किसी फिल्म में रणवीर सिंह, दीपिका पादुकोण और प्रियंका चोपड़ा जैसे सितारे हों तो क्या वह रीजनल हो सकती है? यह सवाल आपको चौंका सकता है, मगर इंडस्ट्री के लोगों के बीच यह चर्चा होने लगी है कि पेशवा बाजीराव और उनकी दूसरी पत्नी मस्तानी की प्रेम कहानी कहीं रीजनल साबित होकर न रह जाए।
जब से ट्रेलर रिलीज हुआ है तब से फिल्म चर्चा में है। इसके बावजूद पेशवा और मस्तानी की प्रेम कहानी के लिए बड़ा सवाल है कि यह कहीं सिर्फ महाराष्ट्र में ही तो नहीं सिमट जाएगी?
जानकारों का कहना है कि अपने बड़े बजट के बावजूद भंसाली की फिल्म का मूल स्वर किसी क्षेत्रीय सिनेमा की तरह है। ऐक्टरों ने इसमें मराठी लहजे वाली हिंदी बोली है और गैर-मराठी क्षेत्रों के दर्शकों को फिल्म देखते हुए लगातार एहसास बना रहेगा कि वह एक खास इलाके और खास वर्ग का सिनेमा देख रहे हैं।
जानकारों के अनुसार दर्शकों को रीजनल सिनेमा के एहसास के बीच भंसाली की फिल्म चले, इसके लिए जरूरी होगा कि लोग इसके बारे सकारात्मक बातें करें। अतः फिल्म की रिलीज के बाद भी इसका प्रमोशन जरूरी होगा।
यह भी आवश्यक होगा कि शाहरुख की फिल्म पर भंसाली का सिनेमा बीस साबित हो। क्या वाकई ऐसा हो सकेगा? इस सवाल का जवाब 18 दिसंबर को ही मिलेगा जब ये फिल्में सिनेमाघरों में लगेंगी।
बाजीराव मस्तानी के लिए दर्शकों को जुटा करना आसान नहीं होगा
ट्रेड के कई जानकारों का मानना है कि बाजीराव मस्तानी की प्रेम कहानी के लिए महाराष्ट्र से बाहर दर्शकों को जुटा करना आसान नहीं होगा। बाहर दर्शकों को आकर्षित करने के लिए निर्माता-निर्देशक और सितारों को आने वाले दिनों में कड़ी मेहनत करनी होगी।
जबकि रिलीज में दस दिन बमुश्किल बचे हैं। उधर, रणवीर सिंह की पिछली तीन फिल्में गुंडे, किल दिल और दिल धड़कने दो कतार से फ्लॉप रही हैं और इस फिल्म से जुड़े सूत्र पहले ही कह चुके हैं कि यहां बाजीराव सबसे कमजोर कड़ी हैं।
उल्लेखनीय है कि शाहरुख की फिल्म ने ट्रेलर और गाना लॉन्च करने के साथ शुरुआती बढ़त बना ली थी परंतु निर्देशक संजय लीला भंसाली की फिल्म के ट्रेलर और गाने जब सामने आए तो हर कोई चौंक गया। इसके बाद सोशल मीडिया में सर्वे होने लगे कि दर्शक कौन सी फिल्म देखेंगे।
किसी ने शाहरुख की फिल्म वो वोट दिया तो किसी ने भंसाली को। परंतु इधर भंसाली की फिल्म का प्रमोशन किसी रीजनल फिल्म की तरह सिमट रहा है, जबकि शाहरुख अपनी फिल्म का प्रमोशन ग्लोबल बना रहे हैं।
महाराष्ट्र से बाहर बाजीराव और मस्तानी के प्रेम को लेकर अधिक उत्सुकता नहीं दिख रही है। वैसे फिल्म के सामने मुश्किल तो महाराष्ट्र में भी है कि क्योंकि पेशवाओं के वंशज यह कहते हुए विरोध में उतर आए हैं कि भंसाली तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर फिल्म की आड़ में नया इतिहास गढ़ रहे हैं। उल्लेखनीय है कि ऐसे विवाद फिल्म का नुकसान ही करते हैं।