सोनम कपूर असल जिंदगी में कैसी हैं, अगर यह जानना चाहते हैं तो उनकी फिल्म ‘खूबसूरत’ देखने के लिए तैयार रहिए। नवयुवतियों के लिए फैशन की आदर्श सोनम की इस महत्वाकांक्षी फिल्म का ट्रेलर सोमवार को मुंबई में लॉन्च किया गया।
ट्रेलर में आप काफी शरारती-चंचल-चुलबुली दिख रही हैं। क्या सेट पर ऐसी ही मस्ती होती थी?
हर फिल्म की रिलीज के दौरान पूछा जाता है कि क्या यह केरेक्टर आपकी ही तरह का है। मैं ईमानदारी से कहूं तो रिया (बहन, प्रोड्यूसर), शशांक (डायरेक्टर) और फिल्म के राइटर मुझे इतने अच्छे से जानते थे कि उन्होंने बहुत ही बेशर्मी से मेरे केरेक्टर की एक-एक बात ‘खूबसूरत’ के मेरे इस रोल में डाल दी। सच्चाई यह है कि उन्होंने इस फिल्म में मुझे एक्सपोज कर दिया है।
मैं पूरी शूटिंग के दौरान यह सोच सोच कर हैरान रह जाती थी कि अरे यह बात तो मेरे साथ रियल लाइफ में हुई थी, यहां कैसे आ गई! अगर आज तक बनी मेरी फिल्मों में कोई किरदार सचमुच मेरे व्यक्तित्व से मेल खाता है तो वह इस फिल्म की मृणालिनी यानी डॉ.मिली का है। यह सोच कर मैं सचमुच संकोच भी महसूस करती हूं और बहुत अच्छा भी लगता है। हकीकत यही है कि इस फिल्म में मेरी रियल पर्सनैलिटी है।
मैं सिर्फ एंज्वाय करती हूं
यह आपकी होम प्रोडक्शन फिल्म है। क्या कोई अतिरिक्त दबाव है?
सच कहूं तो मैंने शूटिंग के दौरान मैंने इस बात पर ध्यान ही नहीं दिया। अगर मैं दबाव महसूस करती तो काम नहीं कर सकती थी। मैंने टेंशन लेने का सारा काम रिया पर छोड़ दिया था। मैं सिर्फ अपने रोल को एंजॉय कर रही थी। अगर आप जिम्मेदारी या दबाव महसूस करने लगें तो ऐक्टिंग नहीं कर सकेंगे।
ट्रेलर में लड़के की मां रत्ना पाठक शाह काफी कड़क हैं। रियल लाइफ में आपको सख्त सासू मां मिल जाएं तो क्या करेंगी?
पता नहीं। मैं कह नहीं सकती। लेकिन मुझे लगता है कि जिंदगी में आखिरकार सारी चीजें धीरे-धीरे ठीक हो ही जाती हैं।
मैं रेखा के बराबर नहीं
ऋषिकेश मुखर्जी की ‘खूबसूरत’ में रेखा थीं। क्या आपने उन्हें फिल्म या ट्रेलर दिखाया?
अभी तो नहीं। लेकिन हम उनके लिए विशेष ट्रायल रखेंगे। वह हमारे लिए परिवार के सदस्य जैसी हैं। पिछली फिल्म ‘आयशा’ का भी हमने उनके लिए स्पेशल शो रखा था।
क्या इस रोल में आप रेखा की बराबरी कर सकेंगी?
बिल्कुल भी नहीं। वास्तव में हम उस फिल्म से कोई मुकाबला नहीं कर रहे हैं, बल्कि यह उस फिल्म को खूबसूरती से याद करने का हमारा अंदाज है। अपनी फिल्म के माध्यम से हम ऋषिकेश मुखर्जी को उनकी फिल्म मेकिंग के खास अंदाज के लिए श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
मैं कोई गाना नहीं गा रही
यूं तो ऋषिकेश मुखर्जी की कई बढ़िया फिल्में हैं लेकिन क्या सोच कर ‘खूबसूरत’ को रीमेक के लिए चुना?
इस बारे में ज्यादा बेहतर तो प्रोड्यूसर-डायरेक्टर बता सकते हैं लेकिन मेरे लिए आज ऐसी बहुत थोड़ी सी फिल्में हमारे सामने हैं जो पूरी की पूरी अच्छी हैं, जिनमें पारिवारिक-सामाजिक मूल्यों की बातें हैं। साथ ही इन फिल्मों को देखते हुए आप एंजॉय भी करते हैं। मुझे लगता है कि ऋषिकेश मुखर्जी उन चुनिंदा डायरेक्टरों में से हैं जिन्होंने इस तरह की बेहतरीन फिल्में बनाई हैं।
उनकी गुड्डी, मिली और खूबसूरत जैसी फिल्मों हो हर समय देखा जा सकता है। हर व्यक्ति इनका मजा ले सकता है और उनमें मैसेज भी है। मेरे खयाल से आज राजू हिरानी ही इस तरह की फिल्में बना रहे हैं। मुझे नहीं लगता कि अच्छी फिल्म वही होती है जो डार्क हो या जिसमें आखिरी में किसी की मौत हो जाए। मुझे लगता है कि फिल्म आपको खुश करने वाली होनी चाहिए।
इधर हर नई हीरोइन फिल्मों में गाना गा रही है। क्या आप भी गाएंगी?
अरे! क्या आप पागल हैं। यह तो बहुत ही खराब आइडिया। मैं तो बाथरूम में गाना नहीं गा सकती। ऐसा कभी नहीं होगा कि आप मेरा गाना सुनेंगे।