काटूर्निस्ट असीम त्रिवेदी ने बिग बॉस के घर में जाकर खूब चर्चाएं बटोरी। बिग बॉस पर असीम त्रिवेदी को घर से बेघर करने का काफी दबाब भी बनाया गया। फिलहाल असीम त्रिवेदी बिग बॉस से बाहर आ गए हैं। बिग बॉस के घर में उनका एक्सपीरिएंस कैसा रहा आइए जानें उन्हीं की जुबानी।
आप सोशल एक्टिविस्ट हैं और आप आमजन में काफी पॉपुलर भी हैं, ऐसे में मनोरंजन बेस्ड बिग बॉस के शो में आने की जरूरत आपको क्यों पड़ी?
मुझे बताया गया था कि बिग बॉस के घर में जाकर आप अपनी बात रख सकते हैं, आप सोशल मैसेज दे सकते हैं। मुझे ये भी बताया गया कि कुछ और क्षेत्रों के भी एक्टिविस्ट आ रहे हैं, जो कि आए भी। सपना जी, सिद्दू जी, संपत जी। बाकी घरवालों का भी अलग ही मूड था, मुझे अच्छा लगा कि घरवाले भी सोशल इश्यूज को लेकर काफी अवेयर थे।
तो क्या आप अपने मकसद में कामयाब हुए?
हां, मैंने तमाम इश्यूज के बारे में काफी डिस्कशंस किए। बहुत बार हम लोगों के बीच डिबेट हुई, मैंने अपना मैसेज आमजन तक पहुंचाया। ये शो भी मेरे लिए एक मीडियम था जिसका मैंने इस्तेमाल किया। हां, ये मैं नहीं जानता कि क्या कुछ ऑन एयर हुआ है और क्या नहीं।
क्या आपको उम्मीद थी कि आप इस एंटरटेनमेंट शो के जरिए जो मैसेज देंगे लोग उसे पॉजिटिव ही लेंगे?
अगर मैसेज पॉजिटिव है तो उसे नेगेटिव तरीके से लेने का कोई तरीका ही नहीं है।
लेकिन आमतौर पर लोग बिग बॉस जैसे कंट्रोवर्शील शोज को सीरियसली नहीं लेते?
हां मैं मानता हूं कि ये मुश्किल होता है लेकिन घर में जो लड़ाई-झगड़े हो रहे थे उनसे मेरा कुछ लेना-देना नहीं था। मेरा आने का जो मकसद था उसे मैंने पूरा किया। मैंने वहां बैठकर घरवालों के साथ बहुत सी अच्छी बातें डिस्कस की। तमाम मुद्दों को लेकर लोगों की सोच को नेगेटिव से पॉजिटिव में बदलना जरूरी है। वैसे मुझे नहीं लगता कि मैंने बिग बॉस के घर में जाकर कोई गलती की है।
आपकी आगे की क्या प्लानिंग है, आप आगे क्या कुछ नया करेंगे?
हमारा जो एंटी करप्शन मूमेंट चल रहा है जिसके लिए जैसे पहले काम कर रहा था आगे भी उसी से जुड़ा रहूंगा। इसके अलावा हमारा एक पुराना विचार था स्कूल ऑफ एक्टिविजम खोलने का, जहां ऐसी जगह बनाई जाए जहां एक्टिविजम की ट्रेनिंग दी जाए। एक्टिविज्म के बहुत सारे टूल्स है जैसे आरटीआई। इन टूल्स का इस्तेमाल करते हुए कैसे आप एक्टिविज्म के रास्ते पर आगे बढ़ सकते हैं। कैसे आप समाज के लिए काम कर सकते हो। अभी भी ऐसा होता है लेकिन उनका ऑर्गनाइजेशंस का अपना अलग तरीका होता है। मेरी कोशिश रहेगी कि इस पैटर्न में कुछ बदलाव हो, कुछ नई चीजों को जोड़ा जाए। जिसमें लोगों का ज्यादा से ज्यादा इंटरस्ट जगे और लोगों की आदत में ये शुमार हो जाए।
आप बिग बॉस के घर में लगभग चार सप्ताह तक रहें, आपका एक्सपीरिएंस कैसा रहा घर के अंदर?
