यूपी में एटा के गांव राया में बदले की भावना के जुनून में वहशी बने बेटों ने पिता के हत्यारोपी विश्राम सिंह की कुल्हाड़ी और फरसे से काटकर हत्या कर दी। विश्राम सिंह को आरोपियों ने खेत में दबोच लिया, उसे घसीटते हुए अपने घर ले गए। गांव में ऐलान कर दिया कि ‘किसी में हिम्मत है तो इसे आकर बचा ले’।
कुल्हाड़ी से विश्राम सिंह की गर्दन काटकर हत्या कर दी। हत्या के बाद भी उसके शव पर कुल्हाड़ी व फरसे के वार से करते रहे और शव को क्षत विक्षत कर अपने घर के बाहर फेंक दिया। ग्रामीण मूकदर्शक बने घटना को देखते रहे लेकिन किसी की उसे जाकर बचाने की हिम्मत नहीं पड़ी।
घटना से गांव में जातीय तनाव की स्थिति बनी हुई है।
दफेदार के बेटों ने विश्राम सिंह को काट डाला
दिल दहला देने वाली यह घटना गुरुवार देर शाम हुई। मृतक विश्राम सिंह दलित (50) मूल रूप से जिला फर्रुखाबाद थाना मेरापुर के गांव नौली विछौली के रहने वाला था। माता-पिता की मौत के बाद बचपन से ही थाना जैथरा के गांव राया निवासी बहनोई इच्छाराम के पास रह रहा था। गांव में ही उसकी शादी करा दी गई थी। बताया जा रहा है कि 1992 में ठाकुर दफेदार ने जातीय वैमनस्यता के चलते इच्छाराम की पिटाई कर दी थी और घर में आग लगा दी थी।
इस घटना के बाद विश्राम सिंह ने दफेदार की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में विश्राम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। परिवारीजनों ने उच्च न्यायालय में अपील की। करीब छह साल पहले विश्राम सिंह हाईकोर्ट से जमानत पर रिहा हुआ और अपने परिवार के साथ दिल्ली में जाकर रहने लगा। पांच माह पहले ही वह अपनी पत्नी सुनीता, बच्चों के साथ दिल्ली से राया आकर रहने लगा था।
गुरुवार देर सायं करीब छह बजे विश्राम सिंह शौच के लिए जाते समय दफेदार के बेटों शीलेंद्र, सतेंद्र, भूरे और तीन अज्ञात लोगों ने उसे पकड़ लिया और पीटने लगे। बाद में गांव में लाकर हत्या कर दी। घटना की जानकारी किसी तरह मृतक की पत्नी सुनीता को लगी तो हत्यारोपियों के घर पहुंची। वहां विश्राम सिंह का शव पड़ा मिला। देर रात घटना की सूचना पर एएसपी विसर्जन सिंह यादव, सीओ शमशेर सिंह, थानाध्यक्ष जैथरा मय फोर्स पहुंचे और शव को कब्जे में ले लिया। मामले की रिपोर्ट सुनीता ने शीलेंद्र, सतेंद्र, भूरे और तीन अज्ञात के खिलाफ दर्ज कराई है।