जिस महिला और दो बच्चों को मरा मानकर अंतिम संस्कार कर दिया गया था, वह छह दिन बाद जिंदा निकले।
पति ने हत्या के आरोप में पत्नी के प्रेमी को भी नामजद कर दिया था। पुलिस जब प्रेमी को तलाशते हुए पंजाब पहुंची तो तीनों सकुशल बरामद हो गए। मामला उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले का है।
थाना नूरपुर क्षेत्र में दौलताबाद नहर के पास पुलिस ने शनिवार शाम एक महिला और दो मासूम बच्चों के शव बरामद किए थे। शव के पास सल्फास की गोली भी पड़ी थी।
शवों की शिनाख्त थाना स्योहारा के मुहल्ला शेखान निवासी सुभाष पाल ने अपनी पत्नी कौशल्या (25), पुत्र सूरज (6) और सचिन (2) के रूप में की थी। शुरूआती जांच में माना गया था कि दोनों बच्चे महिला के ही हैं और यह जहर खाकर खुदकुशी का मामला है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मामला गला दबाकर हत्या का निकला था।
प्रेम कहानी!
पुलिस कार्रवाई के बाद सुभाष ने तीनों शवों का अंतिम संस्कार कर दिया था। सुभाष ने पुलिस को बताया था कि कौशल्या तीन माह पूर्व थाना कांठ (मुरादाबाद) के गांव रसूलपुर निवासी ट्रक चालक वीर सिंह के साथ चली गई थी। तब से उसके पास नहीं आई थी। सुभाष ने वीर सिंह को तीनों की हत्या में नामजद किया था।
शक के दायरे में सुभाष भी था लेकिन हत्या के कारणों का खुलासा करने के लिए पुलिस को वीर सिंह की तलाश थी। स्योहारा थाना पुलिस ने जब गांव रसूलपुर पहुंचकर वीर सिंह के पिता रामचरन से पूछताछ की तो वीर सिंह की लोकेशन गुड़गांव बताई गई।
गुड़गांव में वीर सिंह से मिलने पर बड़ा खुलासा हुआ कि कौशल्या तो जिंदा है और वह उसके साथ लुधियाना की चांदन कॉलोनी में रहती है। पुलिस जब लुधियाना पहुंची तो कौशल्या अपने दोनों बच्चों के साथ सकुशल बरामद हो गई। पुलिस गुरुवार को सभी को स्योहारा ले आई।
'साहब! मैं जिंदा हूं'
स्योहारा थानाध्यक्ष दिनेश यादव के अनुसार प्रेमी वीर सिंह के साथ थाने पहुंची कौशल्या ने शपथपत्र देकर कहा है कि वह और उसके बच्चे जिंदा हैं। वह अपनी मर्जी से अपने प्रेमी वीर सिंह के साथ गई थी तथा उसी के साथ रहती है। उसकी और उसके बच्चों की हत्या नहीं हुई है। अपनी ही हत्या होने का पता चलने पर वह जिंदा होने का सबूत देने के लिए थाना स्योहारा आई है।
तो फिर किसके थे वे तीनों शव?
ट्रिपल मर्डर की गुत्थी सुलझाने में जुटी पुलिस तीनों के ही जिंदा मिलने पर और उलझ गई है। बड़ा सवाल यही है कि जब झाड़ियों में मिले शव कौशल्या और उसके बच्चों के नहीं थे, तो किसके थे।
'मैं, क्या करता'
इस पूरे घटनाक्रम पर सुभाष का कहना है कि आखिर मैं क्या करता? मैंने नाक की लौंग और हाथ के कंगन देखकर ही यह मान लिया कि महिला का शव उसकी पत्नी और दोनों बच्चों के शव उसके पुत्रों के हैं। तीनों शव से दुर्गंध आ रही थी। इसलिए शव की सील को खोला ही नहीं गया था और कफन पर ही गंगाजल डालकर अंतिम संस्कार कर दिया गया था।