हिंदी सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन आज जिस मुकाम पर हैं। अगले कई वर्षों तक शायद ही इस मुकाम पर कोई और पहुंचे। 70 साल की उम्र में भी अमिताभ निरंतर काम कर रहे हैं। अभिनय, एंकरिंग, विज्ञापन हर जगह वे व्यस्त नजर आते हैं। क्यों हैं आज भी वे सक्रिय और क्यों लगातार काम करते रहना चाहते हैं अमिताभ। अपने 70वें जन्मदिन के अवसर पर उन्होंने खुद शेयर की कुछ बातें।
अमिताभ, आपने ने 43 सालों तक हिंदी सिनेमा पर राज किया है। आगे भी यह सिलसिला जारी है। लगातार काम करते रहने की कोई खास वजह? क्या आराम आपको पसंद नहीं?
आराम तो जीवन का हिस्सा है। ऐसा तो है नहीं कि मैं आराम ही नहीं करता। सोता ही नहीं। जरूरत पड़ने पर छुट्टियां भी लेता रहता हूं। लेकिन काम करते रहना मुझे पसंद है। मैं खाली नहीं बैठ सकता। और जहां तक बात है फिल्मों की तो मैं समझता हूं कि मुझे अच्छे लोगों का साथ मिलता रहा तो बस इसकी वजह से मुझे अच्छी फिल्में मिलीं। राज तो मैंने नहीं किया है। मेरी जिंदगी में भी उतार-चढ़ाव आये हैं। फिर इसे एकाधिकार कैसे समझ लूं।
कभी ऐसी इच्छा नहीं होती कि काश, बीता हुआ वक्त वापस लौट जाता तो कुछ चीजें सुधार देता। या फिर कुछ ऐसे पल जिन्हें आज भी आप दोबारा जीना चाहते हों?
देखिए, मैं मानता हूं कि हर चीज का अपना समय होता है। हमने अपना समय जिया। और उस वक्त जो चीजें सामने आती रही। करते गये। अब यहां आकर खोने का अफसोस क्यों करें। ईश्वर ने हमें हिम्मत दी। काम करने की समझ दी तो हम करते आ रहा हैं। दूसरी बात है कि सुधारना और नहीं सुधारना हमारे हाथों में नहीं होता। दरअसल, मैं मानता हूं कि व्यक्ति योजना बना भी ले तो भी होता वही है जो उस वक्त होना होता है तो जैसी-जैसी परिस्थिति हमारे सामने आयी। हम करते गये।
आज हर कोई अमिताभ बच्चन बनना चाहता है? आप क्या कहना चाहेंगे इस पर?
नहीं, मैं खुद को महान व्यक्तित्व नहीं मानता। मीडिया और लोगों से जब यह सुनता हूं कि वे मुझे मेरे कद से भी ऊंचा स्थान दे दे रहे हैं तो मुझे आश्चर्य होता है और कभी कभी मैं खुद से पूछता हूं कि मैंने कुछ महान तो नहीं किया। अपने परिवार और अपने बच्चों की नजरों में सम्मान मिल जाता है। यही बहुत है। बाकी तो लोगों ने जो प्यार बरसाया है। वही बहुत कुछ है।
आप तो अब दादाजी की भी भूमिका निभा रहे हैं तो परिवार में एक और पद ऊपर आकर किस तरह का अनुभव महसूस कर रहे हैं आप या किस तरह की जिम्मेदारियां बढ़ी हैं?
जी आपने बिल्कुल सही कहा कि आराध्या के आने के बाद अब जिम्मेदारियां बढ़ी हैं। अब मैं खुद को बुजुर्ग समझने लगा हूं। महसूस कर सकता हूं कि बाबूजी को कितनी खुशी मिली होगी जब अभिषेक का जन्म हुआ होगा। दरअसल, आपके पुत्र के पुत्र-पुत्री आपको और अजीज हो जाते हैं। ऐसे में मेरी जिम्मेदारियां यही बढ़ी है कि अब अभिषेक-ऐश के साथ साथ मुझे आराध्या का भी खास ख्याल रखना है। अभी मैं जब आराध्या को देखता हूं तो मुझे मेरा बचपन और अभि का बचपन दोनों याद आता है। अभी घर पर रहते हुए सबके अधिक मुझे आराध्या के साथ रहना ही पसंद है।
आप इस उम्र में भी जिम जाते हैं?
हां तो इसमें बुराई क्या है। हम जिस प्रोफेशन में हैं। वहां फिटनेस जरूरी है। मैं अपनी उम्र के अनुसार ही एक्सरसाइज करता हूं। (हंसते हुए) बॉडी शॉडी तो बनानी नहीं है। हमारे जमाने में तो मैं फिटनेस वगैरह पर खास ध्यान देता नहीं था। लेकिन आज जीवनशैली बदल चुकी है। तो जरूरत तो महसूस होती है।
सुना है शुरुआती दौर में आपको डांस करने में काफी तकलीफ होती थी?
जी बिल्कुल शुरुआत में मैं जब मुंबई आया तो मैं कई स्टूडियो में जाकर देखता था। मेरे सीनियर एक्टर किस तरह डांस की प्रैक्टीस किया करते थे। और मुझे देख कर बहुत डर लगता था। मुझे याद है। मुझे बल्कि एक फिल्म शायद 'परवाना' रही होगी- उससे इसलिए हटाया जा रहा था कि मैं अच्छा डांस नहीं कर पा रहा था। उस वक्त मास्टरजी हुआ करते थे। खूब डांट पड़ी थी। फिर जाकर मैंने तय किया कि भविष्य में एक्टिंग के साथ डांसिंग भी सीखूंगा। वैसे मैं खुद को आज भी अच्छा डांसर नहीं मानता।
अमिताभ को अमिताभ बच्चन बनाने में कई लोगों का योगदान रहा होगा। आपकी नजर में वे कौन-कौन से लोग हैं?
सबसे पहले तो मेरे बाबूजी क्योंकि उन्होंने ही मुझे बहुत कुछ सिखाया जिंदगी में। उन्होंने ही मुझे अच्छी परवरिश दी। फिर जया ने, हमेशा मेरा साथ दिया। अपने सभी निर्देशकों का मैं शुक्रगुजार हूं, जिनके साथ मैंने काम किया। ऋषिकेश दा, मुकूल आनंद, मनमोहन देसाई, प्रकाश मेहरा व वे सभी निर्देशक जिनके साथ मैंने काम किया।
आपने कई बार असफलताओं को भी झेला? क्या आप मानते हैं कि असफलताओं की वजह से ही आज आपने यह मुकाम हासिल किया?
बिल्कुल। मेरी समझ है कि असफलताएं बेहद जरूरी हैं। जया मुझसे हमेशा कहा करती थीं कि अच्छा हुआ शुरुआती दौर में मैं असफल रहा। वरना, शायद मैंने खुद को जितना मांझा। उतना मांझ नहीं पाता। जितना सीखा। अलग अलग लोगों के साथ जुड़ने का मौका मिला। वह नहीं हो पाता। फिर शायद जिंदगी का अप्रोच अलग होता। बस, भाग्यशाली इस लिहाज से रहा हूं कि मुझे मेरे अपनों का साथ मिला। बाबूजी की रचनाएं हमेशा मेरी प्रेरणा बनीं।