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मैं अभी भी फटी नाइटी पहनती हूं: श्रद्घा

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कामयाबी ने जीवन में क्या क्या बदला?
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घर और परिवार के स्तर पर तो खास कुछ नहीं बदला। हां यह जरूर है कि अब मुझे घर में वक्त बिताने का मौका पहले से कम मिलता है। परंतु मैं पहले जैसी थी, वैसे ही रहती हूं। मां कहती हैं कि अब तुम घर में फटी हुई नाइटी और भाई की पुरानी टी-शर्ट्स पहन कर घूमान बंद करो। लेकिन मैंने उनसे कह दिया है कि मैं ऐसा नहीं कर सकती क्योंकि नई टी-शर्ट्स में वह सॉफ्टनेस नहीं मिलती।

एक चेंज यह आया है कि अब मैं पहले की तरह सड़कों पर खुली नहीं घूम पाती। ‘आशिकी 2’ का यह असर है कि लोग ‘आरोही...आरोही’ कह कर आवाज लगाने हैं। कई लोग मिलते हैं जो कहते हैं कि हम इस फिल्म को पचास बार सौ बार देख चुके हैं। यह बातें मुझे प्रेरित करती हैं और मैं अपनी ऐक्टिंग निखारने के लिए पहले ज्यादा कड़ी मेहनत करती हूं। मुझे लगता है कि मुझ पर जिम्मेदारी बढ़ गई है।
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‘आशिकी 2’ के बाद आपके पास ऑफर्स का भी ढेर लगा होगा?

बिल्कुल। कई इंट्रेस्टिंग ऑफर्स आए। ‘आशिकी 2’ के पहले ऐसा नहीं था। लेकिन मैं उस फिल्म के बाद भी मोहित सूरी (डायरेक्टर) के साथ ही काम कर रही हूं।

यह भी हुआ होगा कि जिन्हें आपने सफलता से पहले एप्रोच किया होगा और वे तब ना कह कर अब आए होंगे?

हां, ऐसा जरूर हुआ। यही नहीं, ऐसी भी फिल्में हैं जिनमें मुझसे केट कटवाया गया और फिर बाद में कहा कि हमें आप नहीं कोई और चाहिए। इमेजिन...! लेकिन अब उन्हें लग रहा होगा कि हमने गलत किया। परंतु सच कहूं कि मुझे तब भी अपने आप पर विश्वास था। उस समय मुझे बुरा लगा था, अब उन लोगों को बुरा लग रहा होगा। वैसे यहां लाइफ ऐसी ही है। हर शुक्रवार को समीकरण बदल जाते हैं। सब सफल लोगों के साथ भागते हैं, मैं भी सफल लोगों के साथ काम करना चाहूंगी।

कितना अलग हैं आशिकी से यह रोल?

आशिकी की आरोही से ‘एक विलेन’ की आयशा कितनी अलग है?

काफी अलग। मोहित ने मुझे यह रोल देते हुए कहा था कि कैमरे के सामने सिर्फ एंजॉय करो। अच्छे मूड में आओ। अच्छे मूड में कैमरे के सामने रहो और घर जाओ। कई बार तो उन्होंने मुझे कैमरे के सामने खुला छोड़ दिया। हालांकि इस फिल्म में मेरे हिस्से इतने सारे डायलॉग थे कि उन्हें याद करके बोलना बहुत कठिन था। मुझे लगता है कि आयशा को लोग आसानी नहीं भुला पाएंगे।

फिल्म में क्या रोल है आपका?

मूल रूप से यह फिल्म आयशा और गुरु (सिद्धार्थ) तथा रितेश और आमना शरीफ की लवस्टोरी है। जो इंटरलिंक हो जाती है। इस फिल्म को आप ‘स्क्वायर लवस्टोरी’ कह सकते हैं।

यह शायद पहली बार है कि पर्दे पर हीरोइन विलेन को बड़े प्यार से ‘ऐ विलेन’ कह कर पुकारती है?

असल में आयशा हमेशा बहुत खुश रहती है और सदा गुस्सा रहने वाले गुरु को चिढ़ाने के लिए उसे पुकारती है, ‘ऐ विलन...’।

‘तीन पत्ती’ में बड़े ऐक्टर्स के साथ आपको ब्रेक मिला। लेकिन फिल्म नहीं चली। उस शुरुआत को अब कैसे देखती हैं?

