
मैंने भी उनकी इच्छा को पूरा करने की हामी भर दी। यश जी की फिल्म के लिए सब्जेक्ट तलाश कर रहा था। अब यह तलाश थम गई। अफसोस है कि उनकी इस इच्छा को अब मैं कभी पूरा नहीं कर पाऊंगा। मुझे उनके साथ की गई एक-एक फिल्म याद है। वे हर फिल्म में कुछ नया सिखाते थे।
'दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे', 'मोहब्बतें', 'दिल तो पागल है', 'चांदनी', 'लम्हें' और 'डर' जैसी महान फिल्में उनकी अलग सोच की वजह से ही सुपर हिट हुई। मेरा सौभाग्य है कि मैं इन सभी फिल्मों में उनके साथ रहा।