दिल्ली गैंगरेप के आरोपियों पर फैसले की तारीख तय होने के बाद उनके आरके पुरम स्थित रविदास कैंप में मंगलवार को खलबली सी दिखाई दी। आरोपी विनय के घर में तो मातम पसरा हुआ था।
एक महिला झुग्गी के सामने बैठकर रो रही थी और दो युवक उसे सांत्वना दे रहे थे। आरोपी पवन के परिजनों को सजा की तारीख के बारे में जानकारी नहीं थी।
अमर उजाला संवाददाता ने गैंगरेप के आरोपियों को सजा सुनाने की तारीख तय होने के बाद मंगलवार शाम को रविदास कैंप का जायजा लिया।
'रामसिंह की झुग्गी अब बंद ही रहती है'
आरोपी मुकेश, विनय और पवन कुमार इसी कैंप में रहते हैं। फांसी लगाकर खुदकुशी करने वाला रामसिंह भी इसी कैंप में रहता था। मुकेश व रामसिंह जिस झुग्गी में रहते थे, वह भी बंद मिली।
पड़ोसियों ने बताया कि गैंगरेप के बाद से झुग्गी बंद ही रहती है। कभी-कभार माता-पिता राजस्थान से यहां आकर एक-दो दिन ठहरते हैं। कुछ मीटर की दूरी पर आरोपी विनय का परिवार रहता है।
समाचार देख जोर-जोर से रोने लगी महिला
विनय के पिता एयरपोर्ट पर ड्यूटी करने गए हुए थे। विनय की बहन इधर-उधर घूमती दिखाई दी। विनय के घर के बाहर एक महिला (मां नहीं) जोर-जोर से रो रही थी। पड़ोसियों ने बताया कि वह टीवी पर समाचार देखने के बाद रोने लगी है। जब संवाददाता ने महिला व वहां बैठे युवकों से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने चिल्ला कर बात करने से इंकार कर दिया।
घरवालों को जैसे कुछ पता ही न हो
पवन के घर में उसकी छोटी बहन थी। वह पानी भरने में व्यस्त थी। मां सब्जी की दुकान लगाती है और वह दुकान पर लगी हुई थी। छोटी बहन को देखने से लग रहा था कि उसे कुछ पता नहीं है। बहन ने भी बात करने से इनकार कर दिया।
कैंप में मीडिया की उपस्थिति को देखकर लोग एकत्रित होने लगे और मीडिया कर्मियों से ही पूछने लगे कि आज क्या हुआ है। रविदास कैंप के प्रधान बिहारी लाल को भी पता नहीं था कि आरोपियों को सजा सुनाने का समय आ गया है।
बिहारी लाल ने बताया कि कैंप में लोग सब कुछ भूल चुके हैं और सब लोग अपने कामों में व्यस्त रहना चाहते हैं। कैंप के बाहर रोड पर कुछ महिलाएं एकत्रित होकर चर्चा कर रही थी कि नाबालिग को तो कम सजा मिली है, मगर इन लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिलेगी।