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हीरोइन क्यों बनना चाहती थीं ऋषि कपूर की सास?

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नीतू सिंह की मां राजी सिंह हीरोइन बनने के चक्कर में मुंबई आई थीं। उन्होंने कई सालों तक बहुत हाथ पांव मारे, लेकिन उन्हें कोई फिल्म नहीं मिली। तब  अपनी बेटी को ही फिल्मों में लाने की ठान ली। उनकी कोशिश रंग लाई और छह साल की बेबी सोनिया फिल्म दो कलियां में डबल रोल में आ गईं।
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इस फिल्म से ही सोनिया ने साबित कर दिया कि उनमें अभिनय क्षमता है। इसके बाद उन्हें बाल रूप में कई फिल्में मिल गईं। लेकिन राजी सिंह का सपना तो बेटी को बॉलीवुड की एक बड़ी हीरोइन बनाने का था। वह नहीं चाहती थीं कि नीतू का हश्र भी डेजी ईरानी जैसा हो, जो चौदह वर्ष तक फिल्म में बच्चों का रोल करती रहीं और फिर एकाएक ही बच्चे से ‘युवती’ बन गई।

निर्माताओं ने उन्हें इस भय से अपनी फिल्मों में नही लिया कि दर्शक डेजी को हीरोइन के रूप में स्वीकार नहीं करेंगे। डेजी ने हीरोइन बनने के लिए कड़ा संघर्ष किया, लेकिन कामयाब नहीं हुईं। इसी डर के चलते राजी सिंह अपनी बच्ची को फिल्म इंडस्ट्री से दूर ले गईं और जब वे वापस इंडस्ट्री में लौटीं तो बेबी सोनिया अब 14 साल की नीतू सिंह बन चुकी थीं।
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चाहती थीं चालाक हों नीतू सिंह

ऐसा कहा जाता है कि राजी सिंह नीतू को चालाक बनने का पाठ तो पढ़ाती ही थीं, साथ ही वह अपनी बेटी को एक बड़ी हीरोइन बनने के ऊंचे ख्वाब भी दिखाने लगी थीं। इस बीच नीतू को हीरोइन के तौर पर पहली फिल्म रिक्‍शावाली मिल गई। लेकिन यह फ्लॉप फिल्म साबित हुई। उसी दौरान मां बेटी को पता चला कि राजकपूर बॉबी के लिए हीरोइन की तलाश में हैं तो दोनों उनके पास पहुंच गईं।

लेकिन राजकपूर फ्लॉप हीरोइन नहीं लेना चाहते थे, वे फ्रेश चेहरे की तलाश में थे। कहते हैं कि अगर राज ने डिंपल को ना देखा होता तो शायद बॉबी में नीतू ही ऋषि कपूर के साथ होतीं। लेकिन राजी सिंह ने हिम्मत नहीं हारी। उन्हें नीतू सिंह की शारीरिक बनावट पर पूरा भरोसा था। उन्होंने एक फोटोग्राफर से नीतू के ऐसे पोज खिंचवाए।

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चर्चाओं में आ गईं थीं नीतू

जैसे ही पत्रिकाओं में ये फोटो छपे, फिल्म-जगत में हलचल मच गई। निर्माता लाइन लगा कर नीतू सिंह के घर की ओर दौड़े।  जानते हैं उस दौर में नीतू सिंह का भाव क्या था? एक फिल्म के लिए पांच हजार रुपये..। नीतू सिंह के अपने शब्दों में ही, उन दिनों पांच हजार रुपये पर फिल्म साइन करना भी यूं लगता था मानो स्वर्ग का राज्य ही मिल गया हो।

राजी सिंह ने यहां भी बुद्धिमता दिखाई। उन्होंने जो भी फिल्म आई उसे नीतू के लिए साइन कर लिया। राजी जानती थीं कि सिम्मी ग्रेवाल अच्छी फिल्में मिलने के लिए इंतजार करती रहीं और बेचारी जीवन भर इंतजार ही करती रह गईं। वाकई में राजी सिंह दूसरों की गलतियों से सबक लेती थीं। बताते चलें कि नीतू सिंह ने अपनी मां के साथ स्क्रीन पर रानी और लालपरी फिल्म में काम किया था। इसमें राजी सिंह रील पर भी नीतू की मां बनी थीं।    
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