फेसबुक पर खुद को नास्तिक बताने वाले एक छात्र को उसके पिता ने ही जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। उसे धर्म की अवमानना का दोषी करार देते हुए अदालत ने तीन साल जेल की सजा सुनाई है।
मामला मिस्र का है। इंजीनियरिंग की पढाई करने वाले 22 वर्षीय करीम अल-बन्ना को इस मामले में बीते साल नवंबर में गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट में इसकी सुनवाई के बाद शनिवार को उसे जेल भेजा गया है।
इस केस से जुड़े दूसरे वकील ने कहा कि मामले की सुनवाई के दौरान छात्र के पिता ने कहा कि उनके बेटे ने इस्लाम को न मानने की बात करके उन्हें शर्मिंदा किया है।
पड़ोसी ने कैफे में बुलाया और फिर...
डेली मेल के अनुसार, मिस्र में मुस्लिम ब्रदरहुड समर्थित सरकार और राष्ट्रपति मोहम्मद मोरसी को हटाए जाने के बाद से 'धर्म की अवमानना' के मामले बढ़ गए हैं।
मिस्र के कानून के मुताबिक नास्तिक होना गैरकानूनी नहीं है लेकिन करीम ने इस्लाम पर भरोसा न करने के चलते लोगों की धार्मिक भावनओं को चोट पहुंचाई है।
छात्र के पड़ोसी ने उसका फेसबुक स्टेटस पढ़ा था और फिर उसे एक कैफे में मिलने के लिए बुलाया। जहां उसने चुपके से पुलिस को बुला लिया। इस बात की जानकारी छात्र का केस लड़ने वाली वकील फातमा सेरज ने दी है। फातमा विचार और अभिव्यक्ति की आजादी की मुहिम चलाने वाले एक संगठन से भी जुड़ी हैं।
बलि का विरोध करने पर भी केस
दिसंबर 2012 में 27 वर्षीय ब्लॉगर अल्बर सैबर को ईशनिंदा के मामले में तीन साल की कैद की सजा सुनाई गई थी। इसके अलावा पिछले साल जून में एक ईसाई व्यक्ति को इस्लाम के अपमान के आरोप में छह साल की जेल हुई थी।
ईद के त्योहार में भेड़ों की बलि दिए जाने को लेकर विरोध कर रही फातमा नाऊत के खिलाफ कोर्ट में केस चल रहा है जबकि कवि करीम कैबर को ईश्वर को न मानने के आरोप में पिछले वर्ष जेल की सजा सुनाई गई।
मिस्र की सैनिक सरकार ने इस्लाम के पक्ष में अपना झुकाव दिखाया है। लगातार सामने आ रहे मामलों ने सरकार को भी निशाने पर लिया है।