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घर से पैसे चोरी कर बनाया था बैंड, आज सूफी संगीत से करते हैं दिलों पर राज

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कहते हैं संगीत पूरी दुनिया को जोड़ने वाली जबान होती है। संगीत ऐसा हो जो देश, धर्म, जात को परे रख कर इंसान को इंसान से जोड़े। ऐसे ही संगीत की एक धारा है सूफी। यानी खुदा से बात करते वाला संगीत, जिसमें हर लफ्ज ईश्वर की ओर इशारा करता है।
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ऐसे ही संगीत से टीम अमर उजाला का आमना सामना हुआ जिम कॉर्बेट रामनगर में, जहां एक कार्यक्रम में पहुंचे म्यूजिकल बैंड जुगनी ने अपने सुरों से शाम को सूफियाना कर दिया। आजकल जहां बैंड के नाम पर

ज्यादातर लोग रॉक म्यूजिक और पश्चिमी सभ्यता से भरे गाने पसंद करते हैं वहां जुगनी ने सूफी संगीत को अपना लक्ष्य बना रखा है।

ऐसा क्या था जिसकी वजह से जुगनी ने अपने आपको सूफी संगीत से जोड़ा? कैसा रहा उनका अब तक का सफ़र और आगे क्या हैं उनके लक्ष्य? इन सवालों पर हमने उनसे एक लंबी बातचीत की।
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घरवालों के तानों से पीछे नहीं किए कदम

दिल्ली के इस जुगनी बैंड में कुल सात लोग हैं जो अलग अलग वाद्यों के विशेषज्ञ हैं।

बैंड के लीड गिटारिस्ट हैं सागर चावला। वे सागर ही हैं जो अपने बैंड के हर गाने को गिटार की धुन से संवार देते हैं। सागर से बातचीत में पता चला कि इस बैंड को शुरू हुए दो साल से ज्यादा भी नहूीं हुए हैं और अब तक ये लोग बैंगलुरू, जयपुर, गोवा जैसे 500 से ज्यादा शहरों में जा कर परफॉर्म कर चुके हैं।

सागर बताते हैं कि उनका संगीत की तरफ हमेशा से ही रुझान था लेकिन घरवालों की तरफ से पढ़ाई को लेकर जोर रहता है। सागर चाहते थे कि संगीत में ही अपना करियर बनाएं लेकिन घरवालों ने ताने मार मार कर नौकरी ही करवाई।

सागर के घर वाले कहते थे कि टुनटुना लेकर कहां जाओगे, क्या भविष्य बनाओगे लेकिन सागर ने हौसला नहीं छोड़ा। सागर ने जगह जगह प्रतियोगिताओं में भाग लिया और अपने हुनर से जीत हासिल की। आखिर वह दिन आया जब उन्होंने अपने दम पर एक बैंड खड़ा किया।

सागर से जब पूछा गया कि बैंड को चलाने के लिए पैसा कहां से आया तो बेझिझक सागर ने वो बात कह दी जिसे लोग किसी के सामने कहना नहीं चाहते।

घर से पैसे चुरा कर जुटाया था बैंड का सामान

पढ़ाई में कमजोर रहे सागर ने 18 साल से भी कम उम्र में बीपीओ की नौकरी की लेकिन जब मन नहीं माना तो छोड़ छाड़ कर पूरी तरह संगीत की तरफ बढ़ गए।

सागर कहते हैं कि एक वक्त आता है जब हर बच्चा किसी न किसी वजह से अपने ही घर में चोरी करता है। सागर के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ।

ऐसा नहीं है कि सागर ने लाखों करोड़ों की चोरी की लेकिन बैंड चलाने के लिए उन्होंने अपने घर से कुछ रुपए उठाए। उसी के जरिए, बैंड की जरूरत की चीजें खरीदीं। आज सागर एक नामी बैंड के गिटारिस्ट हैं और अब घरवाले भी उनका साथ देते हैं। लेकिन अकेले सागर के दम पर जुगनी नहीं चल रहा, इसके एक और खास सदस्य हैं।

दुश्मन से दोस्त बन कर शुरू किया जुगनी बैंड

जुगनी के लीड वोकलिस्ट यानी गायक हैं रोहित भट्ट। रोहित अपनी आवाज से जो सूफियाना माहौल बनाते हैं, उसमें खो जाने को जी चाहता है। रोहित और सागर की मुलाकात भी काफी दिलचस्प तरीके से हुई।

