सर्द मौसम, स्याह रात, और पटरियों पर धड़धड़ाती राजधानी एक्सप्रेस। रात के करीब 12 बजे थे। आधी रात के वक्त ट्रेन में जब ज्यादातर यात्री अपनी-अपनी बर्थ पर सो रहे थे, तभी एक एक रक्षक ने ही भक्षक वाली करतूत शुरू कर दी। सैन्यकर्मी की नजर ट्रेन में सफर कर रही एक किशोरी पर पड़ी और उसके मन में जैसे हवस का भूत सवार हो गया। वो भूल गया कि वो एक सैन्यकर्मी है। लोगों की हिफाजत करना उसका फर्ज है।
हैरानी की बात ये भी है कि उस वक्त युवती के पिता भी मौजूद थे, बेशर्म हुए सैन्यकर्मी को इसका न तो डर रहा न अपने पद की गरिमा का लिहाज और विरोध करने पर भी युवती को छेड़ने से बाज नहीं आया।
पानी जब सिर के ऊपर से निकल गया तो किशोरी के पिता ने रेलवे पुलिस को बुला लिया। आखिरकार, सैन्यकर्मी किए की सजा से बच नहीं पाया और जेल जाना ही पड़ गया।