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दिन में चार फिल्में देखता था 'सत्या2' का हीरो

Thu, 24 Oct 2013 07:08 PM IST
हरि मृदुल/अमर उजाला मुंबई
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रामगोपाल वर्मा के निर्देशन में बनी फिल्म 'सत्या 2' में पुनीत सिंह रत्न की मुख्य भूमिका है। मूलरूप से उदयपुर के रहने वाले पुनीत का बचपन से ही एक्टर बनने का सपना रहा है। पुनीत से बातचीत की हरि मृदुल ने
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रामगोपाल वर्मा जैसे नामचीन फिल्मकार के साथ बतौर हीरो काम करना किसी सपने के पूरे होने जैसा है। 'सत्या 2' से आपको कितनी उम्मीदें हैं?
सत्या 2 से मैं बहुत ज्यादा उम्मीदें लगाए हुए हूं। यह छोटे बजट की फिल्म जरूर है, लेकिन रामगोपाल वर्मा के निर्देशन में बनी है। मेरा तो यहां तक कहना है कि इसमें रामू सर का निर्देशन उनकी पिछली फिल्मों से एकदम अलग नजर आएगा। मैं बचपन से ही एक्टर बनने के सपने देखा करता था। लेकिन मुझे बतौर हीरो पहली फिल्म रामगोपाल वर्मा जैसे निर्देशक की मिलेगी, इसकी कल्पना नहीं की थी।

लेकिन इधर देखा गया है कि अब रामू में पहले जैसी बात नहीं रही। वे फिल्मकार के रूप में चुक से गए हैं?
ऐसा बिल्कुल नहीं है। वे आज भी पहले जैसे कल्पनाशील और ऊर्जावान हैं। हर किसी फिल्मकार के जीवन में एक ऐसा दौर आता है, जब लोग उसे चुका हुआ समझ लेते हैं। लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि कोई भी बड़ा निर्देशक आपको कभी भी चौंका सकता है। रामू बड़े निर्देशक हैं।
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'सत्या 2' के बारे में कहा जा रहा है कि इस फिल्म का 'सत्या' से कोई संबंध नहीं है। यह बात कितनी सच है?
वाकई 'सत्या 2' और 'सत्या' के बीच सीक्वल या प्रीक्वल जैसा कोई संबंध नहीं है। यह जरूर है कि यह भी सत्या की तरह ही एक गैंगस्टर फिल्म है, लेकिन अपने ट्रीटमेंट में एकदम अलग है।

अगर कोई संबंध नहीं है, तो फिर इस फिल्म का नाम 'सत्या 2' रखने की क्या जरूरत थी?
मैं इस सवाल का जवाब देने का अधिकारी नहीं हूं। इसका सही जवाब तो रामू सर ही दे सकते हैं। मुझे लगता है कि इस फिल्म की पिछली अंडरवल्र्ड फिल्म से नाम के स्तर पर साम्यता एक व्यावसायिक रणनीति हो सकती है।
 
सत्या 2 की कहानी है क्या?
इसमें 2013 के अंडरवर्ल्ड की कहानी है। इस कहानी में सत्या एक छोटे शहर से मुंबई अंडरवर्ल्ड डॉन बनने का विजन लेकर आता है। वह अपनी मर्जी से इसे एक पेशे की तरह चुनता है। वह किसी बुरे हालात का शिकार नहीं है।

आपकी इस फिल्म की 'सत्या' से तुलना होगी। आप कितने तैयार हैं?
हमारी कोशिश यही है कि इन दोनों फिल्मों की कोई तुलना न हो। 'सत्या 2' किसी भी अंडरवल्र्ड फिल्म से मिलती जुलती नहीं है। यह एकदम नए कथानक पर आधारित है।

आपने अभिनय का कोई विधिवत प्रशिक्षण नहीं लिया है। अपने किरदार की तैयारी कैसे की?
मैंने खूब फिल्में देखता हूं, इसलिए मुझे किसी ट्रेनिंग की जरूरत महसूस नहीं हुई। एक वक्त था, जब मैं एक दिन में चार फिल्में देखा करता था। रामू जी की फिल्में मेरे लिए शुरू से ही अभिनय सीखने का माध्यम रही हैं। जहां तक 'सत्या 2' के किरदार सत्या को आत्मसात करने की बात है, तो उसके लिए मैंने अपने आपको रामू जी के हवाले कर दिया था।
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