कुछ साल पहले तक रोहित और सागर एक दूसरे के प्रतिद्वंदी हुआ करते थे। दोनों अपने हुनर के माहिर थे। उनकी मुलाकात अलग अलग प्रतियोगिताओं में होती रहती थी क्योंकि उस वक्त दोनों अगल अलग बैंड का हिस्सा थे। लेकिन फिर इनमें दोस्ती हुई और दोनों ने मिलकर बैंड बनाने की सोची।

इसमें इनका साथ दिया तीसरे साथी मोहित ने जो रिदम गिटारिस्ट हैं। 2008 में अलग हुए रोहित, मोहित और सागर फिर से एक हुए और यह बैंड शुरू हुआ।

जहां सागर को संगीत में थोड़ी मुश्किलें झेलनी पड़ीं वहीं रोहित ने बकायदा शास्त्रीय संगीत की ट्रेनिंग ली है। मशहूर सूफी गायक बंधु वडाली ब्रदर्स से रोहित ने संगीत सीखा है। वडाली ब्रदर्स वही हैं जिन्होंने तनु वेड्स मनु और मौसम जैसी फिल्मों के लिए गाने भी गाए हैं।

संगीत के दिग्गजों से ले चुके हैं ट्रेनिंग

रोहित पिछले 6-7 सालों से सूफी संगीत में रमे हुए हैं। पटियाला घराने से संगीत सीखने वाले रोहित नुसरत फतेह अली खान को अपनी प्ररेणा मानते हैं जो उनके गानों में भी साफ नजर आता है।

दिग्गजों के साए में रह चुके रोहित कहते हैं कि गुरू के नाम का कभी फायदा नहीं उठाना चाहिए। इसीलिए वे खुद के बल पर संगीत की दुनिया में नाम कमाना चाहते हैं न कि इन नामी हस्तियों के नाम पर।

बात सूफी संगीत की है तो इसमें चार चांद लगाने वाला कोई तबला वादक भी होना जरूरी है। ऐसे में इस बैंड का तीसरा सदस्य भी अपने हुनर में पीछे नहीं है।

'संगीत है तो भूखा नहीं मरूंगा'

बैंड में एक और रोहित हैं जो कि तबला बजाते हैं। ये हैं रोहित चावला जो चार महीनों पहले ही इसका हिस्सा बने हैं। रोहित इन गानों पर गजब की ताल देते हैं और समां बांध देते हैं। दिल्ली के ही रहने वाले रोहित बताते हैं कि उनके घरवालों ने संगीत को लेकर कभी रोड़े नहीं अटकाए।

रोहित के पापा ने खुद उन्हें संगीत सीखने को प्रेरित किया। उन्हें शिवाजी कॉलेज से संगीत में ही स्नातक भी किया है। तबले की ट्रेनिंग उन्हें पंडित सुभाष नर्वाण जी से मिली है और वे पिछले 10 साल से तबला बजा रहे हैं।।

रोहित कहते हैं कि जुगनी में आने के बाद से उनकी जिंदगी मे भी बहुत बदलाव आए हैं। बैंड के साथ जगह जगह जाकर वे भी परफॉर्म करते हैं।

उनसे पूछा गया कि क्या संगीत के बल पर ही वे जिदंगी काट लेंगे या कभी नौकरी की भी जरूरत पड़ेगी तो रोहित ने खुले दिल से जवाब दिया, ''इतना यकीन है कि भूखा नहीं मरूंगा।''
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सूफी को और आगे ले जाना चाहता है जुगनी

जुगनी बैंड कुछ वक्त में ही काफी चर्चित हो चुका है। इनके अलावा बैंड में विभोर भी हैं जो बांसुरी बजाते हैं। बेस गिटार प्रमोद संभालते हैं और ड्रम्स तड़ित बजाते हैं।

जनवरी 2016 में ये खुद के बनाए हुए गई गानों का एक एलबम भी लाने वाले हैं जिसे टी-सीरीज बाजार में लेकर आएगा।

भारत के नामी म्यूजिकल शो कोक स्टूडियो तक पुहंचने की इच्छा रखने वाला जुगनी बैंड अब पीछे मुड़ कर नहीं देखना चाहता और आने वाले वक्त में सूफी संगीत को और आगे ले जाने का इरादा रखता है।
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