गाजियाबाद जिले के इंदिरापुरम में कुछ दिन पहले तक हंसता खेलता परिवार मंगलवार रात हमेशा के लिए खत्म हो गया। घटनास्थल की हकीकत और पड़ोसियों की बातचीत पुलिस की आत्महत्या वाली थ्योरी पर सवाल खड़े कर रही है।
आखिर जिस कलेजे के टुकड़े पार्थ को अंकुर दिलोजान से चाहता था उसके मुंह में कट्टे की नली डालकर हत्या कैसे की होगी?
पत्नी-बेटे की हत्या कर की खुदकुशी!
पुलिस भले ही घटना की पूरी जिम्मेदारी उद्यमी पर डालकर गृहक्लेश का कारण बता रही है लेकिन कई सवाल पुलिस की थ्योरी पर निशान लगा रहे हैं।
अंकुर का कारोबार कई देशों में फैला है। ऐसे में उसके पास 315 बोर का अवैध असलहा पुलिस के लिए राज बना हुआ है। अंकुर ने अपने मुंह में तमंचे की नली डालकर खुद को गोली मारी। ऐसे में गोली चलते ही तमंचा बेड पर ही उसके मुंह के आसपास होना चाहिए था। मगर वह बेड के नीचे बेटे पार्थ के शव के पास पड़ा था।
कमरे में तीन गिलास और टूटा हुआ लैपटॉप मिला है। पुलिस की थ्योरी बता रही है कि अंकुर ने पहले सारिका को बाथरूम में गोली मारी। इस दौरान सारिका से हाथापाई भी हुई। पुलिस को बाथरूम से सारिका के बाल मिले हैं।
बेटे ने जूते पहने थे और कपड़े पहनकर पूरी तरह से तैयार था, जैसे वह बाहर से लौटा हो। पार्थ के मुंह में तमंचे की नली डालकर गोली मारी गई है।
एक पिता के लिए बेटे को बेरहमी से गोली मारना बेहद कठिन लगता है। आसपास के कुछ लोगों का कहना है कि पार्थ अंकुर की आंखों का तारा था। वह उसकी हर ख्वाहिश पूरी करता था। कुछ समय पहले ही उसकी जिद पर उसे साइकिल भी दिलाई थी।
एसएसपी धर्मेंद्र सिंह, एसपी सिटी मुनीराज, सीओ इंदिरापुरम रणविजय सिंह ने जांच शुरू की।
आखिर किसके लिए था चौथा कारतूस
अंकुर की जेब से मिला चौथा कारतूस पुलिस की थ्योरी पर सवाल खड़े करता है। अगर अंकुर ने गृहक्लेश के चलते यह कदम उठाया तो उसकी जेब से चौथा कारतूस क्यों निकला। कहीं वह किसी और को निशाना बनाना तो नहीं चाहता था। अंकुर को लगी गोली उसके तालू से होकर भेजे को छेदती हुई छत पर जा लगी।
एसएसपी धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि 12वीं मंजिल पर फ्लैट की एंट्री पर लगे दोनों सीसीटीवी कैमरे बंद मिले हैं। मामले में बिल्डर के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। पता चला है कि अंकुर पांच माह पहले ही ऑरेंज काउंटी में शिफ्ट हुए थे। उन्होंने यह फ्लैट किराए पर लिया था। इससे पहले वह दिल्ली के शाहदरा इलाके में रहते थे।
बढ़िया चल रहा था कारोबार
औद्योगिक क्षेत्र मसूरी स्थित फ्रेश टॉवेल को-प्राइवेट लिमिटेड नाम से फैक्ट्री के मैनेजर ओपी सिन्हा ने बताया अंकुर सभी कर्मचारियों से सद्भाव पूर्ण व्यवहार रखते थे। हंसमुख थे और सभी का हालचाल लेते थे। फैक्ट्री में रोज न आकर एक दिन छोड़कर आते थे।
उन्होंने बताया कि कारोबार बढ़िया चल रहा था और कोई परेशानी नहीं थी। वह करीब चार वर्ष से फैक्ट्री में कार्यरत हैं और उसके पहले एक वर्ष से अंकुर गुप्ता से परिचित थे। अंकुर गुप्ता और अंकित गुप्ता ही फैक्ट्री का कारोबार देखते थे और दोनों फैक्ट्री के डायरेक्टर हैं।
व्यवहार कुशल और हंसमुख था अंकुर
मसूरी औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमियों की मानें तो अंकुर और सारिका बेहद खुशमिजाज थे। दिवाली पर दोनों ने कई उद्यमियों के घर जाकर गिफ्ट और मिठाइयां बांटी। पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि अंकुर पर किसी का कर्ज भी नहीं था।
पड़ोसियों के मुताबिक भी अंकुर का हत्या और फिर आत्महत्या करना मुश्किल लग रहा है। पुलिस के अनुसार घटना रात 10 बजे के आसपास की है। पुलिस तमंचे के मेरठ के किठौड़ के बना होने का शक जता रही है।
सारिका की मां आती तो शायद न होती घटना
यमुना विहार, दिल्ली की रहने वाली सारिका के साथ अंकुर की शादी करीब नौ साल पहले हुई थी। पुलिस के अनुसार शाम सात बजे सारिका ने अपनी मां से फोन पर बात कर उन्हें घर बुलाया था। मां मंगलवार शाम को आने वाली थी। मगर देर होने के चलते आने से इंकार कर दिया। अगर शाम को वह पहुंच गई होती तो शायद यह घटना टल सकती थी।
उठ रहे सवाल
मनोचिकित्सक डॉ. अमिताभ साहा ने बताया कि एक व्यक्ति ने अगर पत्नी और बेटे को गोली मारी है तो वह कई साल से अवसादग्रस्त होगा। अवसादग्रस्त व्यक्ति खुद तो आत्महत्या कर सकता है मगर वह पत्नी और बेटे को मारता है तो इससे साफ है कि वह उनसे भी नाराज था। मगर इस मामले में इस प्रकार की चीजें कम ही देखने को मिल रही हैं।