यह मामला देश के सबसे बड़े राजनैतिक घराने से जुड़ा हुआ है। देश के पहले प्रधानमंत्री इसमें शामिल हैं।
घटना पचास के दशक के आसपास की है। मूवी टाइम्स के सम्पादक बी.के. करांजिया के नेतृत्व में मुंबई के पत्रकारों ने एक क्रिकेट मैच का आयोजन किया था। मुझे उसकी इतनी याद जरूर है कि जवाहरलाल नेहरू ने उसका उद्घाटन किया था और फिल्मी दुनिया के नामचीन सितारों ने उसमें शिरकत की थी।
इन सितारों में प्रमुख थे अशोक कुमार, मोतीलाल, दिलीप कुमार, राज कपूर, देव आनंद, नरगिस, सुरैया और उसी स्तर के अनेक फिल्मकार भी। मैच का आयोजन महानगर के सुप्रसिद्ध ब्रेबोर्न स्टैडियम में किया गया था, जिसका नाम अब शायद बदल चुका है।
मैच में भाग लेने वाले फिल्मकार यथासमय वहां पहुंचते गए और तालियों के साथ उनका स्वागत होता रहा। जवाहरलाल नेहरू के पहुंचने पर तो उन तालियांे ने इतना वेग धारण कर लिया कि वह सितारे भी पूरी तरह हतप्रभ हो गए, जिनके सत्कार में वह जनसमूह वहां उमड़ा था। लगता था जैसे सितारों के बीच अचानक कोई चांद पैदा हो गया हो और उसके मंच पर पहुंचते ही सारे सितारे आभाहीन होकर रह गए हों।
मैच शुरू करने के पहले मुख्य अतिथि के साथ फिल्मस्टारों का परिचय कराना था। करांजिया ने सितारों को इस बात का निर्देश किया कि वे स्वयं अपने बारे में बताते चलें। हर सितारे ने अपना नाम-धाम बताते हुए नेहरूजी का अभिवादन किया।
मुश्किल तब आई जब अभिनेता मोतीलाल उनके सम्मुख उपस्थित हुए। पहले तो अपना नाम बताने में उनको खासी झिझक हुई। फिर जवाहरलाल ने जब उनसे उसकी जानकारी चाही, तो बड़े संकोच के साथ उनके मुंह से निकला, `जी, मुझे मोतीलाल कहते हैं।’ आपको मालूम ही होगा कि मोतीलाल जवाहरलालजी के पिता का नाम था।