बहुत अच्छा रहा। बहुत से लोगों के बहुत सारे स्टाइल्स देखने को मिले। बातों और हंसी- मजाक के अलावा तीसरा कोई काम किया नहीं। कुछ भी ऐसा नहीं था कि जो बुरा हो, लेकिन एक समय के बाद ये लगने लगा था कि हम किसी कैद में है अब निकलकर कुछ काम करने चाहिए। काफी वक्त बीत चुका है।
घर के अंदर सपना ने आपका मेकओवर भी किया, आपको अपना बदला रूप कैसा लगा?
शुरू में तो शीशा देखने में बहुत अजीब लग रहा था लेकिन अब लगता है कि नया लुक इतना बुरा भी नहीं है। अब तो आदत पड़ गई है। सपना जी को भी करना था तो उन्होंने ऐसा किया क्योंकि ये टास्क का एक हिस्सा था, ऐसे में मैं उन्हें बहुत ज्यादा मना भी नहीं कर सकता था। लेकिन मैं खुश था कि 10-15 रूपए में बाल कटवाने वाले आदमी को सपना जी जैसी बड़ी हेयर स्टाइलिश से बाल कटवाने का मौका मिला।
बिग बॉस के घर में क्या सब कुछ नैचुरल होता जाता है या कुछ चीजें क्रिएट भी की जाती हैं?
यहां सब कुछ अपने आप ही होता है। ये बात अलग है कि यहां ऐसे मौके क्रिएट किए जाते हैं जिससे आप झगड़ा कर सको। ऐसा नहीं है कि आपको ऐसा करना ही पड़ेगा। सब ये कोशिश करते हैं कि वे नॉमिनेट ना हो, अच्छी इमेज बनाए रखें, नए लोगों के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानें और गेम को अच्छे से खेलें। कई बार वे अपने घरवालों से दूर रहकर अपसेट होकर भी झगड़ा कर बैठते हैं।
आपको क्या लगता है जानबूझकर ऐसे टास्क या सिचुएशन दी जाती हैं कि आपस में लड़ाई-झगड़ा हो?
हां, कभी-कभी ऐसा बिल्कुल होता है। और अच्छी बात भी है क्योंकि ये एक तरीके से आपके दिमाग का टेस्ट है कि आप किस सिचुएशन में कैसा रिएक्ट करते हैं। इसमें कोई बुराई नहीं है।
बिग बॉस के घर में आप फ्यूचर में किसके संपर्क में रहना पसंद करेंगे?
मुझे लगता है कि संपत जी, सपना जी, वृजेश भाई, निकेतन, सिद्दू जी। बाकी घरवालों से भी मेरी काफी अच्छी बॉन्डिंग बनी। डेलनाज जी, राजीव जी। मुझे सभी घरवालों में से हर किसी की कोई ना कोई खासियत जरूर पसंद आई। बहुत से लोगों से मेरे कुछ-कुछ बातों में विचार काफी मिलते थे। अगर इन लोगों के साथ मिलकर समाज का कोई काम कर पाएं तो काफी अच्छा होगा।
बिग बॉस के घर में ऐसा मानते हैं कि कंफर्ट जोन से निकलकर एकदम डिफरेंट सिचुएशंस होती है, ऐसे में क्या सर्वाइव करना वाकई मुश्किल होता है?
नहीं, ऐसा बिल्कुल नहीं है। मेरे साथ भी होता है कि मैं घर के कामों में बाहर रहने के कारण हाथ नहीं बंटा पाता हूं। लक्जरी-वक्जरी बजट के नाम पर झगड़ा नहीं होता, झगड़ा होता है जब लोग छोटी-छोटी बात को इश्यू बना लेते हैं, लोगों की भावनाएं आहत होने लगती हैं।
आप किसे चाहेंगे बिग बॉस का विनर बनता देख?
मुझे लगता है कि संपत जी जीतेंगी तो वो पैसे समाज के काम में लगेंगे। इसीलिए संपत जी जीते तो अच्छा होगा।
और बिग बॉस के घर में आपको सबसे शातिर खिलाड़ी कौन लगता है?
मुझे नहीं लगता कि कोई गेम खेल रहा है। सभी एन्जॉय कर रहे हैं। बाकी जिसे जीतना होगा वो तो जीत ही जाएगा।