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'बैंग बैंग' के बारे में बहुत कुछ बता गए ऋतिक

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ऋतिक रोशन से बात करते हुए आप महसूस करेंगे कि वे कुछ आध्यात्मिक हो चले हैं। उनकी बातों में ईश्वर की चर्चा सहज शामिल होती है। 40 बसंत देख चुके ऋतिक फिल्मों से होते हुए जीवन के अनुभवों पर गंभीर बातें कहते हैं।
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 ‘बैंग बैंग’ की उनके जीवन में खास जगह है। वे इससे भावनात्मक रूप से जुड़े हैं। इसकी शूटिंग के दौरान उनकी ब्रेन सर्जरी हुई और पत्नी सुजैन से ब्रेक-अप भी। उन्हीं से जानिए उनकी जिंदगी के बारे में

जब से ‘बैंग बैंग’ का टीजर रिलीज हुआ, तभी से फिल्म सुर्खियों में है। क्या उम्मीदों का बोझ महसूस कर रहे हैं?

यह मैंने एक छोटी और लाइट फिल्म मान कर शुरू की थी। मुझे लगता है कि यह किस्मत है कि जिस फिल्म में काम करता हूं वह अपने आप बड़ी हो जाती है। मैंने सोचा था कि मैं आराम से यह फिल्म कर लूंगा, लेकिन जो चैलेंज और अड़चनें इसमें काम करते हुए आईं वे कल्पना से बाहर थीं। वैसे तमाम मुश्किलों के बावजूद मुझे लगता है कि यह मेरे कैरियर की सबसे आसान फिल्म है। कभी नहीं लगा कि मेहनत कर रहा हूं। फिल्म में राजवीर का किरदार निभाते हुए हमेशा मुझे लगा कि यह तो मैं ही हूं। इस फिल्म में माध्यम से मैंने खुद को नए सिरे से पहचाना है।
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फिल्म के राजवीर आप ही हैं, कैसे मान लिया जाए?

जैसे राजवीर जीता है, वैसे ही मैं भी जीता हूं। खुशमिजाज। उसकी खुशी दूसरों को देने में है। वह दिल का साफ है। मैं फिल्में पैसों के लिए नहीं करता। अपनी फिल्मों के द्वारा मैं लोगों को खुशी देता हूं, उनकी जिंदगी में आशा की किरणें पैदा करता हूं, उन्हें सपने देखने को प्रेरिता करता हूं, उन्हें बताता हूं कि असंभव कुछ नहीं है, डर कुछ नहीं है। मेरी जिंदगी फैन्स के लिए उदाहरण है कि हमें कहीं रुकना नहीं है, लगातार आगे बढ़ना है। मैं उन फिल्मों को चुनता हूं जो मेरी जिंदगी के करीब होती हैं।

सारे स्टंट खुद ही किए

‘बैंग बैंग’ की शूटिंग के दौरान आपकी तबीयत खराब हुई। मस्तिष्क की सर्जरी हुई। आपको असुविधा न हो, इसलिए शिमला में कमबैक से पहले डायरेक्टर सिद्धार्थ आनंद ने कई स्टंट सीन शूट करके रखे थे?

बिल्कुल। मैं जब पहुंचा तो देखा कि वे ऐक्शन और स्टंट दृश्यों के लांग शॉट बॉडी डबल्स के साथ शूट हो चुके हैं। मैंने एक-एक शॉट देखा और उनसे कहता गया कि यह कर सकता हूं... यह भी कर सकता हूं... इस तरह एक एक करके सारे शॉट खुद दिए। यह कैसे हुआ मैं नहीं जानता। जब मैं बीमार हुआ तो मेरे कारण टीम का बहुत नुकसान हुआ। तब मैंने तय कर लिया था कि जब वापस आऊंगा तो इसे अपनी बेस्ट फिल्म बना दूंगा। यह मेरा प्रण था और मैंने पूरा किया। यदि ऐसा नहीं सोचता तो मैं काम ही नहीं कर सकता था।

क्या थोड़ा विस्तार से बता सकते हैं कि आखिर क्या समस्याएं हो गई थीं?

