श्रीलंका के बाद अब केंद्रीय हिंदी संस्थान अमेरिका और यूरोप के देशों में हिंदी को बढ़ावा देने की योजना बना रहा है। संस्थान उपाध्यक्ष डा. कमल किशोर गोयनका के मुताबिक हिंदी के शिक्षक वहीं तैयार किए जाएंगे।
केंद्रीय हिंदी संस्थान का उपाध्यक्ष बनने के बाद डॉ. गोयनका अपने पहले दौरे पर यहां आए थे। उन्होंने मीडिया को बताया कि विदेशों में केंद्रीय हिंदी संस्थान पाठ्यक्रम देगा, परीक्षाएं कराएगा और प्रमाणपत्र भी देगा। यहां के प्रोफेसर ही वहां परीक्षाएं कराने जाएंगे। बाकी प्रबंध संबंधित देश की सरकार करेगी। कई देशों के दूतावासों से संपर्क कर प्रस्ताव मांगे गए हैं। ज्यादातर देश इस सहमत हैं।
वे चाहते हैं कि उनके यहां हिंदी के प्रमाणित अध्यापक हों। ऐसा समझौता अभी तक केवल श्रीलंका के साथ ही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में दिए गए भाषण से भी भाषा को बल मिला है। इस भाषा में भी रोजगार के तमाम अवसर अब दिखते हैं। सभी नौ केंद्रों का आगरा मुख्यालय है, इसलिए ज्यादा जिम्मेदारी यहीं के स्टाफ की है। नई योजनाओं को शुरू करने की बजाय पुरानी योजनाओं को सक्रिय किया जाएगा। संस्थान की पत्रिकाओं को नया रूप देकर उनका लोकार्पण किया जाएगा।