रेखा सिर्फ एक दिलफरेब अदाकारा भर नहीं हैं। भारत में मोहब्बत के दो सबसे बड़े पैरोकारों में से वह एक हैं। अमृता प्रीतम ताउम्र इश्क की सबसे बड़ी पैरोकार बनी रहीं। लेखनी में इश्क कथनी में इश्क, करनी में इश्क, इश्क ओढ़ना, इश्क बिछौना।
आप हैरत में पड़ सकते हैं कि आखिर कोई इतनी शिद्दत से इश्क कैसे कर सकता है। दरअसल जब शिद्दतों की हदबंदी खत्म होती है तो असल इश्क वहीं से शुरू होता है। अमृता प्रीतम ने साफगोई से अपना इश्क स्वीकारा। आत्मकथा का शीर्षक देने की बात आई तो उसका टाइटिल रसीदी टिकट दिया।
उसके पीछे का तर्क या फलसफा यह था कि ढाई आखर की बातों के लिए रसीदी टिकट का स्पेस ही काफी है दूसरी बात कि सभी टिकटों के आकार बदलते हैं रसीदी टिकट का आकार एक जैसा होता है। एक तरह से देखें इश्क की कहानी कहने को तो ढाई आखर ही पर्याप्त है अन्यथा बड़ी बड़ी पोथियां छोटी हैं।
दूसरी पैरोकार मैं रेखा को मानता हूं। भारत में तैतीस करोड़ देवी देवता हैं कोई शिक्षा की, कोई धन की, कोई शक्ति की, मगर ग्रीक मिथकों की तरह वीनस सरीखा सौंदर्य और मोहब्बत की देवी कोई नहीं है।
रेखा को अगर भारत की वीनस कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। हम मैथ्स में रेखा की परिभाषा पढ़ते थे रेखा बिंदुओं का समुच्चय है। बिंदु का अपना कोई वजूद नहीं होता। रेखा मोहब्बत की रेखा हैं जिनका बिना मोहब्बत कोई अलग वजूद नहीं।
और रंग-रूप भी निखर आया
आपने भानुरेखा का रेखा में कायांतरण होते देखा है। यह रूपांतरण बताता है कि हर औरत एक रेखा हो सकती है, उतनी ही खूबसूरत और पाक दिख और लग सकती है, अगर वह शिद्दत से इश्क करे। सावन भादो, रामपुर का लक्ष्मण, किस्मत और प्राण जाए पर वजन न जाए की रेखा याद है ना।
कालेपन की हदतक सांवली, मोटी, भद्दी और बदसूरत। कहते हैं मोहब्बत में कई धोखे खाकर रेखा अमिताभ की सोहबत में आईं। न रेखा कुछ कहती हैं, न अमिताभ कुछ बोलते हैं, पर जमाना कहता है कि दोनों में मोहब्बत हो गई। ऐसा इश्क जो जिस्म से उतर कर रूह तक फैल गया।
अमिताभ सनातनी संस्कारों की घुट्टी में पले बढ़े कविवर हरिवंश राय बच्चन के सुपुत्र थे। शादीशुदा थे लेकिन सच्ची मोहब्बत अपनी जगह बना लेती है बिना यह सब गणित देखे। इश्क का जादू रेखा पर ऐसा सिर चढ़कर बोला कि उन्होंने पाने से ज्यादा देना पसंद किया।
बालीवुड में महेश भट्ट, सैफ अली खान,कबीर बेदी, ऋतिक रोशन समेत कई के घर टूटे पर अमिताभ का घर इस तूफानी इश्क के बाद भी सलामत रहा। यह रेखा के इश्क का प्रताप था।
इश्क के बाद तो रेखा का सब कुछ निखर गया मोटी काया छरहरी हो गई। आवाज में अजब सा दर्द और कशिश पैदा हो गई। रंग-रूप भी निखर आया। उन्होंने सौंदर्य के नए प्रतिमान गढ़े।
सिलसिला की रील स्टोरी में रीयल स्टोरी
