एक बार फिर प्रतीक बब्बर दर्शकों से रूबरू होंगे। शेक्सपियर के नाटक रोमियो जूलियट से प्रेरित उनकी फिल्म 'इसक' रिलीज की तैयारियां कर रही है। यह फिल्म बनारस की पृष्ठभूमि पर है, इसलिए इसका रंग उनकी अब तक की फिल्मों से एकदम अलग है। अमर उजाला की प्रतीक से एक खास बातचीत।
आपकी नई फिल्म को परदे पर आने में काफी वक्त लग गया। फिल्म 'एक दीवाना था' के बाद तो जैसे आप गायब ही हो गए थे?
हां, मेरे जीवन में इस बीच काफी उतार चढ़ाव आए। मैं काफी परेशान रहा। मुझे लगता है कि हर कलाकार के साथ ऐसा होता है। हम अपनी गलतियों से ही सीखते हैं और आगे बढ़ते हैं।
आप किन गलतियों की बात कर रहे हैं?
मुझे जिस तरह से अपनी फिल्मों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए था, उस तरह से नहीं कर पाया। इस बीच रिलीज हुई मेरी फिल्मों ने भी बॉक्स ऑफिस पर कोई धमाल नहीं किया। खासकर 'एक दीवाना था' की असफलता ने मुझे प्रभावित किया। यह फिल्म सफल होती, तो मेरा कैरियर कुछ और ही होता।
फिल्म 'इसक' के बारे में बताइए?
रोमियो और जूलियट की कहानी से प्रेरित है 'इसक'। इस फिल्म में काम करने का मेरा अनुभव कमाल का है। मैंने इसमें राहुल मिश्रा का किरदार निभाया है, जो किलिंग मशीन जैसा है। इस फिल्म में ड्रामा, हीरोइज्म और वायलेंस एक दिलचस्प अंदाज में उभर कर आया है।
बनारस की पृष्ठभूमि पर कई फिल्में सामने हैं। हाल ही में 'रांझणा' आई है। आपकी फिल्म किस तरह से अलग है?
मेरी फिल्म का ट्रीटमेंट ही एकदम अलग है। मनीष तिवारी के निर्देशन में जबर्दस्त फ्रेशनेस है।
चूंकि आपका किरदार बनारसी है, इसलिए आपको उच्चारण पर काफी काम करना पड़ा होगा?
हां, मैंने अपने उच्चारण पर तो काफी काम किया ही है, अपने शरीर पर भी खासा ध्यान दिया है। बॉडी लैंग्वेज भी बहुत मायने रखती है।
आपकी एक बड़ी पहचान स्मिता पाटिल के बेटे की भी है। इस पहचान से आपको फायदा होता है या नुकसान?
मैं एक महान अभिनेत्री के बेटे होने को इस एंगल से नहीं देखता। मुझे गर्व है कि मैं स्मिता जी का बेटा हूं। मुझे इस पहचान से कोई दिक्कत नहीं है। आपको यह बता दूं कि मैं अपनी मां की फिल्में देखकर बहुत सारे टिप्स लेता हूं।