मेरे सिर में दर्द रहता था, जो धीरे-धीरे काफी बढ़ गया था। मैं उस वक्त बोल नहीं पाता था। खुद की आवाज ऐसी लगती थी कि जैसे कोई सिर पर मार रहा है। कमरे में अगर शांति हो तो वह भी दिमाग को बहुत भारी लगती थी। कोई मुझसे बात करता तो मैं उसकी बात समझ नहीं पाता था। कोई प्रेशर मैं सहन नहीं सकता था। भावनात्मक रूप से भी वह दौर मेरे लिए कठिन था।

लेकिन न मैं रो सकता था, न हंस सकता था। किसी को बता भी नहीं सकता था। लगता था कि भगवान ने मुझे एक बक्से में बंद कर दिया है। शायद मैंने कुछ किया होगा, जिस कारण मुझे सजा मिली। लेकिन भगवान से मैंने कोई सवाल नहीं किया। मैंने उस दौर में समझा कि जिंदगी से आसान होने की उम्मीद करना बेमानी है। यह ठीक वैसे है कि शेर आपके सामने हो और आप कहें कि भैया मैं तो शाकाहारी हूं, आप मुझे मत खाओ।
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बनती ही रहेगी कृष

क्या आपने हॉलीवुड की ‘नाइट एंड डेज’ देखी थी, ‘बैंग बैंग’ जिसकी रीमेक है?

यह रोचक बात है कि एक फ्लाइट में मैंने यह फिल्म देखी और सोचा कि यह बढ़िया हिंदी फिल्म हो सकती है। इसके एक महीने बाद ही मेरे पास सिड (निर्देशकः सिद्धार्थ आनंद) का फोन आया कि वह ‘नाइट एंट डेज’ पर ‘बैंग बैंग’ बना रहे हैं। इसके बाद हमने कभी यह फिल्म नहीं देखी।

आप जब मुश्किलों से उबर जाते हैं तो उसकी खुशी होती है, जिसे परिवार के साथ बांटते हैं। आपने खुशियां किसके साथ बांटी?

अरे, मेरा परिवार था और है। मेरा स्टाफ मेरे परिवार की तरह है। अभी स्थिति ऐसी है कि जिंदगी में आपको सब कुछ नहीं मिलता। कुछ सवाल हैं जिनके जवाब समय के साथ सामने आएंगे। लेकिन तब तक आपको खुद को मजबूत बनाए रखना होगा। मेरा परिवार अब सब जगह है, जहां भी मैं जाता हूं जिन लोगों से मिलता हूं। मैं अब लोगों को प्यार बांटता हूं। जब आप प्यार बांटते हैं तो वह कई गुना होकर आपके पास लौटता है।

आपको नहीं लगा कि भगवान ने यह मेरे साथ ही क्यों किया?

बिल्कुल नहीं। मैं क्यों पूछता? मुझे लगता है कि भगवान चाहता था मैं और बेहतर इंसान बनूं। ज्यादा मजबूत बनूं। लोगों को और ज्यादा प्यार बांटूं। वह चाहता है कि मैं बेस्ट बनूं और मैं बनूंगा।

आप जिस कठिन दौर से गुजरे हैं तो क्या कभी सोचा कि इस बारे में लिखूंगा?

हां, मुझे लगता है कि अगर मैं कभी लिखूंगा तो ‘बैंग बैंग’ मेरी जिंदगी का इंटरवेल होगा। किताब का दूसरा हिस्सा मेरी जिंदगी का सबसे शानदार वक्त होगा। यह एक नई शुरुआत है। ...और यह ईमानदार जवाब है।

बच्चों के लिए आप ऋतिक रोशन नहीं, कृष हैं। अगली फिल्म कब आएगी?

अभी सिर्फ इतना कह सकता हूं कि जब तक मैं 90 साल का हो जाऊंगा कृष बनती रहेगी। बीस पार्ट बनेंगे इसके।
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