कई लोगों ने मुझसे कहा कि काश ‘आशिकी 2’ तुम्हारी डेब्यू फिल्म होती। लेकिन मुझे लगता है कि वह इसलिए ऐसा कहते हैं क्योंकि वह सफल थी। ‘तीन पत्ती’ और ‘लव का द एंड’ भले ही नहीं चली, लेकिन उन फिल्मों से बहुत कुछ सीखा। ‘तीन पत्ती’ में मैं नई थी। मैंने लीना यादव (डायरेक्टर) पर भरोसा किया था। मेरा उस कहानी में, मेरे किरदार में भरोसा था। मेरे लिए इतना बड़ा मौका था कि मैं अमिताभ बच्चन के साथ काम कर रही थी। सफलता और नाकामी दोनों जिंदगी के हिस्से हैं। जितना मैं कामयाबी को अपना मानती हूं, उतना ही नजदीक नाकामी को भी रखती हूं। शायद मैं नाकामी को ज्यादा मानती हूं क्योंकि अगर वह अनुभव जीवन में न होता तो शायद मैं ‘आशिकी 2’ नहीं करती।

विलेन ने बहुत कुछ सिखाया

आपके लिए विलेन क्या है? किरदार में ऐसी क्या बातें होती हैं जिनके हिसाब से कोई विलेन हो जाता है?

मुझे लगता है कि हर व्यक्ति के अंदर एक विलेन होता है। कभी परिस्थितियां विलेन बनाती हैं तो कभी मजबूरियां विलेन बना देती हैं। कभ कभी लोग मस्ती में विलन बन जाते हैं। यह हमारे हाथ में है कि अंदर जो विलेन है उसे कितना काबू में रखते हैं और कितनी आजादी देते हैं।

आपके पिता (शक्ति कपूर) पर्दे के बड़े विलेन रहे हैं। आपने बचपन से उन्हें ये रोल करते देखा। क्या कभी बुरा लगा?

कभी नहीं, मुझे शुरू से पता था कि वह फिल्मों में हैं। लोगों के एंटरटेनमेंट के लिए वे ऐसे रोल करते हैं। उल्टा, जब वो हीरो को पीटते थे तो मैं उन्हें चीयर करती थी। गो पापा... मारो इनको...। लेकिन जब हीरो के हाथों उन्हें पिटता देखती थी तो बहुत बुरा लगता था। फिर हीरो की जीत होती थी तो बहुत बुरा लगता था। मैं पूछती थी कि पापा आप क्यों नहीं जीते?

कभी उनसे नहीं कहा कि आप हीरो क्यों नहीं बनते?

कभी नहीं। वह मुझे समझाते थे कि विलेन का रोल करते हैं, इसीलिए हारते हैं। लोगों को सस्पेंस और डर में रखना, उन्हें हमेशा एक्साइटिंग लगा।

पिता के समकालीन और कौन से विलेन आपको पसंद थे?

गुलशन ग्रोवर, अमरीश पुरी, सदाशिव अमरापुरकर।
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आलिया के साथ कोई टकराव नहीं

‘एक विलेन’ के बाद आप किन फिल्मों में आएंगी?

शाहिद कपूर के अपोजिट विशाल भारद्वाज की फिल्म है ‘हैदर’। यह अक्तूबर में रिलीज होगी। इन दिनों खुद को डांस मूव्ही ‘एबीसीडी 2’ के लिए तैयार कर रही हूं। इसमें वरुण धवन हैं। इसकी शूटिंग जुलाई में शुरू होगी। यूं तो मैं दुबली-पतली हूं लेकिन डांसर का लुक लाने के लिए खूब एक्सरसाइज कर रही हूं। फिर दो-तीन घंटे डांस की रिहर्सल भी चलती है। जो जुलाई से पांच-छह घंटे की हो जाएगी।

आलिया भट्ट के साथ आपकी प्रतिद्वंद्विता की काफी चर्चा है।

अगर ऐसा है तो अच्छा है। हम दोनों ही बहुत मेहनत करेंगी। लोग मुझे और उन्हें अलग-अलग कारणों से पसंद करते हैं। मैंने उनकी ‘हाइवे’ और ‘2 स्टेट्स’ की तरीफ सुनी है, परंतु देख नहीं सकी। परंतु मौका लगने पर जरूर देखूंगी।

क्या मौका मिला तो साथ काम करेंगी?

क्या पता कभी सचमुच ऐसा हो! यह स्क्रिप्ट पर निर्भर करेगा कि वह कितनी अच्छी है।
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