चर्चित आरुषि-हेमराज मर्डर केस में अपनी फाइनल बहस के दूसरे दिन भी डिफेंस ने कोर्ट के समक्ष यह बात सिद्ध करने का प्रयास किया कि हेमराज आरुषि के कमरे में नहीं था।
डिफेंस का कहना था कि जिस समय डॉक्टर तलवार की छत से हेमराज की लाश बरामद हुई, उसके पैर में चप्पलें थीं।
सीबीआई का कहना है कि आरुषि-हेमराज आपत्तिजनक हालत में थे। ऐसा कैसे संभव है कि कोई व्यक्ति चप्पल पहनकर ऐसी अवस्था में हो। बाकी जिरह के लिए कोर्ट ने सुनवाई को 28 अक्तूबर की तारीख तय की है।
डिफेंस के अधिवक्ता तनवीर अहमद मीर और मनोज शिशौदिया ने कोर्ट को बताया कि आरुषि और हेमराज के कपड़ों का डीएनए टेस्ट हुआ था, मगर किसी से भी एक-दूसरे का डीएनए नहीं मिला।
इसके अलावा सीबीआई ने आरुषि के कमरे से 24 फिंगर प्रिंट लिए थे, मगर एक भी फिंगर प्रिंट हेमराज के फिंगर प्रिंट से मैच नहीं हुआ।
इस मामले के जांच अधिकारी रहे सीबीआई के एएसपी आईजीएल कौल ने भी अपनी क्लोजर रिपोर्ट में डॉक्टर एमएस दहिया की बात को सही नहीं माना था।