अब दाखिले के समय पिता के नाम के साथ ही छात्रों मां का नाम लिखना भी अनिवार्य होगा। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) ने देशभर के विश्वविद्यालयों को दिशा-निर्देश जारी करते हुए दाखिला फॉर्म के डिजाइन में बदलाव का आदेश दिया है। खास बात है कि अब आवेदन पत्र में हिंदी को भी प्राथमिकता मिलेगी।
सिंगल मदर (तलाकशुदा, विडो या लिव-इन-रिलेशनशिप) को अपने बच्चों को अक्सर स्कूलों या विश्वविद्यालयों में दाखिला दिलाते वक्त बहुत दिक्कत होती थी कि पिता के नाम वाले कॉलम में क्या लिखें, क्योंकि आवेदन पत्र में मां के नाम का कॉलम ही नहीं होता था। इसी के चलते आवेदन पत्र में पिता के नाम वाले कॉलम में पेन से काटकर मां का नाम लिख दिया जाता था।
दिक्कत उच्च शिक्षा में दाखिले के लिए ऑनलाइन आवेदन के चलते शुरू हुई, जिसके बाद मामला अदालत से होते हुए मानव विकास संसाधन मंत्रालय (एमएचआरडी) तक पहुंचा और नियमों में बदलाव करने का निर्णय लिया गया। इसके तहत शैक्षणिक सत्र 2015-16 में छात्रों को दाखिला आवेदन पत्र नए डिजाइन में उपलब्ध होगा।
एमएचआरडी के निर्देशों के चलते यूजीसी ने देशभर के विश्वविद्यालयों को आवेदन पत्र में पिता के साथ-साथ अलग से मां के नाम का कॉलम जोड़ने का निर्देश दिया था। इसी के साथ एक अन्य निर्देश भी जारी हुआ था, जिसमें आवेदन पत्र हिंदी भाषा को जोड़ने की बात कही थी। हालांकि तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के विरोध के बाद यूजीसी ने थोड़ा फेरबदल करते हुए अब अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी को शामिल करने का आदेश दिया है, यानी अब छात्रों को आजादी होगी कि वे अंग्रेजी के साथ अपनी मातृभाषा हिंदी में आवेदन भर सकें।
जेएनयू ने नियमों को दी हरी झंडी
यूजीसी के निर्देश पर जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रबंधन ने आवेदन पत्र के डिजाइन में बदलाव को हरी झंडी देते हुए मां के नाम का कॉलम और हिंदी भाषा को शामिल कर लिया है। छात्रों को शैक्षणिक सत्र 2015-16 में दाखिले के लिए नए डिजाइन के तहत आवेदन पत्र मिलेंगे।
मल्टी नेशनल कंपनियां भी मांग रही ब्योरा
उच्च शिक्षा के बाद जब छात्र मल्टी नेशनल कंपनियों, आईटी या फिर विदेशों में नौकरी या पढ़ाई के लिए जा रहे हैं तो सर्टिफिकेट में मां का नाम की भी मांग कर रहे हैं। डिग्री के साथ-साथ छात्रों को कैरेक्टर सर्टिफिकेट और डेट ऑफ बर्थ सर्टिफिकेट जमा कर रहे हैं। डेट ऑफ बर्थ में तो मां का नाम जुड़ा होता है, लेकिन कैरेक्टर सर्टिफिकेट में अलग से जुड़वा रहे हैं। इन दिनों कॉल सेंटर वेरिफिकेशन में भी पिता के साथ मां के नाम की जानकारी अलग से मांगी जा रही है। इसके अलावा सिक्योरिटी रीजन के चलते बैंक भी मां का नाम लिखवा रहे हैं।