बॉलीवुड में कई ऐसे फिल्मकार हुए हैं जिन्होंने लीक से हटकर फिल्में बनाकर बॉलीवुड में अपनी अलग पहचान बनाई। लेकिन इसके अलावा कुछ ऐसे फिल्मकार भी हुए हैं जिन्होंने हमेशा से समाज की बंदिशों को तोड़ समाज की सोच बदलने में मदद की। ऐसे ही फिल्मकार है, महेश भट्ट।
बेहद खुली मानसिकता वाले महेश भट्ट ने एक ऐसा तबका तैयार किया जो उनकी सोच का ना सिर्फ समर्थन करता है बल्कि उनको सपोर्ट भी करता है, जिसके कारण महेश भट्ट संवदेशनशील फिल्मों के साथ ही बोल्ड फिल्में बनाने में कामयाब हुए।
आज महेश भट्ट का जन्मदिन है। 20 सितंबर, 1948 को जन्में महेश भट्ट अपने जीवन के 64 साल पूरे कर चुके हैं। आइए जानें महेश भट्ट के जन्मदिन पर उनके जीवन की कुछ खट्टी-मीठी बातों के बारे में।
कुछ नामी फिल्में
महेश भट्ट ने 'अर्थ', 'सारांश', 'जन्म', 'नाम', 'काश', 'डैडी', 'तमन्ना' और 'जख्म' जैसी संवेदनशील फिल्मों का निर्माण कर बॉलीवुड के दिग्गजों में अपना नाम दर्ज कराया। वहीं महेश ने राज, जिस्म, पाप, मर्डर, रोग,
जहर, मर्डर 2, जिस्म 2 जैसी फिल्में बनाकर अपना नाम बॉलीवुड के बोल्ड विषयों पर फिल्में बनाने वाले डायरेक्टर में शामिल कर लिया। महेश भट्ट ने ना सिर्फ फिल्में बनाई बल्कि उन्होंने अपनी कई फिल्मों को लिखा भी। एक निर्माता की भूमिका में भी वे पीछे नहीं रहे।
महेश भट्ट की लाइफ
महेश भट्ट के पिता नानाभाई भट्ट ने लव मैरिज की थी। इनके पिता जहां हिंदू धर्म से संबंधित एक मशहूर फिल्म निर्माता थे वही इनकी मां शिया मुसलमान। महेश के पिता नानाभाई भट्ट ने महेश की मां से दूसरी शादी की थी इसलिए महेश बचपन से अपने पिता से दूर ही रहे। महेश शुरू से ही प्रतिभा के धनी है, वे ना सिर्फ एक होनहार छात्र थे बल्कि अपनी मां के कामों में भी इन्होंने शुरू से मदद की। महेश जब 20 साल के थे तभी से ही इन्होंने विज्ञापनों के लिए लेखन शुरू कर दिया था। ऐसा माना जाता है कि महेश के व्यक्तित्व पर ओशो का काफी असर है, क्योंकि महेश ओशो रजनीश के अनुयायी हैं।
फिल्मी कॅरियर
महेश ने अपने फिल्मी कॅरियर की शुरूआत निर्देशक राज खोसला के साथ बतौर सहायक निर्देशक के रूप में की। महेश ने पहली बार 1970 में आई फिल्म 'संकट' का निर्देशन कर अपने कॅरियर को दिशा दी। हालांकि नए निर्देशक होने के कारण्ा शुरूआत में इन्हें अफलता ही मिली लेकिन 1979 में 'लहू के दो रंग' फिल्म ने इन्हें सफलता दिलाई, इससे बाद तो इनके कदम रूके नहीं। इन्होंने अपने ही जीवन से प्रेरित हो 'अर्थ' फिल्म का निर्माण किया। इस फिल्म की सफलता ने ये साबित कर दिया कि महेश भट्ट फिल्मों को हिट कराने का दम रखते है।
निजी जिंदगी रही चर्चा में
फिल्म निर्देशक बनने के बाद महेश का निजी जीवन भी खूब चर्चा में रहा। 1970 में इन्होंने किरण भट्ट से शादी की, जिससे इन्हें पूजा भट्ट और राहुल भट्ट दो बच्चे हैं। लेकिन परबीन बॉबी और महेश के अफेयर के चर्चों के कारण महेश और किरण अलग हो गए। ऐसा माना भी जाता है कि 'आशिकी' महेश ने अपने और किरण के संबंधों को लेकर बनाई थी। इसके बाद महेश ने अभिनेत्री सोनी राजदान से दूसरी शादी की।
महेश भट्ट ने हर तरह का समय देखा। इनके जीवन में एक ऐसा दौर भी आया जब इनकी फिल्मों से ज्यादा इनकी पर्सनल लाइफ चर्चा में रही। चर्चाओं में कभी इनके जायज-नाजायज होने पर सवाल उठें तो कई बार इनके विवाह के बाद भी परवीन बॉबी से संबंधों की चर्चाएं गर्म रही। ऐसा माना जाता है कि,लोगों की जुबां बंद करने और सबको सच्चाई से रूबरू कराने के लिए महेश ने 1985 में 'जनम' फिल्म में अपनी पर्सनल लाइफ को परदे पर उतारने की कोशिश की, जिसकी बेहद तारीफ भी हुई। महेश ने अपनी निजी जिंदगी को परदे पर उतारने का सिलसिला यहीं तक नहीं रोका बल्कि इसी दौर में इन्होंने 'आशिकी' और 'नाम' जैसी फिल्मों में भी अपनी जिंदगी के कुछ पन्नों को उजागर किया।
महेश ने 1987 में अपने प्रोडक्शन हाउस 'विशेष फिल्म्स' का निर्माण किया। इन्होंने अपने प्रोडक्शन हाउस में कई सफल फिल्में देकर अपना नाम बॉलीवुड के मशहूर डायरेक्टर्स में दर्ज करा लिया। इनके प्रोडक्शन हाउस में 'हम हैं राही प्यार के', 'दुश्मन', 'गैंगेस्टर' और वो लम्हे से लेकर 'नाम', 'काश', 'डैडी', 'तमन्ना', 'सड़क', जैसी सफल फिल्मों का निर्माण हुआ है। आज आलम ये है कि हर अभिनेत्री इनके कैंप से जुड़ने का ख्वाब देखती है।
महेश के पुरस्कार
महेश भट्ट को उनकी फिल्मों के लिए काफी पुरस्कार दिए गए। सबसे पहले उन्हें 1984 में फिल्म 'अर्थ' के लिए फिल्मफेयर बेस्ट स्क्रीन प्ले अवार्ड दिया गया। इसके बाद 1985 में फिल्म 'सारांश' को बेस्ट स्टोरी अवार्ड दिया गया। 1994 में फिल्म 'हम हैं राही प्यार के' लिए महेश को नेशनल फिल्म अवार्ड दिया गया। 1999 में इनकी फिल्म 'जख्म' को फिल्मफेयर बेस्ट स्टोरी अवार्ड दिया गया।
महेश भट्ट ने सिर्फ फिल्मों में ही अपना कमाल नहीं दिखाया बल्कि इन्होंने सामाजिक मुद्दों में भी अपनी राय जाहिर करने में कोई कोताही नहीं बरती।