फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हर किसी को नहीं मिलता यहां प्यार जिंदगी में...

Wed, 16 Oct 2013 03:23 PM IST
रवि बुले, मुंबई
विज्ञापन
विज्ञापन
अदिति राव हैदरी की फिल्में ये साली जिंदगी, लंदन पेरिस न्यूयॉर्क और मर्डर-3 ज्यादातर महानगरों में देखी गईं। लेकिन अब वह देश के छोटे शहरों में भी पहचान बनाने को उत्सुक हैं।
विज्ञापन


ऐसे में उन्होंने बॉलीवुड की मसाला फिल्मों में कदम रख दिया है। फिल्म ‘बॉस’ शुरुआत है। इस फिल्म और कैरियर को लेकर हैदराबाद की अदिति से बातचीत।

फिल्म ‘बॉस’ में आपके रोल से बात शुरू करते हैं...।
मैं कॉलेज में में पढ़ने वाली एक लड़की अंकिता का रोल प्ले कर रही हूं। फिल्म में उसकी लवस्टोरी का ट्रेक है। उसे शिव पंडित के कैरेक्टर से प्यार हो जाता है।

दोनों के प्यार की वजह से फिल्म की मुख्य कहानी में ट्विस्ट एंड टर्न आते हैं। ‘बॉस’ मसाला पिक्चर है, जिसमें एक्शन-रोमांस-कॉमेडी-ड्रामा सब कुछ है। मेरा ट्रेक रोमांस का है। मसाला फिल्मों में यह मेरा पहला छोटा-सा कदम है।
विज्ञापन


आप ट्रेंड क्लासिकल डांसर हैं। अभी तक आपकी जो फिल्में आईं उनमें आपको यह प्रतिभा दिखाने का मौका नहीं मिला। ‘बॉस’ में क्या दर्शकों को आपका यह पक्ष देखने मिलेगा?
इस फिल्म में भी मैं डांस नहीं कर रही हूं। हां, फिल्म ‘बॉस’ का एक रोमांटिक गाना जरूर है 'हर किसी को नहीं मिलता यहां प्यार जिंदगी में...' वह यहां रीमिक्स किया गया है।

फिल्म में वह मुझ पर शूट किया गया है। लेकिन मैं इंतजार कर रही हूं कि मुझे ऐसा रोल मिले, जिसमें डांस का टैलेंट दिखा सकूं। अगर इसमें देर हो रही है तो आगे कुछ अच्छा ही होने वाला होगा।

लेकिन आज फिल्मों में इस तरह के डांस के लिए मौके नहीं के बराबर हैं...!
मुझे लगता है कि डांस आखिर डांस होता है। चाहे क्लासिकल हो या बॉलीवुड डांस। मुझे किसी भी तरह के डांस का मौका मिलेगा तो मैं खुशी से करूंगी। क्लासिकल मैं बचपन से सीख रही हूं। मेरी ट्रेनिंग भरतनाट्यम में हुई है, लेकिन बॉलीवुड में कोई भी डांस करना चाहूंगी।

‘बॉस’ से पहले आपकी फिल्में कंटेंट पर आधारित रही हैं। आपने राह क्यों बदल ली...?
इसका खास कारण है कि मसाला फिल्मों की पहुंच दूर-दूर तक होती है। वे छोटे से छोटे शहर में जाती हैं। यह कहना गलत होगा कि कंटेंट ड्रिवन फिल्मों को ज्यादा दर्शक नहीं मिले इसलिए मैं इधर आई हूं। मेरी जितनी भी फिल्में रही हैं, वे सभी चली हैं।

इस तरह के सिनेमा से बहुत संतुष्टि मिलती है। लेकिन इधर मसाला फिल्में भी अच्छी बनने लगी हैं। उन्हें भी अच्छे निर्देशक बना रहे हैं। हां, यह जरूर है कि हर फिल्म सौ करोड़ नहीं कमा सकती।

आप फिल्म इंडस्ट्री से नहीं हैं। मुंबई से भी नहीं हैं। एक एक्टर के लिए बाहर से आकर यहां काम करना कितना मुश्किल या अलग होता है?
बाहर से आने पर आपकी जर्नी (सफर) यहां के लोगों के मुकाबले अलग होती है। आपको कोई गाइडेंस नहीं मिलता। आप धीरे-धीरे आगे बढ़ते हैं। ज्यादा दुनिया देखते हैं। स्ट्रगल करना पड़ता है।

वैसे स्ट्रगल सबकी जिंदगी में होता है। मुझे लगता है कि बिना संघर्ष के कोई भी इंसान बहुत अच्छा काम नहीं कर सकता। संघर्ष कड़ी मेहनत के लिए प्रेरित करता है। इससे आपको नई बातें सीखने को मिलती है।

फिल्मों में अब तक के अपने सफर को आप कैसे देखती हैं। कितनी संतुष्ट हैं अपने आप से?
मैं हमेशा अपने व्यक्तित्व में संतुलन रखती हूं। हर पल खुद को संतुष्ट पाती हूं। मैंने हर फिल्म से कुछ सीखा है और धीरे-धीरे आगे बढ़ी हूं। मैं चाहती हूं कि लगातार अच्छे निर्देशकों के साथ काम करूं, तरक्की करूं। मुझे लगता है कि अगर आप ऐक्टर होते हुए स्टार बनेंगे तो लंबी रेस का घोड़ा साबित होंगे।
विज्ञापन


आपने शुरुआत मलयालम और तमिल फिल्मों से की थीं। क्या आप अब भी साउथ में फिल्में कर रही हैं?
इन दिनों मैं केवल हिंदी फिल्में कर रही हूं। लेकिन अगर मुझे साउथ से किसी अच्छे डायरेक्टर और अच्छे बैनर का ऑफर आएगा तो मैं जरूर उनके साथ काम करूंगी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें