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देश के इन 5 शातिर अपराधियों ने किए चौंकाने वाले कांड

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रोजना हो रही वारदातों में ज्यादातर के पीछे या तो फिल्मों का असर होता है या फिर कोई पुरानी रंजिश लेकिन जब मामला सीरियल मर्डर या रेप का हो तो यह पूरी तरह मनोवैज्ञानिक कारणों से होता है।
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ज्यादातर आरोपियों में या तो पीड़ितों के प्रति हीन भावना होती है या फिर कोई ऐसी घटना होती है जो उन्हें बड़े से बड़ा नरसंहार करने से भी नहीं रोकती। वारदात को अंजाम देने के इनके तरीकों ने ही उन्हें कुख्यात अपराधी के तौर पर जग जाहिर किया।

देश में एक के बाद एक ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें सीरियल अपराधियों ने पुलिस के पसीने छुड़ा दिए। इन पांच शातिर अपराधियों की कहानी पढ़कर आपके भी रोंगटे खड़े हो जाएंगे।
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1- ऑटो शंकर: सिनेमा ने बना दिया दरिंदा

एक ट्रांसपोर्टर के तौर पर चर्चित हो चुका शंकर नाम का ये शख्स कब दरिंदा बन गया किसी को पता नहीं चला। ट्रांसपोर्ट के अलावा भी वह देह व्यापार के धंधे से जुड़ गया। वर्ष 1988-89 में शंकर के गैंग ने कई लड़कियों को अपना‌ शिकार बनाया।

छह महीने के अंदर करीब 9 लड़कियों के लापता होने से पुलिस की भी नींद उड़ गई। हालांकि पहले पुलिस ने आशंका जताई कि दहेज के लिए पैसे न होने के कारण लड़कियों के घरवालों ने उन्हें देह व्यापार चलाने वालों को बेच दिया होगा लेकिन जब परिजनों ने इससे इनकार किया तो पुलिस की टेंशन बढ़ गई।

दिसम्बर 1988 में सुबलक्ष्मी नाम की एक छात्रा ने शिकायत की कि एक ऑटो ड्राइवर ने शराब की दुकान के सामने उसे अगवा करने की कोशिश की है। इसके बाद आसपास के इलाके में नजर रखकर संदिग्‍ध ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया। रातोंरात वह आरोपी ऑटो शंकर के नाम से देश भर में चर्चित हो गया। उसके अलावा पांच अन्य लोग भी इस गैंग में थे जिनमें से एक उसका भाई भी था।

ऑटो शंकर के खिलाफ केस शुरू हुआ तो उसने अदालत में खुद को बेगुनाह बताते हुए कहा कि सभी घटनाओं के लिए सिनेमा जिम्मेदार है। सिनेमा के असर ने ही उसे ऐसा करने को मजबूर किया है। पुलिस पड़ताल में खुलासा हुआ कि शंकर ने छह लड़कियों को अगवा करके उनसे बलात्कार किया और फिर उनकी हत्या कर दी। उसने सभी की लाशें घर में ही दफन कर दीं या फिर नदी में फेंक दी।

गिरफ्तारी के बाद वह जेल से भागने में कामयाब रहा लेकिन बाद में उसे फिर गिरफ्तार कर लिया गया। देश के इस चर्चित खूंखार हत्यारे को 1995 में फांसी दी गई थी।

2- सायनाइड मोहन: गर्भनिरोधक की जगह खिलाता था सायनाइड

शादी का लालच देकर मासूम लड़कियों को हवस का शिकार बनाने वाला टीचर मोहन कुमार अपने कुकर्मों की वजह से देश भर में चर्चित हुआ। मोहन कुमार से सायनाइड मोहन बने शारीरिक शिक्षा के इस टीचर की कहानी भी बेहद खौफनाक है।

हवस के अंधे इस शख्स ने करीब 20 लड़कियों की जिंदगी तबाह कर दी। वह अविवाहित लड़कियों को ही निशाना बनाता था और शादी के बाद उन्हें गर्भनिरोधक गोलियां के नाम पर सायनाइड की गोलियां खिलाकर मार देता था। उसने वर्ष 2003 से 2009 के बीच करीब 20 महिलाओं की जान ली।

इनमें से ज्यादातर को उसने सुहागरात के बाद ही सायनाइड की दवा खिलाई थी। वर्ष 2009 में उसने अनीथा नाम की लड़की को शिकार बनाया और यही उसके अपराधों के खुलासे की वजह बनी। अनीथा की मौत के बाद उसके कुकर्मों की पोल खुली और वह फंस गया।

पुलिस के अनुसार, मोहन ने सुनंदा नाम की एक महिला को भी शादी क‌ा वादा करके अपने जाल में फंसाया था। इसके लिए उसने उससे कई बार मुलाकात भी की। एक दिन सुनंदा घर से मंदिर जाने के लिए निकली लेकिन दोबारा नहीं लौटी। बाद में उसकी लाश मैसूर में बस अड्डे के पास मिली थी। मोहन को अब तक तीन मामलों में दोषी करार दिया जा चुका है।

3- अक्कू यादव: भरी अदालत में काटा गया इस रेपिस्ट का गुप्तांग

नागपुर में आतंक का पर्याय बन चुके अक्कू यादव से हर महिला खौफ खाती थी। जिस इलाके में वह रहता था वहां के करीब 300 परिवारों में से शायद ही कोई ऐसा हो जो अक्कू की गंदी नजर से बचा हो।

