करिश्मा कपूर की उम्र 15 ही हुई थी कि जब वह फिल्म की नायिका चुन ली गयीं। 16 बरस पूरे होते ही उनकी पहली फिल्म 'प्रेमकैदी' रिलीज भी हो गयी। इसके बाद कुछ ऐसा हुआ जिस वजह से करिश्मा कपूर रात-रातभर रोया करतीं। हालत ऐसे थे कि उनकी मां बबिता भी उन्हें चुप कराते-कराते रोने लगतीं।
रणधीर कपूर से अलग होने के बाद बबिता अपने दोनों बेटियों करिश्मा और करीना के साथ रहने लगी थीं। बबिता को इन दोनों बेटियों के कैरियर की चिंता सतानी शुरू हो चुकी थी। हालांकि उस समय कपूर खानदान में लड़कियों के काम करने पर मनाही थी लेकिन बबिता चाहती थीं कि उनकी दोनों बेटियां फिल्मों में आएं।
बबिता फिल्म के निर्माता और निर्देशकों से करिश्मा को लांच करने के लिए मिलना-जुलना शुरू हो चुकी थीं। करिश्मा साढ़े 15 साल की ही थीं तभी फिल्म निर्माता डी रामा नायडू ने करिश्मा को अपनी फिल्म प्रेम कैदी के लिए साइन कर लिया।
और करिश्मा बन गयीं हीरोईन
मधु जैन अपनी किताब द कपूर्स में इस घटना का जिक्र करते हुए लिखती हैं कि करिश्मा इस फिल्म के हीरोईन तो बन गयीं लेकिन बहुत ही घटिया तरीके से। साउथ की फिल्मों के हीरो हरीश उनके अपोजिट थे। इस फिल्म में करिश्मा का मेकअप और ड्रेसिंग सेंस बहुत ही गंदा था।
घनी भौंहों के साथ उनके घुघराले बाल उन्हें एक ऐसी अल्हड़ किशोरी के रूप में दिखा रहे थे जो पर्दे पर किसी भी रूप में नायिका नहीं दिखती। फिल्म औसत सफल हुई लेकिन इस फिल्म में करिश्मा की लांचिंग बहुत खराब हुई।
करिश्मा का बुरा दौर यहीं से चलना शुरू हो गया। आने वाले सालों में 'पुलिस ऑफिसर', 'जागृति', 'सपने साजन के' जैसी फिल्में असफल हुईं तो करिश्मा का कैरियर चलने से पहले ही ठहर गया।
अलग हो गए धर्मेंद्र
धर्मेंद्र, करिश्मा को अपने बेटे बॉबी के साथ फिल्म 'बरसात' में लांच करना चाहते थे लेकिन करिश्मा की फिल्मों की बुरी गत देखकर वह पीछे हट गए। यहीं पर करिश्मा टूटने लगी थी। वह रात-रात भर रोती रहतीं। कभी बबिता तो कभी उनकी छोटी बहन उन्हें समझाती।
घर का माहौल ऐसा होता कि घर में कोई भी खाना न खाता। सब चुपचाप एक-दूसरे को सहारा दे रहे होते। राज कपूर का नाम होने के बाद भी कोई बड़ा फिल्मकार करिश्मा को रीलांच करने के लिए आगे नहीं आया।
डेविड धवन ने बदला कैरियर
करिश्मा का कैरियर सही मायने में डेविड धवन ने बदला। 1994 में जब 'राजा-बाबू' फिल्म आयी तब पहली बार करिश्मा को दर्शकों ने नोटिस किया। फिल्म भले ही गोविंदा की कॉमेडी की वजह से चली लेकिन करिश्मा के काम को भी सराहा गया।
डेविड धवन ने करिश्मा की सेक्सी इमेज को भुनाने का प्रयास किया। राजा बाबू फिल्म में सरकायी लेओय खटिया गाना खूब चला। इसी इमेज को खुद्दार फिल्म में सेक्सी सेक्सी मुझे लोग बोले गाने में भी भुनाया गया।
मधु जैन लिखती हैँ कि करिश्मा के कैरियर को सही दिशा 1996 में रिलीज हुई फिल्म 'राजा हिंदुस्तानी' से मिली। इस फिल्म में करिश्मा के लुक को बदला गया। उन्हें सीधी बालों की विग लगायी गयी।