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खुल गई बाजीराव मस्तानी की पोल, सामने आ गई सबसे बड़ी कमजोरी

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संजय लीला भंसाली की महत्वाकांक्षी फिल्म बाजीराव मस्तानी को लेकर यह चर्चा होने लगी है कि रणवीर सिंह फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी हैं। फिल्म से जुड़े सूत्रों का कहना है कि रणवीर पेशवा के रोल में नहीं जम रहे हैं। वह फिल्म में केवल एक औसत प्रेमी बन कर रह गए हैं...
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-निर्माता इरोस इंटरनेशनल की फिल्म बाजीराव मस्तानी की एक झलक तो महीनों पहले दर्शक सोशल मीडिया और सिनेमाघरों में देख चुके हैं। अब इसका गीत पिंगा भी इंटरनेट की दुनिया में उपलब्ध है। निर्देशक संजय लीला भंसाली की इस महत्वाकांक्षी फिल्म का ट्रेलर आज मुंबई में रिलीज हो रहा है।

लेकिन इससे पहले ही फिल्म से जुड़े सूत्रों के हवाले से ऐसी खबरें आ रही हैं जो भविष्य में फिल्म के लिए मुश्किलें पेश कर सकती हैं। बाजीराव मस्तानी पूरी हो चुकी है और इसे देख चुके सूत्रों की मानें तो पेशवा बाजीराव की भूमिका निभा रहे अभिनेता रणवीर सिंह फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी है। सूत्रों के अनुसार फिल्म में प्रियंका चोपड़ा का काम सब पर भारी पड़ेगा और दीपिका पादुकोण भी मराठी परिवेश में खुद को ढाल कर प्रभावित करती हैं।
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सूत्रों के मुताबिक फिल्म में रणवीर सिंह कहीं से भी पेशवा की तरह नजर नहीं आते। वह ज्यादातर दृश्यों में रंगीन मिजाज प्रेमी की तरह दिखे हैं और पेशवा वाली बात अपने भीतर नहीं ला पाए हैं।

वैसी नहीं हैं रणवीर सिंह की हरकतें

उल्लेखनीय है कि रणवीर सार्वजनिक मंचों पर अक्सर ऐसी हरकतें करते रहते हैं जिससे उन्हें गोविंदा की तरह उछल-कूद करने वाला ऐक्टर ही माना जाता है। फिल्म देख चुके लोगों का कहना है कि बैंड बाजा बारात, लेडीज वर्सेज रिक्की बहल, गोलियों की रासलीलाः राम-लीला, गुंडे और किल दिल जैसी फिल्मों में रणवीर ने जो रोमांटिक रोल किए हैं, उससे ऊपर उठ कर वह बाजीराव को रोल को नहीं निभा सके हैं।

सूत्रों के अनुसार, वास्तव में यह ऐसी छवि है जो बाजीराव के बारे में ज्ञात इतिहास से मेल नहीं खाती। फिल्म में बाजीराव का रूप मराठा इतिहासकारों को रास नहीं आएगा और महाराष्ट्रियन समाज के लिए भी अपने लोकप्रिय ऐतिहासिक शासक के इस रूप को स्वीकार कर पाना कठिन होगा। सूत्रों की मानें तो रणवीर अपने लुक में किसी महान शासक की तरह बिल्कुल नहीं लगे हैं।

निर्देशक भंसाली की यह फिल्म कुछ लोग पोस्ट प्रोडक्शन के दौर में देख चुके हैं और उनकी राय बहुत उत्साहजनक नहीं है। पिछले दिनों मुंबई के बांद्रा स्थित महबूब स्टूडियो में फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही एक कलाकार के करीबी से एक अन्य आने वाली फिल्म के सितारे ने पूछा कि कहां से आ रहे हो तो उस व्यक्ति ने कहा कि अभी बाजीराव मस्तानी देख कर आ रहा हूं। इस पर उस सितारे ने जब सवाल किया कि फिल्म कैसी है तो चेहरे पर बगैर किसी उत्साह के उसे जवाब मिला, ‘ठीक है।’ निःसंदेह इस तरह की प्रतिक्रिया फिल्म के लिए अच्छी नहीं मानी जा सकती। उल्लेखनीय है कि 18 दिसंबर को रिलीज हो रही बाजीराव-मस्तानी के सामने शाहरुख-काजोल स्टारर फिल्म है।

