यूपी पुलिस का बर्बर चेहरा एक बार फिर सामने आया है। कुछ पुलिसवालों ने एक सर्राफ को बीच रास्ते से अगवा कर लिया। रात भर थर्ड डिग्री देकर उसे मौत के घाट उतार दिया।
उसके बाद वे अगले दिन शव को एक गांव में ले जाकर फेंक दिया। लेकिन कुछ ग्रामीणों ने उन्हें देख लिया। जब सर्राफ के घरवालों को सूचना मिली तो उन्होंने पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन किया।
मामले की विभागीय जांच सोमवार को पूरी हुई। जिसके आधार पर दो सिपाहियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। जबकि पूर्व एसओ सैयद मंसूर आबिद और बाकी दो सिपाहियों को बचा लिया गया। घटना उत्तर प्रदेश के मुरादाबद जिले की है।
हत्या में पुलिसवालों की भूमिका
सतेंद्र रस्तोगी का 27 जनवरी की शाम पीर का बाजार दुकान से लौटते समय अपहरण हो गया था। अगले दिन मंगलवार की दोपहर को पटवाई थाना क्षेत्र के सुरजनपुर गांव में उसका शव मिला। ग्रामीणों ने पुलिस जीप से शव फेंके जाते देखा था।
तत्काल रामपुर पुलिस को सूचना दी। वह जीप मूंढापांडे थाने की निकली। कई बिंदुओं पर जांच शुरू हुई। लेकिन आखिर में परिजनों के आरोपों के अनुसार, पुलिसवालों की भूमिका सामने आई।
कॉल डिटेल ने खोली पोल
दो सिपाहियों अमरपाल और अमित की कॉल डिटेल निकलवाई गई तो उनकी लोकेशन घटना वाली रात कटघर के करूला में मिली। तब शक गहराया। रविवार को उनसे घंटों पूछताछ हुई। इसके बाद अफसरों ने दोनों सिपाहियों को दोषी माना।
सोमवार शाम अमरपाल और अमित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। इससे पहले पुलिस ने सुरजनपुर गांव के लोगों, रेलवे स्टैंड के ठेकेदार और परिजनों के बयान लिए। कॉल डिटेल के आधार पर नक्शा भी तैयार किया गया।
एसएसपी आशुतोष कुमार का कहना है कि पूरी घटना में मूंढापांडे में तैनात रहे दोनों सिपाहियों का हाथ सामने आया है। लाश फेंके जाने के स्थान पर उनकी लोकेशन मिली। अपहरण के एक दिन पहले भी अमरपाल कटघर आया था। हालांकि अभी सर्राफ का बैग बरामद नहीं हुआ है। पूर्व एसओ के खिलाफ भी जांच जारी है, कार्रवाई होगी।