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सीक्वल फिल्म नहीं है 'सत्या 2': रामगोपाल वर्मा

Thu, 17 Oct 2013 11:01 AM IST
हरि मृदुल/ अमर उजाला, मुंबई
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रामगोपाल वर्मा एक और अंडरवर्ल्ड फिल्म के साथ हाजिर होने जा रहे हैं। 'सत्या 2' नाम की इस फिल्म का उनकी लगभग अठारह साल पहले रिलीज हुई चर्चित फिल्म 'सत्या' से कोई संबंध नहीं है।
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रामू का साफ कहना है कि यह सीक्वल फिल्म कतई नहीं है। यह अंडरवर्ल्ड फिल्म जरूर है, लेकिन इसमें एकदम अलग कहानी है। रामगोपाल वर्मा से एक विशेष बातचीत।

'सत्या 2' एक अंडरवर्ल्ड फिल्म है, लेकिन आपका दावा है कि यह चर्चित फिल्म सत्या का सीक्वल नहीं है?
जो सच है, वही कहा है। अगर यह सीक्वल होती, तो भला मैं क्यों नहीं बताता। मेरा क्या नुकसान था। वैसे भी इधर तो कई सीक्वल फिल्में हिट हुई हैं। निश्चित रूप से 'सत्या 2' की कहानी का आधार अंडरवर्ल्ड है, लेकिन इसमें एक अलग ही सिचुएशन है।

'सत्या 2' और 'सत्या' में क्या अंतर है?
'सत्या 2' की कहानी पूरी तरह काल्पनिक है, जब कि सत्या की कहानी काफी हद तक रियलिस्टिक थी। हम यह कहना चाह रहे हैं कि अंडरवर्ल्ड खत्म नहीं हुआ है, उसका स्वरूप बदल गया है। 'सत्या 2' का हीरो किसी परिस्थितिवश अंडरवर्ल्ड डॉन नहीं बना है, बल्कि उसने खुद यह राह चुनी है। वह इसे एक बिजनेस की तरह ले रहा है। वह खुद का अंडरवर्ल्ड शुरू करना चाह रहा है।
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तो क्या 'सत्या 2' के स्क्रीन प्ले के लिए आपको ज्यादा जिद्दोजहद नहीं करनी पड़ी। सब कुछ कल्पना के सहारे ही हो गया?
किसी फिल्म की कहानी के काल्पनिक होने का मतलब यह थोड़े ही होता है कि कुछ भी हांक दें। सत्या 2 के लिए एक बार फिर मैंने अपने पुलिस ऑफिसर दोस्तों की मदद ली है। इस बार भी मेरी एप्रोच रियलिस्टिक ही है।

आपने घोषणा कर दी है कि सत्या 2 के बाद अब आप अंडरवर्ल्ड फिल्में नहीं करेंगे?
हां, अब इस तरह की फिल्मों के लिए मेरे ज्ञान का भंडार खत्म हो चुका है। मैं अंडरवर्ल्ड से संबंधित सारी जानकारियां अपनी फिल्मों में उड़ेल चुका हूं। अब मेरे पास नया कुछ नहीं है।

आगे किस तरह की फिल्में बनाएंगे?
मैं अब लव स्टोरी फिल्म बनाऊंगा। एक फिल्म मार्शल आर्ट पर भी बनाने की सोच रहा हूं।

तो क्या अब आप करण जौहर टाइप फिल्में बनाना चाहते हैं?
जी नहीं, मैं उस तरह की फिल्में कभी नहीं बना सकता। मैं करण की तरह सोच ही नहीं सकता। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि उन फिल्मों का मेरे लिए कोई महत्व नहीं है। करण की फिल्में करोड़ों का कारोबार करती हैं। उनका एक बड़ा दर्शक वर्ग है, इसीलिए वे बॉक्स ऑफिस पर सफल हो जाती हैं।

आपकी फिल्मों की एप्रोच रियलिस्टिक होती है, लेकिन आपने 'द लंच बॉक्स' या 'द गुड रोड' जैसी सार्थक फिल्में बनाने की कोशिश कभी नहीं की?
मुझे सिंपल कहानियां प्रभावित नहीं करती हैं। मुझे चौंकाने वाले टेढ़े मेढ़े किरदार ही आकर्षित करते हैं। यह मेरी सीमा भी हो सकती है। मैंने हमेशा अपने मन की फिल्में बनाई हैं।
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आज आप अपनी किन फिल्मों के लिए कह सकते हैं कि उनके निर्माण या निर्देशन का आपका डिसीजन पूरी तरह गलत था?
मैं दो फिल्मों 'आग' और 'डिपार्टमेंट' का नाम ले सकता हूं। मैंने ये दोनों फिल्में बनाकर गलती की।
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