पिंगा नाच और गाने का हो रहा विरोध

-बाजीराव के वंशजों ने फिल्म के टीजर और पिंगा गाने के बाद सोशल और प्रिंट मीडिया में अपना विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि मराठा इतिहास में महाराज शिवाजी के बाद बाजीराव को श्रेष्ठता में दूसरा स्थान दिया जाता है। भंसाली ने यह कथित प्रेम कहानी बना कर बाजीराव का मजाक उड़ाया है। इन वंशजों के अनुसार भंसाली ने पूरे महाराष्ट्रियन समाज को अपमानित किया है क्योंकि इस फिल्म के बाद बाजीराव और उनके वंशजों के बारे में लोगों की गलत धारणाएं बनेंगी। पिंगा गाने के बारे में जानकारों का कहना है कि यह पूरी तरह से काल्पनिक और ऐतिहासिक किरदारों की छवि बिगाड़ने वाला है।

फिल्म में प्रियंका चोपड़ा बाजीराव की पहली पत्नी काशिबाई की भूमिका में हैं, जिन्हें पिंगा गाने में मस्तानी बनी दीपिका के साथ डांस करते दिखाया गया है। बाजीराव के वंशजों के अनुसार काशिबाई तपेदिक और जोड़ों के दर्द की शिकार थीं, अतः वह कुछ झुक और लंगड़ा कर चलती थीं। फिर यह डांस कैसे संभव है। ऐतिहासिक तथ्य यह भी है कि काशिबाई और मस्तानी की केवल एक ही मुलाकात हुई थी।

वह सामान्य मुलाकात थी। कोई जश्न नहीं। इसी तरह जो साड़ी डांस में पहनी दिखाई गई है, उस तरह से नौवारी साड़ी नहीं पहनी जाती। इसके अलावा फिल्म पर एक प्रमुख आपत्ति यह है कि मस्तानी राजनर्तकी नहीं थी बल्कि बुंदेलखंड के महाराजा छत्रसाल की बेटी यानी राजकुमारी थी। मस्तानी की बाजीराव से शादी हुई थी और वह उनकी दूसरी पत्नी थीं। मस्तानी के वंशज भी भंसाली का विरोध कर रहे हैं।
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अब बदली ब्लेजिंग बाजीराव की भाषा

पिछले दिनों इरोस ने अपने ऑनलाइन दर्शकों के लिए बाजीराव के परिचय के रूप में एक एनिमेशन सीरीज शुरू की, ब्लेजिंग बाजीराव। इसके पहले एपिसोड में हिंदी-अंग्रेजी खिचड़ी भाषा में बाजीराव का जो परिचय पेश किया गया वह बेहद हास्यास्पद है।

नई पीढ़ी को आकर्षित करने के चक्कर में जैसी भाषा पहले एपिसोड में है, उसे कॉमेन्ट्री के इन वाक्यों से आप समझ सकते हैः बाजीराव बल्लाल भट्ट, जिसने अपनी लाइफ (जिंदगी) में फोर्टीवन (41) बैटल्स (लड़ाइयां) लड़ीं और हर बैटल में जीत हासिल की और मराठा एंपायर (सम्राज्य) को दूर-दूर तक फैलाया। ...बीईंग अ ट्रू वारियर (एक सच्चे योद्धा की तरह) उन्होंने रणनीति के लैसन (पाठ) सीखे हर जगह से।

चाहे वो जंग का मैदान हो या जंगल। इस हिंदी-अंग्रेजी के घालमेल वाली कॉमेन्ट्री पर मिली तीखी और कड़वी प्रतिक्रियाओं का नतीजा यह निकला कि दूसरे एपिसोड में भाषा को दुरुस्त करके केवल हिंदी रखा गया है।
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