शिनचैन, डोरेमान, निंजा हथौड़ी के जमाने में तेनालीराम, हातिम, मोगली और मुल्ला नसरुद्दीन का जादू कायम है। इनके किस्से-कहानियां पढ़ने की ललक बच्चों में बाकी है। हो भी क्यों न इनके किस्से हैं ही इतने रोचक और प्रेरक। इलाहाबाद के जीजीआईसी में लगे राष्ट्रीय पुस्तक मेले में बच्चों की भी किताबें बेहद पसंद आ रही हैं।
कार्टून नेटवर्क और एनिमेशन फिल्म देखकर टाइम पास करने के बजाए बच्चे यहां पर अपनी पसंद की किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों के साथ जुट रहे हैं।
दिल्ली से आए किड्स एजुकेशनल एड्स के उमेश सचदेवा ने बताया कि बच्चों में अभी भी कहानियों की किताबों के प्रति काफी क्रेज है। अभिभावक भी चाहते हैं कि उनके बच्चों में किताबें पढ़ने की जज्बा कायम रहे। नैतिक सीख से भरी कहानियों को पढ़कर बच्चों का विकास हो।
पुस्तक महल के संदीप पांडेय ने बताया कि बच्चों में पंचतंत्र की कहानियां, फेयरी टेल्स को काफी पसंद कर रहे हैं। कुछ अभिभावक और बच्चे तो बकायदा किताबों के नामों की लिस्ट लेकर आ रहे हैं। अपने बच्चों के लिए किताब लेने पहुंचे मुकेश और संगीता ने बताया कि कार्टून और एनिमेशन फिल्म देखने से बच्चों का मनोरंजन जरूर होता है लेकिन बौद्धिक विकास नहीं। नैतिक कहानियां पढ़कर ही बच्चों में सही गलत की समझ आती है।