एआर रहमान ने पाकिस्तान कार्यक्रम करने की ख्वाहिश जताई है। इस बात से विवाद भी भड़क सकता है।
"ख्वाजा मेरे ख्वाजा" हो या फिर "अर्ज़ियाँ सारी" एआर रहमान के संगीत में सूफ़ी संगीत की एक बड़ी छाप नज़र आ
ही जाती है।
रहमान कहते हैं कि उन्होंने पहली बार अगर कोई सूफ़ी संगीत सुना तो वो पाकिस्तानी सूफ़ी गायक नुसरत फ़तेह अली खान का था।
बीबीसी से हुई एक खास बातचीत में रहमान कहते हैं, ''नुसरत साहब के सूफ़ी संगीत को जब मैंने सुना तो मेरा नज़रिया ही बदल गया। मुझे उनसे सूफ़ी संगीत के साथ साथ कव्वाली सीखने का मौका भी मिला।''
सूफ़ी संगीत ने बदला नज़रिया
रहमान मानते हैं कि सूफ़ी संगीत के कारण उनके निजी जीवन में भी बहुत बदलाव आए हैं। इतना ही नहीं रहमान
ये भी सोचते हैं कि सूफ़ी संगीत ने सिर्फ उन्हीं की नहीं बल्कि सुनने वालों की सोच को भी बदला है।
वो कहते हैं, ''मैं कभी सोच भी नहीं सकता था कि 'ख्वाजा मेरे ख्वाजा' इस कदर लोगों को छू जाएगा। इस गाने ने हर इंसान को छुआ है चाहे वो किसी भी धर्म का हो। संगीत में यही तो ख़ास बात होती है कि वो लोगों को आपस में जोड़ता है।''
भई रहमान अगर जोड़ने की ही बात कर रहे हैं तो एक सवाल उनसे ये भी बनता है कि क्या वो कभी पाकिस्तान जा कर कोई कॉन्सर्ट करना चाहेंगे। इस सवाल के जवाब में रहमान कहते हैं,
''1998 में मुझे पाकिस्तान जाने का मौका मिला। मैंने पाकिस्तान जा कर नुसरत साहब के साथ कुछ गाने रिकॉर्ड किए। उसके बाद मुझे कभी दोबारा पाकिस्तान जाने का मौका नहीं मिला। अगर मौका मिले तो एक बार फिर पाकिस्तान जा कर मैं परफॉर्म करना चाहूंगा।''
रहमान कहते हैं, ''मैं उम्मीद करता हूं कि पाकिस्तान में हालात जल्द ही सुधर जाएं। वहां शांति हो।''
संगीत की कोई सीमा नहीं
बीबीसी से बात करते हुए रहमान ने बताया कि वो अपनी आनेवाली फ़िल्म 'हाई-वे' में कुछ पाकिस्तानी कलाकारों के साथ काम कर रहे हैं। वो कहते हैं, ''इम्तियाज़ अली निर्देशित फ़िल्म 'हाई-वे' में मैं ज़ेब और हानिया की जोड़ी के साथ काम कर रहा हूं। संगीत की कोई सीमा नहीं होती। 'रांझणा' में भी मैंने सिराज उप्पल के साथ काम किया था।''
रहमान का इश्क़
रहमान ने हाल ही में भारत की बी-सिटीज़ में 'रहमान इश्क़' नाम का एक कॉन्सर्ट किया। इस कॉन्सर्ट की शुरुआत उन्होंने कोलकाता से की, फिर उन्होंने जयपुर में ये कॉन्सर्ट किया।
रहमान इश्क़ का अंत उन्होंने अहमदाबाद में किया। रहमान कहते हैं इस कॉन्सर्ट के ज़रिए उनकी कोशिश थी कि वो अपनी जड़ों तक वापस पहुच पाएं।
वो कहते हैं, ''ये मेरे लिए भी एक मौका था कि मैं अपने सुनने वालों के रुबरु हूं और ये मेरे सुनने वालों के लिए भी एक मौका था कि वो मुझे प्रत्यक्ष रूप में देखें।