अक्कू सीरियल किलर नहीं एक स्थानीय गुंडा और सीरियल रेपिस्ट था। उसकी गैंग के लोग भी ऐसी ही शर्मनाक हरकतें करते थे और 10-11 साल की मासूम बच्चियों को अगवा करके गैंगरेप करते थे।

अक्कू यादव ने कॉल सेंटर में काम करने वाली एक युवती से रेप किया। युवती ने पुलिस से उसकी शिकायत की लेकिन पुलिस ने युवती को ही डांटकर भगा दिया। आरोप है कि अक्कू ने स्‍थानीय पुलिस और अधिकारियों को पैसे व शराब के बल पर खरीद लिया था।

रेप पीड़िता को जब इंसाफ की उम्मीद नहीं दिखी तो वह खुद ही आगे आकर आरोपी से बदला लेने उतर पड़ी। आरोपी अक्कू ने एक दिन सरेंडर किया और 13 अगस्त 2004 को मामले की सुनवाई के लिए अक्कू को कोर्ट में पेशी के लिए लाया गया। तभी हाथ में चाकू और मिर्ची पाउडर लिए करीब 200 महिलाओं ने वहां धावा बोला और पुलिस की कस्टडी में मौजूद अप्पू को बाहर खींच कर उस पर हमला बोल दिया।

देखते ही देखते अप्पू पर करीब 50 बार चाकू से ‌हमला हुआ। यही नहीं, एक महिला ने चाकू से उसका गुप्तांग भी काट दिया। घटना के कुछ ही देर में अप्पू ने अदालत परिसर में ही दम तोड़ दिया।

4- सायनाइड मल्लिका: देश की पहली महिला सीरियल किलर!

45 साल की केडी केंपम्मा उर्फ मल्लिका को लोग सायनाइड मल्लिका के नाम से ज्यादा जानते हैं। इसे देश की पहली महिला सीरियल किलर भी माना जाता है। उसने करीब 7 लोगों को अपनी दरिंदगी का शिकार बनाया।

दक्षिण भारत के बड़े मंदिरों में अक्सर दिखने वाली मल्लिका ने लोगों के बीच खुद को बेहद धार्मिक महिला के तौर पर प्रोजेक्ट किया और धीरे-धीरे बहुतों की चहेती बन गई। उसने रईस घरानों की महिलाओं को भरोसे में लिया और उन्हें बुरे वक्त में अच्छी सलाह देकर कष्टों से उबरने के तरीके भी सुझाती थी।

महिलाओं को पूरी तरह भरोसे में लेने के बाद वह उन्हें बाधा दूर करने के लिए तंत्र साधना के नाम पर एक नियत स्‍थान पर बुलाती थी और पूजा के दौरान सायनाइड मिला हुआ पानी पिलाकर उनकी हत्या कर देती थी।

इसके बाद वह उनका सारा पैसा व गहने लेकर फरार हो जाती थी। अक्टूबर 1999 में उसने बंगलुरू के बाहरी इलाके में एक महिला को ऐसे की मार डाला लेकिन यह मामला चर्चा में आ गया। पुलिस ने आरोपी को खोजना शुरू किया और वर्ष 2007 में मल्लिका को गिरफ्तार कर लिया गया। उसने छह अन्य हत्याओं का जुर्म कबूल किया। वर्ष 2012 में उसे अदालत ने मौत की सजा सुनाई हालांकि बाद में ऊपरी अदालत ने इसे उम्रकैद में तब्दील कर दिया।
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5- जयशंकर: रेप के बाद कुल्हाड़े से काटता था

करीब 30 महिलाओं से रेप करने के आरोपी एम जयशंकर ने एक के बाद एक कई बड़े चौंकाने वाले कांड किए। उस पर 15 लोगों की हत्या का भी आरोप है। यही नहीं, पुलिस हिरासत में रहने के दौरान वह जेल से फरार भी हो चुका है। उसकी पहचान थी कि वह कुल्हाड़े से लोगों की हत्या करता था।

वर्ष 2011 में जयशंकर को रेप और हत्या के आरोप में पुलिस ने गिरफ्तार किया था लेकिन वह एक दिन कोयम्बटूर से धर्मपुरी ले जाते वक्त भाग निकला। उसे लेकर जा रहे कांस्टेबल ने शर्म के मारे खुद को गोली मार ली थी।

जयशंकर ने फरार होने के बाद भी हैवानियत नहीं छोड़ी और बेल्लारी में उसने छह महिलाओं से रेप के बाद उनकी हत्या कर दी। इसके अलावा उसने धर्मपुरी में भी एक व्यक्ति और एक बच्चे को मार डाला।

जयशंकर ने 23 अगस्त 2009 को सलेम जिले में एक महिला पुलिस कांस्टेबल को अगवा करके उससे रेप किया और फिर उसे मार डाला। कांस्टेबल की लाश एक महीने बाद बरामद हुई थी। घटना के बाद तिरुपुर पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की और 19 अक्तूबर को जयशंकर को गिरफ्तार कर लिया।

फरार होने के बाद भी वह लगातार घटनाओं को अंजाम देता रहा जिससे पुलिस की मुश्किलें बढ़ती गईं। हालांकि एक बार फिर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। एक मामले में उसे 10 साल की कैद की सजा सुनाई गई है, जबकि 20 से ज्यादा मामलों की सुनवाई अभी भी चल रही है।
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