'सत्या 2' से बतौर एक्टर बॉलीवुड में अपने अभिनय की पारी की शुरूआत करने जा रहे पुनीत सिंह रत्न निर्देशन का भी तजुर्बा ले चुके हैं। फिल्म राजनीति में वे प्रकाश झा जैसे निर्देशक के असिस्टेंट थे।
पुनीत का कहना है कि वे निर्देशन के क्षेत्र में इसलिए गए थे, क्योंकि वे कैमरे के पीछे की दुनिया देखना चाहते थे। कैमरे से दोस्ती होने से कलाकार का आत्मविश्वास कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है।
असल में पुनीत एक जुनूनी एक्टर हैं। पढ़ाई में उनका कभी मन नहीं लगा। वे पढऩे से ज्यादा दिन में तीन फिल्में देखने में यकीन करते थे।
आखिरकार दसवीं की परीक्षा पास करते ही उन्होंने अपने शहर उदयपुर को अलविदा कह दिया और मुंबई की ट्रेन पकड़ ली।
अभिनय के प्रति उनकी दीवानगी देखकर घरवालों ने उन्हें पूरा सपोर्ट किया। पुनीत कहते हैं कि अगर उनके माता पिता उन पर भरोसा नहीं करते, तो उन्हें सत्या 2 जैसी फिल्म में हीरो बनने का मौका नहीं मिलता।
वे अपने आपको किस्म का धनी मानते हैं कि उन्हें रामगोपाल वर्मा जैसे फिल्मकार के साथ काम करने का मौका मिला है। वे शुरू से ही रामू की फिल्मों के दीवाने रहे हैं।
पुनीत का मानना है कि रामू एक इंस्टीट्यूट की तरह हैं। उनसे एक्टर बहुत कुछ सीख सकते हैं। सत्या 2 की रिलीज तारीख आगे बढ़ जाने से भी पुनीत बहुत खुश हैं।
पहले यह फिल्म 25 अक्टूबर को रिलीज होने जा रही थी, लेकिन अब 8 नवंबर को रिलीज होगी। इस मामले में पुनीत का कहना है कि जो होता है, अच्छे के लिए ही होता है।
अगर 'सत्या 2' की रिलीज तारीख आगे नहीं बढ़ती, तो उसे पांच फिल्मों के साथ प्रदर्शित होना पड़ता था। इतनी अधिक संख्या में फिल्में एक ही दिन रिलीज होती हैं, तो दर्शक कन्फ्यूज हो जाता है।
अब 8 नवंबर को 'सत्या 2' के लिए मैदान लगभग खाली है। दर्शकों को पूरा अटेंशन उसे मिल सकता है।