हिंदी फिल्मों में 40 और 50 साल पार कर चुके हीरो को अपने से आधी उम्र की लडकियों के साथ रोमांस करते तो बखूबी स्वीकार कर लिया जाता है, लेकिन उम्रदराज हीरोइनों से कैसा गुरेज? प्रियंका चोपडा बॉलीवुड के इसी चलन से नाराज हैं और इसमें बदलाव भी चाहती हैं।
लेकिन इसके लिए वह भारतीय दर्शकों की 'मानसिकता' को भी जिम्मेदार ठहराती हैं। पिछला काफी समय बॉक्स ऑफिस के लिहाज से प्रियंका के लिए अच्छा रहा। उनकी फिल्म 'गुंडे' हिट रही तो 'मैरी कॉम' में उनके अभिनय की सराहना हुई। इसके साथ ही इस फिल्म ने अच्छा कारोबार भी किया।
प्रियंका ने कहा, 'हमें ऐसी फिल्में स्वीकार करनी होगी जिसमें 30 या 40 पार हीरोइन भी रोमांस करे। शादीशुदा अभिनेत्रियों को स्वीकारना होगा। इसके अलावा अभिनेत्रियों को भी बदलते समय के हिसाब से अपने रोल चुनने चाहिए। जैसे 'डर्टी पिक्चर' में विद्या, 'क्वीन' में कंगना 'बर्फी' में मैं या 'चेन्नई एक्सप्रेस' में दीपिका।'
'स्टार पावर में पीछे रह जाती हैं हीरोइन'
लेकिन प्रियंका यह भी मानती हैं कि स्टार पावर के मामले में हीरोइनें, हीरो से खासी पीछे हैं। वह कहती हैं, 'बॉक्स ऑफिस पर हीरो की तुलना में हीरोइन को फिल्म चलाने में ज्यादा दिक्कत होती है। टॉप हीरो की फिल्में सप्ताहांत में ही 100 करोड रुपये बना लेती हैं, जबकि महिला प्रधान फिल्मों को लंबे समय तक हर क्षेत्र में प्रदर्शित करना पडता है, तब कहीं जाकर अच्छे नतीजे मिलते हैं।'
'हालांकि अब बदलाव हो रहा है। प्रियंका की फिल्म मैरी कॉम का शुरुआती व्यवसाय अन्य मेल सितारों की फिल्मों के बराबर ही था।' प्रियंका मशहूर अमरीकी टीवी नेटवर्क एबीसी के क्वांटिको में काम कर रही हैं। इस शो को खूब तारीफें मिल रही हैं। उनके इस शो को शूटिंग के वक्त से ही सुर्खियां मिल रही हैं।
फिल्म निर्माता बनेंगी प्रियंका चोपड़ा
प्रियंका आने वाले समय में निर्माता बनने जा रही हैं। उनकी पहली फिल्म होगी 'मैडम जी'। वह कहती हैं, 'मैं नए कलाकारों को मौका देना चाहती हूं। मेरी बहनें फिल्मों में आ रही हैं, लेकिन उनके लिए ये सब आसान है। मैं जब फिल्मों में आई तो मेरे आगे पीछे बॉलीवुड में कोई नहीं था। इस वजह से मैं युवा टैलेंट को मौका देना चाहती हूं।'
प्रियंका निर्माता के तौर पर लेखकों को बेहतर मौके और पैसे देने के हक में हैं। प्रियंका का मानना है कि नए लोगों को स्पोर्ट करना बहुत जरूरी है। क्योंकि फिल्म इंडस्ट्री में कुछ ही लोगों का इतना ज्यादा दबदबा है कि नई प्रतिभा सामने आने से पहले ही दम तोड़ देता है।