मिस्टर नटवर लाल, खूनपसीना की रेखा, मुकद्दर का सिकंदर आते-आते अप्रतिम सुंदरी के रूप में तब्दील हो चुकी थीं। कहा जाता है कि सिलसिला की रील स्टोरी में यशचोपड़ा ने रीयल स्टोरी का भी घालमेल पेश किया था। जिन्होंने फिल्म देखी है सभी मानेंगे कि रेखा इस फिल्म में सबसे ज्यादा खूबसूरत दिखी हैं।
नीला आसमां सो गया के फिल्मांकन में रेखा साक्षात हुस्न की देवी लगती हैं। उमराव जान अदा में तो रेखा सौंदर्य की पराकाष्ठा पर पहुंच गई हैं। उनकी हर अदा कचोटती है। इश्क में लगी हर चोट उनके प्रशंसकों के भी दिल को चाक करती है।
नाउम्मीदी और कभी न खत्म होने वाली उदासी में लिपटा रेखा का हुस्न दिलोदिमाग पर तारी हो जाता है। आप भी उमराव जान से इश्क करने लगते हैं। रेखा एक ऐसी शख्स हैं जिनकी काया, दिल-दिमाग हर शै खूबसूरत लगती है।
रेखा का इश्क शायद इसलिए अलौकिक हो गया है जिसमें वफा, बेवफाई, उम्मीद, नाउम्मीदी, जुस्तजू, आरजू, हिसाब किताब, बही.पोथी खोया, पाया, हासिल पानाए तवज्जो, उपेक्षा, यहां तक कि इंतजार, बिसाल, जुदाई सब बेमानी हो गए हैं। रेखा एक बेखुदी का आलम है।
रेखा मोहब्बत का एक ऐसा शून्य है जिसका फलक इनफाइनाइट तक है। शायद ऐसे ही सिचुएशन के लिए गालिब ने लिखा था.अब तो हम वहां हैं गालिब जहां से हमें अपनी भी खबर नहीं आती। रेखा का सबसे बड़ा हुनर यह है कि इश्क के अलावा उनके पास कोई हुनर नहीं है।
रेखा का अफसाना जब भी छिड़ेगा, मोहब्बत के अनगिन अध्याय खुल जाएंगे
जब आदमी इश्क सिर से पांव तक डूबा होता है तो उसकी हर चीज किस कदर खूबसूरत हो जाती है रेखा उसकी मिसाल हैं। प्रेम तो तो सबकुछ अधरम मधुरम, नयनम मधुरम, वचनम मधुरम, मधुराधिपते, मधुरम-मधुरम की तर्ज पर हो जाता है। बिहारी प्रेम के बड़े कवि थे। एक स्थान पर लिखते हैं।
तंत्री नाद कबित्त रस, सरस राग रतिरंग, अनबूड़े बूड़े तिरे जे बूड़े सब अंग, मतलब तंत्र, वाद्यकला कविता और प्रेम में जो डूबता नहीं वह वस्तुतः डूब जाता है और जो इनमें डूब जाता है वही पार निकलता है। इश्क में वाकई डूब जाने वाली शख्सियत का नाम रेखा है।
जगजीत की एक गजल है मेरे जैसे हो जाओगे जब इश्क तुम्हें हो जाएगा। जब किसी को इश्क हो जाएगा तो वह शख्स रेखा जैसा हो जाएगा। जो रेखा है वह द्वैत नहीं है। रहीम कहते हैं कि प्रेम गली अति सांकरी जामे दुई न समाय, प्रेम की गली में आखिर दूसरा समा कौन सकता है सिवाय प्रेम के।
जिसे रेखा का प्यार मिल जाए वह वाकई खुशनसीब शख्स है। बिग बी तो एक प्रतीकात्मक नाम है। शायद रेखा के लिए इसकी भी जरूरत नहीं- दुनिया की हर दीवार गिरा दे और ऐलानिया सुर में बोले, हां मुझे मोहब्बत है। मौन ही काफी है। हर प्रेम कहानी दुखांत होती है यह वेस्ट की धारणा है।
रेखा जैसा प्रेम तो सुखांत और दुखांत के पैमाने से परे होता है। रेखा का अफसाना जब भी छिड़ेगा, मोहब्बत के अनगिन अध्याय खुल जाएंगे। नफरतों को पालकर मोहब्बत नहीं की जाती, रेखा उनसे भी मोहब्बत करती है जो उससे नफरत करते हैं। यह सिलसिला कभी खत्म न हो, चलता रहे चलता रहे, चलता रहे, आमीन।